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बसपा नेता रामबिहारी चौबे हत्याकांड: मारी थीं छह गोलियां, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेटा बोला- न्याय की जगी उम्मीद

Tue, 15 Dec 2020 04:36 PM IST
गीतार्जुन गौतम पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 15 Dec 2020 04:36 PM IST
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BSP leader Rambihari Choubey murder case: six shots were fired son said after order of Supreme Court hope for justice
बसपा नेता रामबिहारी चौबे - फोटो : अमर उजाला

वाराणसी के चौबेपुर थाना अंतर्गत श्रीकंठपुर निवासी बसपा नेता रामबिहारी चौबे को छह गोली मारकर उनकी हत्या की गई थी। सेंट्रल जेल में निरुद्ध एमएलसी बृजेश सिंह के करीबी रामबिहारी चौबे के घर में घुसकर अलसुबह की गई उनकी हत्या जिले में ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के अन्य जनपदों में भी महीनों तक सुर्खियों में थी। हालांकि इस वारदात का दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि तकरीबन एक साल चार माह तीन बदमाश गिरफ्तार किए गए थे।

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चार दिसंबर 2015 की सुबह श्रीकंठपुर निवासी बसपा नेता रामबिहारी चौबे के घर में घुस कर दो बदमाशों ने उनका पैर छूने के बाद अंधाधुंध फायरिंग कर हत्या कर दी थी। वारदात के दौरान दो अन्य बदमाश रामबिहारी के दरवाजे के समीप खड़े थे।
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बसपा नेता के बेटे अमरनाथ चौबे ने सोमवार को ‘अमर उजाला’ को बताया कि पिता की हत्या के दौरान वह दिल्ली में थे। सूचना मिलते ही वापस घर लौट कर आए तो उनकी दुनिया ही उजड़ गई थी और सिर से पिता का साया उठ चुका था। उन्हें कई लोगों ने तब कहा था कि मुकदमा सोच-समझ कर और नामजद दर्ज कराओ। उन्हें उस समय कुछ समझ में नहीं आ रहा था, इसलिए उन्होंने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। चौबेपुर थाने की पुलिस एक साल चार महीने तक हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।

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एसटीएफ की वाराणसी इकाई के इनपुट के आधार पर छह अप्रैल 2017 को तत्कालीन चौबेपुर थानाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार तिवारी ने गाजीपुर के मरदह निवासी शार्प शूटर अजय मरदह व आशुतोष सिंह सनी और बिहार के भभुआ निवासी नागेंद्र सिंह उर्फ राजू बिहारी को गिरफ्तार किया था। फिलहाल अजय मरदह और राजू बिहारी जेल में ही निरुद्ध हैं, जबकि आशुतोष जमानत पर बाहर है। अमरनाथ ने कहा कि वारदात को अंजाम देने वाले शूटरों और साजिशकर्ताओं को भी सजा मिले तभी उनके पिता की आत्मा को शांति मिलेगी।

...और तब विधायक सुशील गिरफ्तारी का विरोध करने पहुंचे थे
छह अप्रैल 2017 की सुबह चौबेपुर थाने की पुलिस अजय मरदह, आशुतोष और राजू बिहारी को गिरफ्तार करने चांदमारी स्थित एक अपार्टमेंट के फ्लैट पहुंची थी। तीनों की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए विधायक सुशील सिंह मौके पर पहुंचे थे। घंटों की हुज्जत के बाद भी पुलिस ने विधायक की एक न सुनी थी और तीनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत बताते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद विधायक सुशील सिंह का नाम दर्ज मुकदमे में साजिशकर्ता के तौर पर विवेचना में पुलिस ने शामिल किया। हालांकि बाद में चौबेपुर थाने की पुलिस ने ही विधायक सुशील को क्लीन चिट दे दी थी।

पुलिस ने भरोसा तोड़ा तो गए न्यायालय की शरण में
अमरनाथ चौबे ने बताया कि उनके पिता की हत्या के मुकदमे की विवेचना में आठ विवेचक बदले गए। पुलिस हमारे द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्य और तथ्यों की लगातार अनदेखी करती रही और इसके पीछे अजब-गजब तर्क दिए जाते थे।

इससे निराश होकर हम सितंबर 2018 में उच्चतम न्यायालय की शरण में गए। इसके बाद भी पुलिस यही कहती थी कि अब इस प्रकरण में कुछ खास नहीं बचा है और न्यायालय की शरण में जाने से भी कोई फायदा नहीं होगा। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद अब मन में यह विश्वास जगा है कि हमें एक न एक दिन न्याय और पिता की आत्मा को शांति जरूर मिलेगी।

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