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युवा कलाकारों ने सीखी कथक की बारीकियां
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वाराणसी। बीएचयू संगीत एवं मंच कला संकाय नृत्य विभाग की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय कथक परिसंवाद में युवा कलाकारों को कथक की लयकारियों से जुड़ी बारीकियां बताई गईं। इस दौरान विशेषज्ञों ने अलग-अलग रचनाओं पर आधारित कथक की प्रस्तुति की और संवाद के माध्यम से भी इससे जुड़ी जानकारियाें को साझा किया।
पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पं. ओमप्रकाश मिश्र ने गुरु शिष्य परंपरा में गुरु का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने नृत्य में बोलों की निकासी, उसके प्रदर्शन को समझाया। प्रो. पूर्णिमा पांडेय ने गुरु शिष्य परम्परा पर अपने जीवन के अनुभव को साझा किया। मुन्ना शुक्ला की शिष्या रुचि सैनी ने इस दौरान पं. जगन्नाथ रत्नाकर की वियोग शृंगार की रचना वाही है कदंब की सुंदर प्रस्तुति की। गुरु मालविका मित्र ने अपने जीवन में नृत्य का मार्ग प्रशस्त करने में गुरु की भूमिका को अहम बताया।
दूसरे सत्र में प्रो. पूर्णिमा ने कहा कि समयाभाव के कारण रियाज का समय घट गया है। कसक, मसक पहले सिखाया जाता था, फिर कलाई का संचालन उसके बाद थाट की शिक्षा दी जाती है। मालविका मित्रा ने थाट के कसक मसक के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान नृत्य विभाग की अध्यक्ष डॉ. विधि नागर, सौरभ, प्रेमचंद होंबल, डॉ. ज्ञानेश पांडेय, प्रो. राजेश शाह आदि मौजूद रहे।
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पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पं. ओमप्रकाश मिश्र ने गुरु शिष्य परंपरा में गुरु का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने नृत्य में बोलों की निकासी, उसके प्रदर्शन को समझाया। प्रो. पूर्णिमा पांडेय ने गुरु शिष्य परम्परा पर अपने जीवन के अनुभव को साझा किया। मुन्ना शुक्ला की शिष्या रुचि सैनी ने इस दौरान पं. जगन्नाथ रत्नाकर की वियोग शृंगार की रचना वाही है कदंब की सुंदर प्रस्तुति की। गुरु मालविका मित्र ने अपने जीवन में नृत्य का मार्ग प्रशस्त करने में गुरु की भूमिका को अहम बताया।
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दूसरे सत्र में प्रो. पूर्णिमा ने कहा कि समयाभाव के कारण रियाज का समय घट गया है। कसक, मसक पहले सिखाया जाता था, फिर कलाई का संचालन उसके बाद थाट की शिक्षा दी जाती है। मालविका मित्रा ने थाट के कसक मसक के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान नृत्य विभाग की अध्यक्ष डॉ. विधि नागर, सौरभ, प्रेमचंद होंबल, डॉ. ज्ञानेश पांडेय, प्रो. राजेश शाह आदि मौजूद रहे।
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