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बनारस में प्रदूषण जांच केंद्रों के नाम पर बड़ा गोरखधंधा, वाहनों की जांच किए बिना जारी कर प्रमाणपत्र
amarujala.com- Written by: अजीत कुमार सिंह
Updated Tue, 19 Dec 2017 03:13 PM IST
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दिन ब दिन गंभीर होती जा रही समस्या, अधिकारियों को फिक्र ही नहीं
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी में प्रदूषण जांच केंद्रों के नाम पर बड़ा गोरखधंधा चल रहा है। बिना वाहनों की जांच किए ही इन केंद्रों से प्रदूषण नियंत्रण के प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। अमर उजाला ने जब केंद्रों की पड़ताल की तो हकीकत सामने आई। जांच केंद्रों के पास न मानक के अनुरूप मशीनें भी हैं। जिन केंद्रों पर कुछ मशीनें हैं, वे उनका इस्तेमाल ही करते। यह हाल तब है जब वाराणसी प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। दिन ब दिन हालात बदतर होते जा रहे हैं लेकिन अधिकारियों को इसकी फिक्र ही नहीं है।
पढ़ेंः दिनोंदिन जहरीली होती जा रही पवित्र नगरी काशी की हवा, किसी को कोई फिक्र नहीं
केस 01: नारायण सेवा समिति, वरुणा पुल, समय 12 बजे
वरुणा पुल स्थित पेट्रोल पंप के पास नारायण सेवा समिति शहर का पुराना प्रदूषण जांच केंद्र है। यहां से कमिश्नर, डीएम और एसएसपी का कार्यालय महज 200 मीटर की दूरी पर हैं। दोपहर में करीब 12 बजे नदेसर निवासी अश्विनी अपनी एक्टिवा लेकर इस जांच केंद्र पर पहुंचे। दो मिनट में ही उन्हें प्रदूषण जांच का प्रमाणपत्र दे दिया गया। स्मोक चेकर मौजूद था लेकिन स्कूटर को चेक नहीं किया गया। कुछ देर बाद ही बाबतपुर निवासी विजय कुमार अपनी बाइक लेकर पहुंचे। उनकी बाइक भी नहीं चेक की गई और प्रदूषण प्रमाणपत्र दे दिया गया। अमर उजाला संवाददाता ने जांच केंद्र के कर्मचारी से चार पहिया गाड़ी लाए बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र देने की बात कही तो वह तुरंत तैयार हो गया। बोला कि बस निर्धारित शुल्क से थोड़ी ज्यादा देना होगा और प्रमाणपत्र मिल जाएगा।
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केस 02: प्रदूषण जांच केंद्र, भदऊ चुंगी, समय 4 बजे
भदऊ चुंगी स्थित प्रदूषण नियंत्रण जांच पर क्षेत्र के निवासी सोनू पहुंचे और अपनी कार लाए बिना ही प्रदूषण प्रमाणपत्र लेकर चले गए। जांच केंद्र में मौजूद कर्मचारी ने बताया कि गाड़ी न लाने पर चार पहिया के लिए 150 और दो पहिया के लिए 60 रुपये देने होंगे। यहां खुलेआम यह गोरखधंधा चल रहा है। यह केंद्र सड़क किनारे है, जहां बाइक खड़ी करने की भी जगह नहीं है। पास में ही पुलिस पिकेट भी है लेकिन किसी को कोई फिक्र नहीं है।
केस 03: सेंच्युरी फ्यूल अकथा, 5 बजे
पांडेयपुर के रहने वाले दिलीप अपनी बाइक से प्रदूषण जांच केंद्र पर पहुंचे और बाइक के साथ ही कार का भी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र लेकर चले गए। वह कार तो लाए ही नहीं थे, उनके बाइक की भी जांच नहीं की गई। गाड़ी किसके नाम है और इंश्योरेंस कब तक का है, यह भी नहीं पूछा गया। अगले आधे घंटे में दो अन्य लोग भी यहां पहुंचे, जिन्हें वाहनों की जांच किए बिना प्रमाणपत्र दे दिया गया। यहां भी स्मोक चेकर होने के बावजूद वाहनों की जांच नहीं हो रही थी।
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केस 01: नारायण सेवा समिति, वरुणा पुल, समय 12 बजे
