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BHU-CCMB का नेपाली DNA पर पहला बड़ा अध्ययन: शेरपा को छोड़कर अधिकतर आबादी इंडियन, चीन को बड़ा झटका

Tue, 18 Oct 2022 06:20 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Tue, 18 Oct 2022 06:20 PM IST
सार

नेपाल के आदिवासी लोगों पर जो शोध हुआ उसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। शोध में पाया गया कि नेपाल की शेरपा जातियों को अगर छोड़ दें, तो वहां की लगभग आबादी इंडियन है। शेरपा के जीन्स तिब्बतियों के ज्यादा करीब हैं। 

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BHU Research on nepalese The matrilineal ancestry of Nepali populations
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

काशी हिंदू विश्वविद्यालय और सीएसआईआर-सेलुलर और आणविक जीवविज्ञान केंद्र द्वारा नेपाल का आनुवांशिक इतिहास ज्ञात किया गया। नेपाल के आदिवासी लोगों पर जो शोध हुआ उसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। शोध में पाया गया कि नेपाल की शेरपा जातियों को अगर छोड़ दें, तो वहां की लगभग आबादी इंडियन है। शेरपा के जीन्स तिब्बतियों के ज्यादा करीब हैं। 

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नेपालियों के सैंपल पर हुआ ये शोध 15 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय जर्नल ह्यूमन जेनेटिक्स में पब्लिश भी हो चुका है। इस शोध के बाद से चीन को बड़ा झटका लग सकता है क्योंकि चीन काफी समय से नेपाल के लोगों पर अपना दावा ठोक रहा था। 
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सीएसआईआर-सेलुलर और आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीसीएमबी), हैदराबाद, और काशी हिन्दू विश्विद्यालय (बी.एच्.यू.) भारत के शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने नेपाल की आबादी के मातृ वंश का अध्ययन किया है। 

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डीबीटी-सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स (सीडीएफडी), हैदराबाद के निदेशक डॉ के थंगराज ने बताया कि "नेपाली लोगों पर यह पहला सबसे बड़ा अध्ययन है, जहां हमने नेवार, मगर, शेरपा, ब्राह्मण, थारू, तमांग और काठमांडू और पूर्वी नेपाल की आबादी सहित नेपाल के विभिन्न जातीय समूहों के 999 व्यक्तियों के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए सीक्वेंस का विश्लेषण किया है। और पाया कि अधिकांश नेपाली आबादी ने हिमालय के उचाई पर रहने वाले लोगो की तुलना में तराई की आबादी से अपने मातृ वंश को प्राप्त किया है"। 
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा की, "भारत और तिब्बत के साथ नेपाल के सांस्कृतिक संबंध उनके अनुवांशिक इतिहास में भी परिलक्षित होते हैं।"
 

इस अध्ययन से प्राप्त परिणामों ने शोधकर्ताओं को इतिहास और अतीत की डेमोग्राफ़िक घटनाओं के बारे में कई घटनाक्रमों को पता करने में मदद की जिसने वर्तमान नेपाली आनुवंशिक विविधता को बनाया। अध्ययन के प्रथम लेखक त्रिभुवन विश्वविद्यालय, राजदीप बसनेट ने बताया कि "हमारे अध्ययन से पता चला है कि नेपालियों के प्राचीन अनुवांशिक डीएनए को धीरे-धीरे विभिन्न मिश्रण एपिसोड द्वारा बदल दिया गया था; साथ ही दक्षिणपूर्व तिब्बत के रास्ते 3.8-6 हजार साल पहले लोगो के हिमालय पार करने के प्रमाण मिले है”।

अध्ययन का ऑनलाइन लिंकः 
Link: https://link.springer.com/article/10.1007/s00439-022-02488-z
संपर्क सूत्र - K. Thangaraj (9908213822)
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