मिशन 2019 के लिए पूर्वांचल के ओबीसी वोट बैंक पर भाजपा की पैनी नजर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी भी पिछले महीने आजमगढ़, मिर्जापुर और वाराणसी में सभाएं कर इन्हीं बातों को स्पष्ट कर चुके हैं। पूर्वांचल प्रदेश का सबसे पिछड़ा भाग है। यहां की ज्यादातर आबादी राजभर, कुर्मी, पटेल और यादवों की है। लोग किसानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और वर्ग सब्जी उगाकर अपनी आजीविका चलाते हैं।
इसके मद्देनजर ही भाजपा ने लोकसभा चुनाव का आगाज पूर्वांचल से किया है। रविवार की सभा में कार्यकर्ताओं को शाह के अगले चुनाव में भाजपा को जीत दिलाने का संकल्प इसकी बानगी भर है। सबसे पहले जुलाई में शाह मिर्जापुर और वाराणसी आए थे इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजमगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर में सभाएं की।
हर सभा में मोदी ने पिछड़े, किसान और पिछड़ों की ही बात की। रविवार को भाजपा शाह ने अपने भाषण में सपा-बसपा और कांग्रेस पर हमला तो बोला लेकिन उनका फोकस ओबीसी वोटरों पर ही रहा। शाह के भाषण का सार था कि पिछ़ड़ों की चिंता सिर्फ भाजपा को है।
चुप भाजपा कर रही है बड़ी कोशिश
पिछड़ों के वोट भाजपा के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं, इसका अंदाज सुभासपा अध्यक्ष और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर द्वारा लगातार पिछड़ों के हितों की वकालत करने से लगाया जा सकता है। राजभर मु्ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे चुके हैं। शाह को भी नहीं बख्शा। बावजूद इसके भाजपा कार्रवाई के बजाय चुप है। अब वह पिछड़ों के लिए ही लोकसभा में फिर से विधेयक पारित करा चुकी है।
एकात्मवाद से शुरू हुई बात पहुंची एनआरसी तक
मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया गया। पांच अगस्त को इस नए नाम का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम के शुरू पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्मवाद व मानवतावाद से शुरु हुई। मंत्री ने रेल के विस्तर व विकास को एकात्मवाद व अन्त्योदय से जोड़ा। इसके साथ ही राजनीतिक हमले भी शुरू हो गए।
वक्ताओं ने पिछले सरकारों के नाकामियों को गिनाया। इसके बाद मुख्य अतिथि अमित शाह ने अपनी बात पंडित दीनदयाल व मुग़लसराय से शुरू की उसके वह विपक्षी दलों पर हमलावर हो गए। मुद्दा ओबीसी व एनआरसी का छेड़ दिया। ममता तथा राहुल गांधी को निशाने पर ला दिया। एनआरसी मुद्दे पर उनको खींचने लगे।
एनआरसी का मुद्दा उठाकर श्री शाह ने राष्ट्रवाद का जज्बा लोगों भरने की कोशिश की। उनका कहना था कि 40 लाख बंगलादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं। जिसका समर्थन ममता कर रही हैं। जनता से इस मुद्दे पर हामी भराई। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्मवाद को जोड़ा कहा कि उन्हीं के आदर्शो को आत्मसात करते केंद्र व प्रदेश सरकार सबका साथ सबका विकास के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने ने एकात्मवाद व एनआरसी को साधते हुए राजनीतिक समन्वय भी तैयार किया। साथ ही लोकसभा चुनाव की राजनीति के लिए कार्यकर्ताओं को दिशा भी दे गए।