BHU: विकास में युवाओं का योगदान अहम, सही मार्गदर्शन जरूरी; विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल पर चर्चा
Varanasi News: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में विद्वानों ने विकसित भारत और शिक्षा व्यवस्था को लेकर खुलकर चर्चा की। समस्याओं ओर इनके समाधान को लेकर नए उपाय भी बताए गए।
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बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल पर चर्चा की। मुख्य अतिथि, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि राष्ट्र की प्रगति में सबसे बड़ी ताकत युवा आबादी है और उन्हें सही मार्गदर्शन देना आवश्यक है।
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 विषयक कार्यशाला में कुलपति ने कहा कि किसी भी बदलाव को बिना गहन विचार के अपनाने के बजाय उसे समझदारी और विवेक के साथ लागू किया जाना चाहिए। परिवर्तन और सुधार की प्रक्रिया को सशक्त बनाने के लिए सकारात्मक सोच, समन्वित प्रयास और प्रशासनिक सुधार आवश्यक हैं।
अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह कार्यक्रम देश के वर्तमान शिक्षा परिदृश्य के लिए परिवर्तनकारी कदम साबित हो सकता है। उन्होंने आयोजन के दौरान हुई सभी महत्वपूर्ण चर्चाओं का समुचित दस्तावेजीकरण करने की बात कही, जिससे निकले निष्कर्ष भविष्य में उपयोगी बन सकें। उन्होंने कहा कि बिल से भारतीय ज्ञान प्रणाली का एकीकरण होगा और विद्यार्थियों को बहु-विषयी शिक्षा मिलेगी। यह बिल न केवल वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, बल्कि व्यावसायीकरण को रोककर शिक्षा की पवित्रता बनाए रखता है।
हुई विस्तृत चर्चा
विधि संकाय के प्रो. शैलेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि इस बिल का उद्देश्य विकसित भारत के लिए शिक्षा को एक संस्थान के माध्यम से रेग्युलेट करना है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कार्यकारणी सदस्य प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारत का शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी होना आवश्यक है।
इस दौरान प्रबंध अध्ययन संकाय के प्रमुख प्रो. सुजित कुमार दूबे ने कहा कि यह बिल नवाचार और शिक्षण को समाहित करने वाला है। कार्यक्रम में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के प्रो. जयशंकर पांडेय, भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शरदेन्दु तिवारी, प्रो. अरविंद कुमार मिश्रा आदि लोग मौजूद रहे।