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...तो अकेले ही फैसला लेना चाहते थे BHU के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 05 Oct 2017 02:40 PM IST
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कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी
- फोटो : self
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बीएचयू में बवाल को लेकर कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के छु्ट्टी पर जाने और उनकी जिम्मेदारी रजिस्ट्रार डॉ. नीरज त्रिपाठी को सौंपने के साथ ही प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में रेक्टर की नियुक्ति न होने पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रो. त्रिपाठी अपने कार्यकाल में कई बार 10 दिन से अधिक समय तक विदेश दौरे सहित अन्य कार्यक्रमों में गए लेकिन कभी भी रेक्टर की नियुक्ति की पहल नहीं की। हर बार उन्होंने अपना कार्यभार कुलसचिव को ही सौंपा था।
अब माना जा रहा है कि कुलपति ने रेक्टर की नियुक्ति इसलिए नहीं की, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि उनकी अनुपस्थिति में भी उनके अलावा कोई और नीतिगत फैसला ले।
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विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक कुलपति के अवकाश पर जाने की स्थिति में उनका कार्यभार रेक्टर के पास होता है और अगर रेक्टर नहीं है तो यह जिम्मेदारी कुलसचिव को निभानी पड़ती है। कुलपति को रेक्टर का नाम तय करने के बाद उसे कार्यकारिणी परिषद की बैठक में ले जाना होता है।
परिषद की मंजूरी जरूरी होती है। विश्वविद्यालय में प्रो. त्रिपाठी के पहले कुलपति रहे प्रो. लालजी सिंह, आरपी रस्तोगी, सीएन झा, डीएन मिश्र, हरि गौतम, वाईसी सिमाद्री ने भी अपने कार्यकाल में रेक्टर की नियुक्ति नहीं की थी।
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प्रो. त्रिपाठी अपने कार्यकाल में कई बार 10 दिन से अधिक समय तक विदेश दौरे सहित अन्य कार्यक्रमों में गए लेकिन कभी भी रेक्टर की नियुक्ति की पहल नहीं की। हर बार उन्होंने अपना कार्यभार कुलसचिव को ही सौंपा था।
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अब माना जा रहा है कि कुलपति ने रेक्टर की नियुक्ति इसलिए नहीं की, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि उनकी अनुपस्थिति में भी उनके अलावा कोई और नीतिगत फैसला ले।
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विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक कुलपति के अवकाश पर जाने की स्थिति में उनका कार्यभार रेक्टर के पास होता है और अगर रेक्टर नहीं है तो यह जिम्मेदारी कुलसचिव को निभानी पड़ती है। कुलपति को रेक्टर का नाम तय करने के बाद उसे कार्यकारिणी परिषद की बैठक में ले जाना होता है।
परिषद की मंजूरी जरूरी होती है। विश्वविद्यालय में प्रो. त्रिपाठी के पहले कुलपति रहे प्रो. लालजी सिंह, आरपी रस्तोगी, सीएन झा, डीएन मिश्र, हरि गौतम, वाईसी सिमाद्री ने भी अपने कार्यकाल में रेक्टर की नियुक्ति नहीं की थी।
पूर्व सांसद ने कहा- भंग हो न्यायिक जांच
अस्सी घाट पर छात्र-छात्राओं से बात करते दिल्ली के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू में 21 सितंबर को छेड़खानी, 23 सितंबर को छात्राओं पर लाठीचार्ज के विरोध में अब आवाज तेज होने लगी है। बुधवार को अस्सी घाट पर पहुंचकर दिल्ली के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा ने छात्र-छात्राओं से घटना पर विस्तृत बातचीत की।
इस दौरान उन्होंने घटना के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को दोषी बताते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई के साथ ही कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी की ओर से हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त जज की न्यायिक जांच कमेटी को भंग करने की मांग की।
अस्सी घाट पर आयोजित संवाद में महाबल मिश्रा ने कहा कि काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में छात्राएं अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठा रही थी, उस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
अगले ही दिन उनके जाते ही महिला महाविद्यालय में घुसकर पुरुष पुलिस कर्मियों द्वारा लाठीचार्ज करना देश की गरिमा को कलंकित करने वाली घटना है। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय छात्राओं को नोटिस दी जा रही है।
लाठीचार्ज करने वाले पुलिस कर्मियों पर मुकदमा, वर्तमान न्यायिक जाँच की कमेटी को भंग कर किसी हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट की महिला रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इस दौरान उन्होंने घटना के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को दोषी बताते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई के साथ ही कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी की ओर से हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त जज की न्यायिक जांच कमेटी को भंग करने की मांग की।
अस्सी घाट पर आयोजित संवाद में महाबल मिश्रा ने कहा कि काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में छात्राएं अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठा रही थी, उस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
अगले ही दिन उनके जाते ही महिला महाविद्यालय में घुसकर पुरुष पुलिस कर्मियों द्वारा लाठीचार्ज करना देश की गरिमा को कलंकित करने वाली घटना है। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय छात्राओं को नोटिस दी जा रही है।
लाठीचार्ज करने वाले पुलिस कर्मियों पर मुकदमा, वर्तमान न्यायिक जाँच की कमेटी को भंग कर किसी हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट की महिला रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
त्रिवेणी हॉस्टल के पास खड़े शोहदों को चेतावनी देकर छोड़ा
बीएचयू
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू कैंपस में छात्रा के साथ छेड़खानी के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। चीफ प्राक्टर अपनी टीम के साथ हर दिन शाम को साइकल से निकलकर हॉस्टलों में जाकर छात्राओं से बातचीत कर रही है।
बुधवार को इसी क्रम में त्रिवेणी हॉस्टल पहुंची तो वहां पहले से बाइक पर खड़े शोहदों को देखकर नाराजगी जाहिर की। बताया कि युवकों से परिचय पत्र या फिर विश्वविद्यालय छात्र होने का प्रमाण मांगा गया तो वह दिखा नहीं पाए।
इसके बाद उन्हें दुबारा कैंपस में दिखाई न देने की चेतावनी देकर छोड़ा गया। बताया कि इसके अलावा एक बाइक पर सवार तीन युवकों को भी रोककर परिचय पत्र मांगा गया, जो दिखा नहीं पाए, उन्हें भी डांटा गया।
बुधवार को इसी क्रम में त्रिवेणी हॉस्टल पहुंची तो वहां पहले से बाइक पर खड़े शोहदों को देखकर नाराजगी जाहिर की। बताया कि युवकों से परिचय पत्र या फिर विश्वविद्यालय छात्र होने का प्रमाण मांगा गया तो वह दिखा नहीं पाए।
इसके बाद उन्हें दुबारा कैंपस में दिखाई न देने की चेतावनी देकर छोड़ा गया। बताया कि इसके अलावा एक बाइक पर सवार तीन युवकों को भी रोककर परिचय पत्र मांगा गया, जो दिखा नहीं पाए, उन्हें भी डांटा गया।