बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने कहा-कोरोना वायरस से निपटने के लिए दवा बनने में लगेंगे दो साल
एंथ्रेक्स जैसी बीमारी के लिए वैक्सीन बनाने वाली टीम के सदस्य प्रसिद्ध वैज्ञानिक बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर (बॉयो टेक्नोलॉजी) राकेश भटनागर ने कहा है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में कम से कम दो साल लगेंगे। वह भी तब संभव है, जब इसके लिए पेटेंट संबंधी परमिशन जल्दी-जल्दी दी जाएं।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी दवा को बनाने में कम से कम 10 से 20 साल लग जाते हैं। चूंकि कोरोना महामारी पूरी दुनिया में काफी तेजी से फैली है, लिहाजा इस पर काफी तेजी से काम हो रहा है। डब्ल्यूएचओ भी लगा है। इसलिए हो सकता है कि इसके लिए बहुत तेजी से काम हो। क्लीनिकल ट्रायल के लिए जल्दी-जल्दी परमिशन दी जाएं। तब भी मेरा मानना कि दो साल से पहले दवाई या वैक्सीन का बाजार में आना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के लिए अब तक न तो कोई दवा है और न ही वैक्सीन। जिस हाइड्रॉक्सी क्लोरोक़्वीन दवा के कोरोना वायरस में मददगार होने की बात की जा रही है, उसके कोरोना वायरस पर प्रभाव का अब तक कोई क्लीनिकल ट्रायल नहीं हुआ है। ऐसे में सजगता और सतर्कता से ही इसको मात दी सकती है। जरूरी है कि सभी सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखें और लॉकडाउन का पालन करें। बताते चलेकि
सात दिन तेजी से बढ़ती है बीमारी
चौदह दिन में मरीज हो जाता है ठीक
किसी भी व्यक्ति में कोरोना वायरस जनित बीमारियां सात दिन तक तेजी से बढ़ती हैं। इसका असर ज्यादा से ज्यादा 14 दिन तक रहता है। मरीज को यदि 14 दिन तक मेडिकली क्वारंटीन कर दिया जाए तो आमतौर पर मरीज ठीक हो जाता है। कोरोना वायरस आएनए बेस है। खुद को बढ़ाने के लिए यह डीएनए में बदलता है। इलाज के समय इसके आरएनए को डीएनए में बदलने से रोका जाता है।
कोरोना से मौत की औसत दर अन्य महामारियों से कम
स्पेनिश फ्लू जैसी महामारियों की तुलना में कोरोना वायरस से मौत की औसत दर कम है। मगर, यह इसलिए ज्यादा घातक है, क्योंकि इसका संक्रमण अन्य महामारियों की तुलना में काफी तेजी से होता है।
- सवाल: कोरोना वायरस क्या है? इसके संक्रमण का खतरा कितना है?
- जवाब: कोविड-19 ऐसा वायरस है जो चमगादड़ से आदमी के शरीर में प्रवेश कर गया और पूरे विश्व में फैल गया। इसके संक्रमण से सर्दी, खांसी, बुखार जैसे लक्षण सामने आते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सांस लेने में होती है। यह वायरस किसी भी सतह पर चिपक सकता है। इस सतह पर किसी का हाथ लगा तो वह व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है। एक संक्रमित व्यक्ति से बहुत सारे लोगों को संक्रमण का खतरा रहता है। जब संक्रमित व्यक्ति को सर्दी, खांसी, तेज बुखार होता है तो उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। सांस लेने में तकलीफ होने पर उसे सहायक उपकरणों से आक्सीजन देनी होती है।
- सवाल: पहले स्पेनिश फ्लू जैसी महामारी आई थी, उसमें और कोरोना में क्या अंतर है?
- जवाब: स्पेनिश फ्लू, ईबोला, स्वाइन फ्लू और अब कोरोना। यह सारी बीमारियां वायरस जनित ही है। वायरस किस तरह का है, सबसे पहले यह जानना जरूरी होता है। वायरस खुद जिंदा नहीं रह सकता है। उसे जिंदा रहने और बढ़ने के लिए किसी शरीर के अंदर जाना होता है। इसमें उसकी मदद प्रोटीन के पार्टिकल करते हैं। स्वाइन फ्लू है तो उसका मतलब है कि सुअर से आता है। बर्ड फ्लू है तो किसी चिड़िया से और कोरोना है तो चमगादड़ से आया है।
- सवाल: कोरोना वायरस के लिए कब तक दवा और वैक्सीन बनने की संभावना है?
- जवाब : अभी तक कोरोना वायरस से बचाव के लिए न तो कोई दवा है और न ही वैक्सीन, इसीलिए इतनी परेशानी हो रही है और लोग मर जा रहे हैं। वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने के प्रयास में लगे हैं। किसी भी दवा या वैक्सीन को विकसित करने में 10 से 20 साल तक का समय लग जाता है। लेकिन यह महामारी है, डब्ल्यूएचओ भी लगा है। इसलिए हो सकता है इसके लिए बहुत तेजी से काम हो। क्लीनिकल ट्रायल के लिए जल्दी-जल्दी परमिशन दी जाएंगी। तब भी मेरा मानना कि दो साल से पहले किसी दवाई या वैक्सीन का बाजार में आना संभव नहीं है।
- सवाल: हाइड्रॉक्सी क्लोरोक़्वीन दवा का नाम सामने आ रहा है। आप इसके बारे क्या मानते है?
- जवाब: ऐसा माना जा रहा है कि हाइड्रॉक्सी क्लोरोक़्वीन से इलाज में मदद मिल सकती है, लेकिन अभी तक कोरोना वायरस पर इसके प्रभाव का क्लीनिकल ट्रायल नहीं हुआ है। लिहाजा विश्वास के साथ यह नहीं कहा जा सकता है कि हाइड्रॉक्सी क्लोरोक़्वीन कोरोना वायरस की दवा है। ऐसे तो कोरोना से बचाव के लिए कुछ चिकित्सक एचआईवी में काम आने वाली दवाएं भी देते हैं, मगर यह सब स्थिति पर निर्भर है। जब कोई दवा बनती है तो पहले स्टडी होती है। यह देखा जाता है कि दवा का प्रभाव क्या है। इसके बाद क्लीनिकल ट्रायल होता है। तभी कुछ कहा जा सकता है।
- सवाल: कोरोना से बचने का क्या उपाय है?
- जवाब: अगर इस वायरस से बचना चाहते हैं तो सोशल डिस्टेंस रखें। लोग एक-दूसरे के करीब न आएं। एक जगह बहुत सारे लोग इकट्ठा न हों। अगर ऐसी जगह जाते हैं जहां ज्यादा लोग हैं तो अपने आपको अच्छी तरह से सुरक्षित रखें। हाथ बार-बार सैनिटाइजर और साबुन से धुलते रहें।
- सवाल: बीएचयू में इससे निपटनें की क्या व्यवस्था है?
- जवाब: सर सुंदरलाल अस्पताल में कोविड 19 के इलाज के लिए अच्छी व्यवस्था है। परीक्षण करने की बहुत अच्छी व्यवस्था है। 24 घंटे ओपीडी भी चल रही है। अगर बीमारी हैं या होने की आशंका है तो भी आ सकते हैं। डॉक्टर उसे 24 घंटे अस्पताल में रखकर जांच करते हैं। यदि आशंका भी होती है कि मरीज में इस वायरस के संक्रमण का खतरा है तो उसका परीक्षण कराया जाता है। इसके बाद आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया जाता है।