वरुणा पुल स्थित पेट्रोल पंप के पास नारायण सेवा समिति शहर का पुराना प्रदूषण जांच केंद्र है। यहां से कमिश्नर, डीएम और एसएसपी का कार्यालय महज 200 मीटर की दूरी पर हैं। दोपहर में करीब 12 बजे नदेसर निवासी अश्विनी अपनी एक्टिवा लेकर इस जांच केंद्र पर पहुंचे। दो मिनट में ही उन्हें प्रदूषण जांच का प्रमाणपत्र दे दिया गया। स्मोक चेकर मौजूद था लेकिन स्कूटर को चेक नहीं किया गया। कुछ देर बाद ही बाबतपुर निवासी विजय कुमार अपनी बाइक लेकर पहुंचे। उनकी बाइक भी नहीं चेक की गई और प्रदूषण प्रमाणपत्र दे दिया गया। अमर उजाला संवाददाता ने जांच केंद्र के कर्मचारी से चार पहिया गाड़ी लाए बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र देने की बात कही तो वह तुरंत तैयार हो गया। बोला कि बस निर्धारित शुल्क से थोड़ी ज्यादा देना होगा और प्रमाणपत्र मिल जाएगा।
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केस 02: प्रदूषण जांच केंद्र, भदऊ चुंगी, समय 4 बजे
भदऊ चुंगी स्थित प्रदूषण नियंत्रण जांच पर क्षेत्र के निवासी सोनू पहुंचे और अपनी कार लाए बिना ही प्रदूषण प्रमाणपत्र लेकर चले गए। जांच केंद्र में मौजूद कर्मचारी ने बताया कि गाड़ी न लाने पर चार पहिया के लिए 150 और दो पहिया के लिए 60 रुपये देने होंगे। यहां खुलेआम यह गोरखधंधा चल रहा है। यह केंद्र सड़क किनारे है, जहां बाइक खड़ी करने की भी जगह नहीं है। पास में ही पुलिस पिकेट भी है लेकिन किसी को कोई फिक्र नहीं है।
केस 03: सेंच्युरी फ्यूल अकथा, 5 बजे
पांडेयपुर के रहने वाले दिलीप अपनी बाइक से प्रदूषण जांच केंद्र पर पहुंचे और बाइक के साथ ही कार का भी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र लेकर चले गए। वह कार तो लाए ही नहीं थे, उनके बाइक की भी जांच नहीं की गई। गाड़ी किसके नाम है और इंश्योरेंस कब तक का है, यह भी नहीं पूछा गया। अगले आधे घंटे में दो अन्य लोग भी यहां पहुंचे, जिन्हें वाहनों की जांच किए बिना प्रमाणपत्र दे दिया गया। यहां भी स्मोक चेकर होने के बावजूद वाहनों की जांच नहीं हो रही थी।
जांच केंद्र वरुणा पुल पर और सर्टिफिकेट भुल्लनपुर का
प्रदूषण जांच केंद्रों पर जमकर मनमानी
- फोटो : अमर उजाला
प्रदूषण नियंत्रण जांच केंद्र वरुणा पुल पर है लेकिन यहां से जो प्रमाणपत्र जारी जा रहा है वह नारायण सेवा समिति मड़ौली, भुल्लनपुर का है। दरअसल रजिस्ट्रेशन भुल्लनपुर के पते पर कराया गया है और जांच केंद्र वरुणा पुल के पास खोला गया है। परिवहन विभाग को इसकी भनक तक नहीं है। परिवहन आयुक्त कार्यालय से जांच केंद्रों को पांच साल के लिए लाइसेंस जारी किया जाता है। समय-समय पर इनकी की जांच का प्रावधान है लेकिन अफसरों को कोई फिक्र नहीं है।
दो पहिया 30 और चार पहिया का रेट 50 रुपये
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के लिए 30 से 50 रुपये तक शुल्क निर्धारित है। दो पहिया और तीन पहिया का 30 रुपये और चार पहिया वाहन का रेट 50 रुपये है। जांच केंद्रों पर बिना वाहन लाए प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए ज्यादा रुपये देने होते हैं। प्रत्येक केंद्र पर औसतन प्रतिदिन 10 से 15 वाहनों की ही जांच होती है। कम शुल्क के बाद भी लोग अपने वाहन की जांच कराने में कोताही बरतते हैं।
एआरटीओ प्रशासन अमित राजन राय ने कहा कि वाहनों की जांच किए बिना प्रमाणपत्र जारी नहीं होना चाहिए। जिले से सारे प्रदूषण जांच केंद्रों की जांच कराई जाएगी। इसके लिए जल्द ही अभियान शुरू किया जाएगा।
दो पहिया 30 और चार पहिया का रेट 50 रुपये
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के लिए 30 से 50 रुपये तक शुल्क निर्धारित है। दो पहिया और तीन पहिया का 30 रुपये और चार पहिया वाहन का रेट 50 रुपये है। जांच केंद्रों पर बिना वाहन लाए प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए ज्यादा रुपये देने होते हैं। प्रत्येक केंद्र पर औसतन प्रतिदिन 10 से 15 वाहनों की ही जांच होती है। कम शुल्क के बाद भी लोग अपने वाहन की जांच कराने में कोताही बरतते हैं।
एआरटीओ प्रशासन अमित राजन राय ने कहा कि वाहनों की जांच किए बिना प्रमाणपत्र जारी नहीं होना चाहिए। जिले से सारे प्रदूषण जांच केंद्रों की जांच कराई जाएगी। इसके लिए जल्द ही अभियान शुरू किया जाएगा।