राहत की खबरः वाराणसी में पांच माह बाद नहीं मिला कोई नया कोरोना संक्रमित, अब मात्र 95 सक्रिय मरीज
कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण पर नियंत्रण के लिए काशी मॉडल को पूरे देश में सराहा गया। सोमवार को एक भी कोरोना संक्रमित नहीं मिला। ऐसा पांच माह बाद हुआ।
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वाराणसी जिले के लिए राहत भरी खबर है। करीब पांच माह बाद सोमवार को जिले में कोरोना का कोई भी केस नहीं मिला है। न ही किसी मरीज की मौत हुई है। इससे पहले 15 फरवरी को ऐसी स्थिति आई थी। बता दें रविवार को भी मात्र दो संक्रमित मरीज मिले थे। सोमवार सुबह स्वास्थ्य विभाग को मिली 3526 सैंपल की रिपोर्ट में एक भी कोरोना संक्रमित नहीं मिला। इसके साथ ही वाराणसी में अब मात्र 95 सक्रिय मरीज हैं।
अब कुल 82286 में से 81418 स्वस्थ और 773 लोगों की मौत हुई है। वाराणसी जिला धीरे-धीरे कोरोना से मुक्ति की ओर से बढ़ रहा है। सोमवार सुबह को कोई भी नया कोरोना संक्रमित नहीं मिला है। हालांकि अभी कोरोना का खतरा टला नहीं है। इसलिए लोग लापरवाही न बरतें। घरों से बाहर निकले, तो मास्क लगाकर ही निकले। हाथों को सैनिटाइज करते रहे और कोविड नियमों का पालन करें।
टीके की किल्लत, केंद्र हुए कम
जून के अंतिम सप्ताह तक जिले में 100 से 150 केंद्रों पर टीका लगाया गया, लेकिन टीके की किल्लत के चलते केंद्रों की संख्या घटानी पड़ी। जहां 28-29 जून को 50 से कम केंद्र बने, वहीं 30 जून को टीकाकरण बंद करना पड़ा। एक और दो जुलाई को भी 50 से कम ही केंद्र बनाए गए। टीकाकरण भी 5000 से कम हुआ। तीन जुलाई को केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 71 की गई और 14663 लोगों ने टीका लगवाया। अभी भी टीके का संकट दूर नहीं हो पाया है।
सात महीने में 30 फीसदी को ही मिल सका सुरक्षा कवच
कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण पर नियंत्रण के लिए भले ही काशी मॉडल को पूरे देश में सराहा जा रहा है, लेकिन टीकाकरण के मामले में टीके की किल्लत, लचर प्रशासनिक रवैया समते कई अन्य वजहों से अभियान कमजोर होता दिख रहा है। जिस तरह से अगस्त-सितंबर तक तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है, उसके मुकाबले जिले में 18 साल से ऊपर के करीब 28 लाख लोगों को टीका लगाया जाना है, लेकिन 16 जनवरी से शुरू टीकाकरण अभियान में जिले में अब तक करीब सात महीने में केवल 30 फीसदी (86,3057) लोगों का ही टीकाकरण हो सका है। अगर जल्द ही टीकाकरण का संकट दूर नहीं हुआ तो परेशानी बढ़ सकती है।
दूर हुई झिझक तो नहीं मिल पा रहा पर्याप्त टीका
शुरुआती दिनों में स्लॉट न मिल रहे थे। साथ ही लोगों में टीकाकरण संबंधी भ्रांतियां होने के कारण लोग केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे थे। धीरे-धीरे जब स्थितियां बदलने लगीं और लोग टीका लगवाने केंद्रों पर पहुंचने लगे तो टीके की किल्लत होने लगी। टीका लगवाने के प्रति लोगों में बढ़े उत्साह का ही परिणाम है कि कई केंद्रों पर सुबह से ही लाइन लग जा रही है और मारामारी जैसे हालात हो रहे हैं। जिसके कारण पुलिस तैनात करनी पड़ रही है।
दूसरी डोज के टीके के लिए बढ़ी परेशानी
टीके की संकट की वजह से सबसे अधिक परेशानी दूसरी डोज लगवाने वालों को हो रही है। इसमें पहली डोज लगाने के बाद लोगों के मोबाइल पर दूसरी डोज लगाने का मैसेज आ रहा है, लेकिन उन्हें टीका नहीं लग पा रहा है। इस वजह से लोगों को हर दिन लौटना पड़ रहा है। आंकड़ों की बात करें तो अब तक कुल 8,63,057 लोगों के टीकाकरण में 1,54,512 लोगों को दूसरी डोज, जबकि 7,08,545 लोगों ने पहली डोज लगवाई है।