एनजीटी का निर्देश: 33 पेड़ काटने के मामले में बीएचयू से तीन महीने में होगी 2.65 करोड़ रुपये की वसूली
बीएचयू में अवैध पेड़ कटाई के मामले में एनजीटी ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 2.65 करोड़ क्षतिपूर्ति वसूली की कार्रवाई तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में 33 पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को करीब 2.65 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने का निर्देश दिया है। बृहस्पतिवार को अपलोड किए गए आदेश के अनुसार बीएचयू परिसर में बीते पांच वर्षों के दौरान 33 पेड़ काटे गए थे, जिनमें 26 सामान्य प्रजाति और सात सफेद चंदन के पेड़ शामिल थे।
यह आदेश एनजीटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सात जुलाई को सुनवाई के दौरान पारित किया था। आदेश की प्रति नौ जुलाई को अपलोड की गई।
एनजीटी ने याचिकाकर्ता सौरभ तिवारी की ओर से दायर निष्पादन याचिका पर सुनवाई की। इसमें 11 अगस्त 2025 को पारित अधिकरण के पूर्व आदेश का अनुपालन कराने की मांग की गई थी। उस आदेश में एनजीटी ने पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि तय कर उसकी वसूली तीन महीने के भीतर करने का निर्देश दिया था।
आदेश का पालन नहीं होने पर बीएचयू विधि संकाय के पूर्व छात्र एवं अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने इस वर्ष मार्च में निष्पादन याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने यूपीपीसीबी को हर हाल में तीन महीने के भीतर वसूली की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।
4 जुलाई को दाखिल हुआ हलफनामा
याचिकाकर्ता ने बताया कि चार जुलाई 2026 को एक हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें कहा गया कि क्षेत्रीय वन अधिकारी मोहम्मद इब्राहिम के नेतृत्व में छह सदस्यीय संयुक्त समिति ने 29 जून 2026 को स्थल का निरीक्षण किया था। हलफनामे के अनुसार, निरीक्षण में पाया गया कि बीएचयू ने वर्ष 2025 में विभिन्न प्रजातियों के 978 पौधे लगाए थे। इनमें से 859 पौधे जीवित और सुरक्षित पाए गए। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में माना कि जीवित पौधों की यह संख्या कानून के तहत अनिवार्य 20 गुना क्षतिपूरक पौधरोपण के लक्ष्य को पूरा करती है।
याचिकाकर्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि बीएचयू परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पेड़, जिनमें सफेद चंदन भी शामिल था, बिना अनुमति काटे गए थे। एनजीटी द्वारा गठित संयुक्त समिति की जांच में इसकी पुष्टि हुई थी। कटे हुए पेड़ों में आम, महुआ, गुलमोहर, सागौन, कटहल और सात मूल्यवान सफेद चंदन के पेड़ शामिल थे। 11 अगस्त 2025 को पारित मुख्य आदेश में एनजीटी ने प्रत्येक कटे पेड़ के बदले कम से कम 20 पौधे लगाने तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय कर बीएचयू से तीन महीने के भीतर उसकी वसूली करने का निर्देश दिया था।
| पेड़ों के नाम | संख्या | जुर्माना (रुपये) |
| आम | 6 | 1,15,06,106 |
| गुलमोहर | 3 | 52,91,476 |
| महुआ | 2 | 53,09,225 |
| कटहल | 1 | 1,83,820 |
| सफेद चंदन | 7 | 6,26,119 |
| सागौन | 14 | 62,75,204 |
कुल पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति : 2,65,26,877.08 रुपये (करीब 2.65 करोड़ रुपये)