बीएचयू में हिंदी भाषियों के साथ भेदभाव का विवाद नहीं थम रहा, छात्रों ने पदयात्रा निकालकर जताया विरोध
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर छात्रों ने पदयात्रा निकालकर हिंदी के साथ भेदभाव पर आक्रोश जताया। शुक्रवार को बीएचयू के कुलपति द्वारा नियुक्तियों में भाषाई भेदभाव के विरोध में छात्रों का हुजूम उमड़ा।
छात्र पदयात्रा निकालकर सिंहद्वार से लेकर रविदास गेट तक जाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने धारा 144 का हवाला देकर जुलूस को सिंहद्वार पर ही रोक दिया। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच कहासुनी भी हुई।
छात्रों ने सिंहद्वार पर पदयात्रा के दौरान कहा कि विश्वविद्यालय में भाषाई भेदभाव बंद किया जाए।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हो रहे जेएनयू विवाद पर भी रोक लगाई जाए। छात्रों ने कहा कि बीएचयू की धरती हिंदी भाषा के लिए बहुत पहले से लड़ाई लड़ती आई है। वह चाहे मजूमदार जी के समय में चाहे मालवीय जी के समय में और जरूरत पड़ी तो इस आंदोलन को और आगे बढ़ाया जाएगा। हिंदी के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राजभाषा का अपमान हम लोग कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके पहले भी मृत्युंजय तिवारी आजाद के नेतृत्व में सेंट्रल ऑफिस में उक्त प्रकरण में ज्ञापन सौंपा गया था। छात्रों ने कहा कि अनुच्छेद 351 हमें अधिकार देता है कि हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार करें और अधिकतम प्रयोग करें। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संविधान की अवहेलना की जा रही है। पदयात्रा में शशांक सिंह, अभिषेक सिंह, वैभव, उत्कर्ष, दुष्यंत, विवेक, पुनीत, रोशन, मनीष आदि शामिल रहे।