बीएचयू: युवाओं के स्वस्थ भोजन के विकल्प में सामाजिक दबाव बाधक, बीएचयू विज्ञान विभाग ने किया अध्ययन; जानें खास
बीएचयू विज्ञान विभाग की टीम के अध्ययन में सामने आया कि युवाओं के स्वस्थ भोजन चुनने में सामाजिक दबाव बड़ी बाधा बन रहा है। टीम ने आठ महानगरों के 68 युवाओं की जीवनशैली का अध्ययन किया। शोध के अनुसार, दोस्तों, परिवार और सामाजिक माहौल का खानपान की पसंद पर असर पड़ता है, जिससे स्वस्थ विकल्प अपनाने में मुश्किल होती है।
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बीएचयू गृह विज्ञान विभाग की टीम ने युवाओं के स्वास्थ्य और स्वस्थ भोजन को लेकर शोध किया है। अहमदाबाद विश्वविद्यालय की टीम के साथ आठ महानगरों में युवाओं की जीवनशैली पर किए गए शोध में यह तथ्य सामने आया है कि सामाजिक दबाव और डिजिटल मार्केटिंग युवाओं के स्वस्थ भोजन विकल्पों के रास्ते में बड़ी बाधाएं हैं। कीमत, सुविधा भी इसी में शामिल है।
बीएचयू गृह विज्ञान विभाग की प्रो. ललिता वट्टा के निर्देशन वाली टीम ने मुंबई, पुणे, हैदराबाद, कोलकाता, अहमदाबाद, चेन्नई, दिल्ली और बेंगलुरु के 68 युवाओं पर एक अध्ययन किया है। इसमें गुणात्मक अध्ययन में पाया गया है कि युवाओं के लिए स्वस्थ भोजन करना केवल व्यक्तिगत पसंद या जागरूकता का विषय नहीं है।
भोजन की कीमत, जंक फूड की आसान उपलब्धता, व्यस्त जीवनशैली, खाना पकाने के सीमित कौशल, सामाजिक प्रभाव और डिजिटल मीडिया युवाओं के दैनिक भोजन विकल्पों को प्रभावित कर रहे हैं। अध्ययन के बाद जो परिणाम सामने आया है, उसमें बीएचयू, डीकिन यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया और अहमदाबाद यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अध्ययन का जिक्र किया गया है।
अध्ययन में जिन युवा प्रतिभागियों को शामिल किया गया, वह सामान्यतः फल, सब्जियां, दालें, अनाज और कम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को स्वस्थ मानते थे, जबकि गहरे तेल में तले हुए और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को अस्वस्थ मानते थे। अध्ययन में एक महत्वपूर्ण अंतर सामने आया कि किसी भी युवा प्रतिभागी ने नहीं बताया कि वह भोजन को स्वस्थ या अस्वस्थ तय करने के लिए पोषण लेबल या स्वास्थ्य संबंधी दावों पर निर्भर करता है।
फल और ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों सहित पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अक्सर महंगा माना गया, जबकि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और जंक फूड को अपेक्षाकृत सस्ता और आसानी से उपलब्ध विकल्प माना गया। अध्ययन करने वाली टीम में प्रो. ललिता वट्टा के साथ दो पीजी छात्राएं फरहीन, शिखा और डीकिन यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया के प्रो. एंथनी वॉर्सली, अहमदाबाद यूनिवर्सिटी से प्रो. नेहा राठी, शामिल रहीं।