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Exclusive: जापान में लगेंगे बोधि वृक्ष, जानें- वन विभाग ने क्यों घोषित किया है विरासत वृक्ष, क्या है खासियत

Tue, 11 Mar 2025 04:06 PM IST
प्रगति चंद सार्थक पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
सार्थक पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 11 Mar 2025 04:06 PM IST
सार

सारनाथ में मौजूद ऐतिहासिक बोधि वृक्ष अब जापान में भी पहली बार लगाया जाएगा। इसके लिए पांच लोगों को पौधे दिए गए हैं। इन बोधि वृक्षों को विभाग ने विरासत के रूप में सहेजा है। 

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Bodhi tree will be planted in Japan plants given to 5 people from Sarnath
जापान में लगेंगे बोधि वृक्ष - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ में ऐतिहासिक बोधि वृक्ष (पीपल) के दर्शन करने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं। अब जापान में भी पहली बार बोधि वृक्ष लगाया जाएगा। जापान के पांच लोगों ने वन विभाग की मदद से पांच बोधि वृक्ष लिए हैं। इन बोधि वृक्षों को विभाग ने विरासत के रूप में सहेजा है। इसके साथ ही मांग के अनुसार अन्य पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं। 

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सम्राट अशोक की पुत्री संघमित्रा ने जो बोधि वृक्ष श्रीलंका में लगाया था, ये उसी वृक्ष की शाखा से सारनाथ में लगाई गई थी। यह वृक्ष वहीं है, जहां भगवान बुद्ध ने अपने पांच शिष्यों को शांति उपदेश दिया था। बाद में इसका एक हिस्सा ले जाकर श्रीलंका में लगाया गया था। सिद्धार्थ को 35 साल की अवस्था में पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। 

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लगातार टूट रहा वृक्ष 

बोधि वृक्ष लगातार टूट कर गिर रहा है। इस वजह से वन विभाग और महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया की परेशानी बढ़ रही है। वृक्ष को बचाने के लिए लोहे के खंभे भी लगाए जा रहे है। श्रीलंका के महाबोधि सोसाइटी के संस्थापक ने 1931 में इसे लगाया था। सारनाथ में पवित्र बोधि की टहनियों के गिरने से बौद्ध भिक्षुओं में निराशा हैं। धार्मिक मान्यताओं की वजह से बौद्ध भिक्षुओं के लिए इसकी छोटी सी टहनी ही नहीं, एक पत्ती भी बेशकीमती है।  
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संस्थापक लाए थे श्रीलंका से
करीब 2600 वर्ष पहले बोध गया में भगवान बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस वृक्ष का एक हिस्सा बाद में श्रीलंका में लगा दिया गया था। सन 1931 में श्रीलंका से वृक्ष की एक शाखा महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के संस्थापक भिक्षु अनागारिक धर्मपाल सारनाथ ले आए और उसे मूलगंध कुटी विहार बौद्ध परिसर में लगाया। उस समय से ही देश-विदेश से आने वाले बौद्ध अनुयायी यहां आकर दर्शन-पूजन करते हैं और इस वृक्ष की परिक्रमा करते हैं।
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क्या बोले अधिकारी

जापान से आए पांच लोगों को बोधि वृक्ष दिया गया है। वह वाराणसी एक प्रोजेक्ट के लिए आए थे। आगे भी मांग के हिसाब से देश-विदेश के लोगों को यह वृक्ष दिया जाएगा। बोधि वृक्ष को विरासत वृक्ष भी घोषित किया गया है। -स्वाति, प्रभागीय वनाधिकारी, वाराणसी
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