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श्रद्धा से किया गया श्राद्ध ही पूर्ण होता है, पितृपक्ष पितरों से जोड़ता है
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वाराणसी। देखा जाय तो पुत्र, मां-बाप के ऋण से कभी मुक्त नहीं होता, लेकिन शास्त्रों के अनुसार पितरों के ऋण को हम श्राद्ध द्वारा पूर्ण करते हैं। यह विचार प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय ने भाजपा प्रबुद्ध प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित साप्ताहिक वेबिनार गुरुवारीय अड़ी के बनारस और पितरों पर हुई चर्चा में व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि पर्व का तात्पर्य है जोड़ना, ये पितृ पक्ष हमें पितरों से जोड़ता है। पितृपक्ष के 15 दिनों में मातृ नवमी एवं अमावस्या का विशेष महत्व होता है। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री व बीएचयू के प्रोफेसर डॉ रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि पुत्र की पुत्रता पिता के आदेश का पालन, मृत्यु के बाद ब्रह्मभोज और गया में पिंडदान में निहित है। प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि जो अपने ज्ञान से प्रकाशित करे, वो काशी है। पितृपक्ष में जो तर्पण एवं श्राद्ध करते हैं, उसके बदले में पितर हमें आयु, शांति, सुख, सौभाग्य और मोक्ष प्रदान करते हैं। डॉ रामेश्वर नाथ ओझा ने पितृपक्ष सनातन पद्धति का जिक्र किया। विषय प्रवर्तन धर्मेंद्र सिंह ने एवं संयोजन डॉ सुनील मिश्र ने किया। इस दौरान गंगा घाट एवं पिशाच मोचन में चल रहे पिंडदान के महत्व को बताया गया। चर्चा में श्रीकांत मिश्र, डॉ राम सुधार सिंह, डॉ श्रद्धानंद, डॉ मन्नू यादव, जमुना शुक्ला, विद्यासागर राय, अशोक पांडेय, अशोक चौरसिया, नवरतन राठी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि पर्व का तात्पर्य है जोड़ना, ये पितृ पक्ष हमें पितरों से जोड़ता है। पितृपक्ष के 15 दिनों में मातृ नवमी एवं अमावस्या का विशेष महत्व होता है। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री व बीएचयू के प्रोफेसर डॉ रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि पुत्र की पुत्रता पिता के आदेश का पालन, मृत्यु के बाद ब्रह्मभोज और गया में पिंडदान में निहित है। प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि जो अपने ज्ञान से प्रकाशित करे, वो काशी है। पितृपक्ष में जो तर्पण एवं श्राद्ध करते हैं, उसके बदले में पितर हमें आयु, शांति, सुख, सौभाग्य और मोक्ष प्रदान करते हैं। डॉ रामेश्वर नाथ ओझा ने पितृपक्ष सनातन पद्धति का जिक्र किया। विषय प्रवर्तन धर्मेंद्र सिंह ने एवं संयोजन डॉ सुनील मिश्र ने किया। इस दौरान गंगा घाट एवं पिशाच मोचन में चल रहे पिंडदान के महत्व को बताया गया। चर्चा में श्रीकांत मिश्र, डॉ राम सुधार सिंह, डॉ श्रद्धानंद, डॉ मन्नू यादव, जमुना शुक्ला, विद्यासागर राय, अशोक पांडेय, अशोक चौरसिया, नवरतन राठी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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