Varanasi: बीएचयू के शोध छात्रों का धरना हुआ अनिश्चितकालीन, कहा- न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट जाएंगे
बीएचयू के हिंदी विभाग में पीएचडी के पांच छात्रों का दाखिला निरस्त कर दिया गया है। इसके विरोध में छात्रों का धरना जारी है। उन्होंने कहा है कि निर्णय वापस न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के परीक्षा नियंता कार्यालय के बाहर हिंदी विभाग के शोध छात्रों का धरना पांचवें दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। धरना पांच छात्रों के निष्कासन के विरोध में चल रहा है। विश्वविद्यालय के फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए शोध छात्रों ने अब धरने को अनिश्चितकालीन कर दिया।
छात्रों का कहना है कि गलती विश्वविद्यालय प्रशासन की है, लेकिन गाज शोध छात्रों पर गिराई गई। धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि प्रवेश के सात महीने बाद परीक्षा नियंता के पत्र पर वरीयता सूची में बदलाव करके पांच छात्रों को निष्कासित कर दिया गया।
संशोधित वरीयता सूची नामांकन से पहले जारी की जाती है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मनमाने तरीके से छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया गया। निर्णय वापस न होने तक आंदोलन जारी रहेगा। न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
‘जी-20’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता में आकांक्षा अव्वल
बीएचयू के नगर छात्र निकाय में चल रहे कार्यक्रम ‘उन्मेष’ के तहत शुक्रवार को ‘आज का भारत और जी-20’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता कराई गई। उपस्थित विद्यार्थियों ने कहा कि भारत के वसुधैव कुटुंबकम् की भावना और संस्कृति को दुनिया पसंद करती है देश को जी-20 के नेतृत्व का अवसर मिला है।
प्रतियोगिता में आकांक्षा सिंह, अंकुश गुप्ता और उज्ज्वल यादव क्रमश: प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान पर रहे। सौम्या गुप्ता को सांत्वना पुरस्कार मिला। निर्णायक मंडल में डॉ. शार्दुल चतुर्वेदी, डॉ. निशांत, डॉ. कानूप्रिया शामिल रहीं। प्रो. रामानंद राय व मानसी तनेजा भी मौजूद रहीं