कचरे से बिजली बनाएगा बीएचयू, निजी कंपनी से हुआ एमओयू
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में कचरे से बिजली का उत्पादन किया जाएगा। इसके लिए एक निजी कंपनी से एमओयू किया गया है। जिस कंपनी से एमओयू हुआ है, वहीं यहां बिजली संयंत्र लगाएगी और परिसर से बागवानी और घरेलू कचरे सहित अपशिष्ट पदार्थों को भी एकत्र करेगी।
सोमवार को कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने विश्वविद्यालय और अस्पताल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि विकास की ओर से तेजी से कदम बढ़ रहा है, इसका लाभ मरीजों, छात्रों, शिक्षकों सहित सभी को होगा।
सेंट्रल आफिस में कुलपति ने बताया कि बिजली उत्पादन के लिए लगने वाले सयंत्र से 3.5 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 25 साल तक बिजली खरीद पर समझौता किया गया है। इससे मौजूदा बिजली दर से 30 प्रतिशत की छूट मिलेगी। यह सरकार के स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा देने की पहल है।
उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ही 430 बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी सेंटर, सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर, वैदिक विज्ञान केंद्र, एमसीएच विंग, क्षेत्रीय नेत्र संस्थान, बायोनेस्ट सहित शिक्षकों, छात्रों, मरीजों के लिए कई सुविधाएं शुरू होने वाली हैं। इस दौरान रेक्टर प्रो. वीके शुक्ला, आईएमएस बीएचयू निदेशक प्रो. आरके जैन, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके माथुर मौजूद रहे।
ये सुविधाएं भी मिलेंगी
- परिसर में संकाय सदस्यों के लिए 280 फ्लैट वाला आवासीय भवन निर्माण
- अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए 110 और शोध छात्रों के लिए 200 कमरों का छात्रावास
- छह करोड़ की लागत से बायोनेस्ट की स्थापना जो जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों को प्रेरित करेगा
- वैश्विक स्तर पर विश्वविद्यालयों के साथ शिक्षण और शोध के क्षेत्र में सहयोग
- वैश्विक रैकिंग में शीर्ष 500 विश्वविद्यालयाें में स्थान के लिए विदेशी शिक्षण संस्थानों से सहयोग
बोन मैरो ट्रांसप्लांट शुरू
बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान के तहत बोन मैरो ट्रांसप्लांट एंड स्टेम सेल रिसर्च सेंटर भी शुरू हो गया है। ट्रॉमा सेंटर परिसर में बने पांच मंजिला इस सेंटर में 12 बेड हैं। कुलपति ने बताया कि पिछले दिनों विशेषज्ञ डॉ. राहुल भार्गव के निर्देशन में चिकित्सकों की टीम ने एक महिला का आटोलागस बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी किया। इसमें प्रो. केके गुप्ता, डॉ. प्राची महापात्रा, डॉ. आशीष गुप्ता आदि शामिल रहे। इसमें किसी डोनर की जरूरत नहीं होती है बल्कि मरीज के बोन मैरो का ही उपयोग होता है।