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नगर निकाय चुनावः पटेल और राजभर वोटों को सहेजने के लिए भाजपा ने इन मंत्रियों को दी जिम्मेदारी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 13 Nov 2017 05:19 PM IST
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- फोटो : FILE PHOTO
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निकाय चुनाव में भाजपा ने पटेल समाज के साथ ही राजभर वोटों को सहेजने की पुख्ता रणनीति बनाई है। हालांकि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से निकाय चुनाव में गठबंधन न होने के चलते पार्टी की चुनौतियां बढ़ गई हैं और अब अंदरखाने इसकी कोशिश चल रही है कि किसी तरह ये वोट बैंक खिसकने न पाए।
पटेल वोटों को साधने के लिए जहां सहयोगी अपना दल एस से केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने जिम्मेदारी संभाली है वहीं, राजभर वोटों को खिसकने से बचाने के लिए प्रदेश के सैनिक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल राजभर को लगाया गया है।
दरअसल, नगर निगम के साथ ही नगर पालिका रामनगर और नगर पंचायत गंगापुर में पटेल और राजभर मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है। नगर निगम के 14 वार्डों में ये मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। नगर निगम के सभी 90 वार्डों को मिलाकर तकरीबन एक लाख पटेल मतदाता हैं।
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राजभर मतदाताओं की संख्या भी लगभग इतनी ही है। रामनगर में तकरीबन सात हजार पटेल और दो हजार राजभर जबकि गंगापुर में पांच हजार पटेल और चार हजार के करीब राजभर मतदाता हैं।
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में ओबीसी वर्ग के मतदाताओं में पार्टी की पैठ मजबूत हुई है। इसका लाभ निकाय चुनाव में मिलेगा।
वहीं, सूत्रों की मानें तो निकाय चुनाव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने के बाद भाजपा की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसे देखते हुए सहयोगी पार्टी अपना दल एस के साथ ही पार्टी अपने रणनीतिकारों और कुछ मंत्रियों को इस मोर्चे लगाया है।
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पटेल वोटों को साधने के लिए जहां सहयोगी अपना दल एस से केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने जिम्मेदारी संभाली है वहीं, राजभर वोटों को खिसकने से बचाने के लिए प्रदेश के सैनिक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल राजभर को लगाया गया है।
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दरअसल, नगर निगम के साथ ही नगर पालिका रामनगर और नगर पंचायत गंगापुर में पटेल और राजभर मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है। नगर निगम के 14 वार्डों में ये मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। नगर निगम के सभी 90 वार्डों को मिलाकर तकरीबन एक लाख पटेल मतदाता हैं।
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राजभर मतदाताओं की संख्या भी लगभग इतनी ही है। रामनगर में तकरीबन सात हजार पटेल और दो हजार राजभर जबकि गंगापुर में पांच हजार पटेल और चार हजार के करीब राजभर मतदाता हैं।
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में ओबीसी वर्ग के मतदाताओं में पार्टी की पैठ मजबूत हुई है। इसका लाभ निकाय चुनाव में मिलेगा।
वहीं, सूत्रों की मानें तो निकाय चुनाव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने के बाद भाजपा की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसे देखते हुए सहयोगी पार्टी अपना दल एस के साथ ही पार्टी अपने रणनीतिकारों और कुछ मंत्रियों को इस मोर्चे लगाया है।
प्रत्याशियों के साथ वार्डों में जनसंपर्क करेंगे मंत्री
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : demo pic
निकाय चुनाव के प्रचार अभियान को रफ्तार देने के लिए भाजपा ने प्रदेश सरकार के मंत्रियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। वाराणसी में प्रचार अभियान के लिए 10 से अधिक मंत्रियों की सूची बनाई गई है, जो प्रत्याशियों के साथ वार्डों में जनसंपर्क करेंगे।
नगर निगम के साथ ही नगर पालिका रामनगर और नगर पंचायत गंगापुर में भी ये मंत्री जनसंपर्क कर प्रचार अभियान को गति देंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के नाते यहां निकाय चुनाव में भी दबदबा बनाए रखने की कोशिश में है।
चुनाव अभियान में मोदी और योगी सरकार की उपलब्धियों पर फोकस होगा। संगठन के पदाधिकारियों के अलावा आनुषांगिक संगठनों को भी जिम्मेदारियां दी गई हैं। नगर निगम के 90 वार्डों में बसपा ने 68 वार्डों में ही अपने पार्षद उम्मीदवार उतारे हैं।
जिन 22 वार्डों में बसपा ने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं, वहां दूसरे पार्षद उम्मीदवारों के लिए बसपा के ही परंपरागत वोटर निर्णायक साबित हो सकते हैं। ये किसका खेल बनाएंगे और किसका खेल बिगाड़ेेंगे, इसे लेकर कयासबाजियां भी जारी हैं और उन्हें अपने-अपने पाले खींचने की मशक्कत भी। जातीय समीकरणों के आधार पर इन मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की होड़ लगी है।
नगर निगम के साथ ही नगर पालिका रामनगर और नगर पंचायत गंगापुर में भी ये मंत्री जनसंपर्क कर प्रचार अभियान को गति देंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के नाते यहां निकाय चुनाव में भी दबदबा बनाए रखने की कोशिश में है।
चुनाव अभियान में मोदी और योगी सरकार की उपलब्धियों पर फोकस होगा। संगठन के पदाधिकारियों के अलावा आनुषांगिक संगठनों को भी जिम्मेदारियां दी गई हैं। नगर निगम के 90 वार्डों में बसपा ने 68 वार्डों में ही अपने पार्षद उम्मीदवार उतारे हैं।
जिन 22 वार्डों में बसपा ने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं, वहां दूसरे पार्षद उम्मीदवारों के लिए बसपा के ही परंपरागत वोटर निर्णायक साबित हो सकते हैं। ये किसका खेल बनाएंगे और किसका खेल बिगाड़ेेंगे, इसे लेकर कयासबाजियां भी जारी हैं और उन्हें अपने-अपने पाले खींचने की मशक्कत भी। जातीय समीकरणों के आधार पर इन मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की होड़ लगी है।