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रामजन्मभूमि परिक्षेत्र में मिले पुरावशेषों को सहेजने में जुटा बीएचयू, 51 साल पहले खुदाई में मिले थे मूर्तियां, सिक्के और बर्तन

Sun, 21 Mar 2021 03:26 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 21 Mar 2021 03:26 PM IST
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BHU saving antiquities found in Ram Janmabhoomi enclosure 
खुदाई में मिले मिट्टी के बर्तन। - फोटो : अमर उजाला

बीएचयू प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग की ओर से अयोध्या में 1969-70 में कराई गई खोदाई में जो पुरावशेष मिले थे, अब उन्हें सहेजा जा रहा है। खुदाई में बुद्धकालीन मूर्तियों के साथ ही मिट्टी के बर्तन, दुर्लभ सिक्के सहित अन्य कई पुरावशेषों को संकलित कराने के साथ ही उसके समय-काल, महत्व आदि के बारे में एक पुस्तक भी प्रकाशित कराई जाएगी, ताकि स्नातक, स्नातकोत्तर के साथ ही शोध छात्रों को इसका लाभ मिल सके।

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अयोध्या में रामजन्मभूमि स्थल से करीब 300 से 400 मीटर के दायरे में 1969-70 में बीएचयू पुरातत्व विभाग के तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. एके नारायण के निर्देशन में खोदाई का काम शुरू कराया गया था। इसमें जो भी पुरावशेष मिले थे, अब तक उसे विभाग में एक बक्से में रखा गया है। अब उसे निकालकर सफाई कराने के साथ ही उसकी फोटोग्राफी कराई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को रामजन्मभूमि परिक्षेत्र की महत्ता, यहां मिलने वाले पुरावशेषों के बारे में जानकारी देना है।
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यूपी बिहार में कई जगह बीएचयू ने कराई थी खोदाई
बीएचयू प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर अशोक सिंह के अनुसार, विभाग की ओर से यूपी, बिहार में कई जगह विभाग की ओर से खोदाई कराई गई। अब भी खोदाई का काम जारी है। इसमें बिहार में सकास, यूपी में गोरखपुर, मिर्जापुर, बलिया, फरुखाबाद आदि जगहों पर खोदाई कराई गई है। इस समय वाराणसी के बभनियाव और चंदौली के माटी गांव में खोदाई कराई जा रही है।

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श्रीरामजन्मभूमि परिक्षेत्र में 1969-70 में जो पुरावशेष खोदाई में मिले थे, अब उन्हें नए सिरे से संकलित कराया जा रहा है। इनमें मिट्टी के बर्तन, सिक्के, घड़ों आदि की फोटोग्राफी का काम चल रहा है। साथ ही इनकी ड्राइंग भी होगी। सभी के समय-काल का वर्णन, फोटोग्राफी संकलित कर पुस्तक प्रकाशित कराने के साथ ही इसे म्यूजियम में रखवाया जाएगा।
- प्रो.ओएन सिंह, विभागाध्यक्ष, प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग, बीएचयू

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