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बीएचयू: 18 दिन के आंदोलन के बाद कुलपति कार्यालय पर तालाबंदी, एबीवीपी ने कहा- छात्रों को गुमराह कर रहा प्रशासन

Thu, 15 Oct 2026 07:18 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 15 Oct 2026 07:18 PM IST
सार

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 18 दिवसीय अनिश्चितकालीन आंदोलन के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को कुलपति कार्यालय पर तालाबंदी कर दी। कार्यकर्ताओं ने छात्रावास, सुरक्षा, सड़क, बिजली-पानी की समस्याएं उठाईं। उनका आरोप है कि लोकपाल के पत्र के बाद भी 15 अक्तूबर तक आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ। परिषद ने समस्याओं के समयबद्ध समाधान की मांग की।

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BHU Vice-Chancellor office locked down following protest ABVP claims administration is misleading students
बीएचयू में कुलपति कार्यालय पर तालाबंदी के साथ नारेबाजी करते छात्र। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में विद्यार्थियों की मूलभूत और लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को कुलपति कार्यालय पर तालाबंदी कर विरोध जताया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि 18 दिनों तक अनिश्चितकालीन आंदोलन चलाने और विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष मांगें रखने के बावजूद समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। परिषद ने मांग की कि विद्यार्थियों से जुड़े सभी लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए।

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विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठन ने 18 दिनों तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया। इस दौरान छात्रावासों की समस्याओं, विद्यार्थियों की सुरक्षा, सड़क, बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं और अन्य छात्रहित के विषयों को प्रमुखता से उठाया गया। कार्यकर्ताओं के अनुसार, इन समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित विभागों को पहले भी पत्र और सूचनाएं दी गई थीं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

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लोकपाल के पत्र पर आधिकारिक आदेश जारी नहीं करने का आरोप
परिषद के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त करने के समय विश्वविद्यालय के लोकपाल की ओर से एक पत्र दिया गया था। कार्यकर्ताओं के मुताबिक, लोकपाल सुखमहेंद्र सिंह की ओर से संबंधित मांगों के संबंध में दिए गए पत्र के आधार पर सोमवार को कार्यालय समय में विश्वविद्यालय प्रशासन को आधिकारिक आदेश जारी करना था। हालांकि, 15 अक्तूबर तक ऐसा नहीं किया गया। परिषद का कहना है कि इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा गया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली।

कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कुलपति और लोकपाल की ओर से मामले में स्पष्ट निर्णय देने के बजाय उन्हें आश्वासन देकर टालने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए जब संगठन के प्रतिनिधि संबंधित समिति और विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष पहुंचे, तब भी उन्हें ठोस आश्वासन नहीं मिला। इससे नाराज कार्यकर्ताओं ने कुलपति कार्यालय पर तालाबंदी कर अपना विरोध दर्ज कराया।

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समस्याओं के समाधान तक संघर्ष जारी रखने की चेतावनी
विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रावासों की समस्याओं, सुरक्षा व्यवस्था और बिजली-पानी सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की। परिषद का कहना है कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए जरूरी सुविधाओं का दुरुस्त होना आवश्यक है। लंबित मांगों पर निर्णय लेकर उनके समाधान की समयसीमा भी तय की जानी चाहिए।

कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि छात्रहित से जुड़े मुद्दों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। परिषद के अनुसार, जब तक विद्यार्थियों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होता और लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन आरोपों और तालाबंदी पर उसका पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।

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