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बीएचयू मामले में PMO और CMO को भेजी गई प्रारंभिक रिपोर्ट, ये बताई वजह

Mon, 25 Sep 2017 02:12 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 25 Sep 2017 02:12 PM IST
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BHU protest first report sent to PMO and CMO
बीएचयू में दिनभर मची रही अफरा तफरी - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू में बवाल के मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में संवादहीनता और लापरवाही को बड़ी वजह बताया गया है।
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कहा गया है कि बीएचयू प्रशासन ने अगर धरने के पहले दिन ही छात्र-छात्राओं से संवाद किया गया होता तो परिसर में उपद्रव के हालात नहीं बनते। संवाद न होने से नाराजगी बढ़ गई और आंदोलन बढ़ गया।
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यह भी बताया गया है कि कानून व्यवस्था ठीक होने और धरना शांतिपूर्ण होने का दावा करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पूरे मामले से दूरी बनाए रखी। जिला प्रशासन ने भी यदि शुरुआत में ही बीएचयू प्रशासन से वार्ता कर हल निकालने की कोशिश की होती तो छात्राओं की सुरक्षा की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन उग्र नहीं होता।
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 शनिवार रात परिसर हुए पथराव, लाठीचार्ज, बमबाजी, आगजनी और फायरिंग के मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने रविवार को प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। इसी मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना की जांच कराने का निर्देश कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण को दिया है। उनसे मीडियाकर्मियों की पिटाई पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।

माना जा रहा है कि रविवार देर शाम भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर जल्दी ही कुछ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। बीएचयू से जुड़े कुछ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना है।

 पूरे मामले में मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार और प्रमुख सचिव सूचना अवनीश अवस्थी से जानकारी लेने के बाद कमिश्नर को रिपोर्ट देने और जांच कराने का निर्देश दिया गया। इस पर कमिश्नर दोपहर करीब डेढ़ बजे बीएचयू पहुंचे।

पांच बजे तक उन्होंने बीएचयू प्रशासन, जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों के अलावा कैंपस में मौजूद कुछ छात्र-छात्राओं से भी बातचीत की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र का मामला होने के कारण पीएमओ समय-समय पर अपडेट ले रहा है।मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। 
 

माहौल बिगाड़ने वालों ने छात्राओं के प्रयासों पर फेर दिया पानी

BHU protest first report sent to PMO and CMO
सुरक्षा की मांग पर दूसरे दिन भी छात्राओं का धरना-प्रदर्शन जारी - फोटो : अमर उजाला
 जिनकी खातिर महामना ने अथक प्रयासों से बीएचयू की स्थापना की, शनिवार की रात उन्हीं पर यहां लाठियां बरसाईं गईं। पहली बार अपनी सुरक्षा को लेकर छात्राओं का इतना बड़ा आंदोलन बीएचयू में हुआ। लेकिन, छात्राओं का यह स्व स्फूर्त आंदोलन कुछ अराजक तत्वों की भेंट चढ़ गया। महामना की बगिया सुलग उठी और छात्राओं के मुद्दे पीछे छूट गए।  

 काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ जैसे मुद्दे पर तकरीबन तीन साल पहले भी कुछ ऐसा ही माहौल बना था। लेकिन, यह पहला ऐसा मौका था जब अपनी सुरक्षा और अधिकार के लिए छात्राओं ने इतनी मजबूती से आवाज उठाई। वह भी बिना किसी बैनर और नेतृत्व के।

मुद्दा था, कैंपस में छात्राओं की सुरक्षा का। वे इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से ठोस आश्वासन चाहती थीं। शुक्रवार की सुबह से शनिवार की देर शाम तक छात्राएं अपनी मांगों के समर्थन में सिंह द्वार पर डटी थीं। देर शाम कुछ अराजक तत्वों के चलते उनके शांतिपूर्ण आंदोलन की दिशा बदल गई।

विश्वविद्यालय से जुड़े लोग मानते हैं कि छात्राओं का मुद्दा बिल्कुल सही था। उनका कहना है कि अगर मुद्दा वाजिब नहीं होता तो शायद इतनी बड़ी संख्या में छात्राएं एकजुट भी नहीं होतीं।

परिसर वाकई पहले जैसा सुरक्षित नहीं रह गया है लेकिन इन मुद्दों पर जोर देने की बजाय छात्राओं के आंदोलन को हिंसक बनाने के बाद अब उसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश शुरू हो गई है। इन सबके बीच छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा कहीं पीछे छूट गया है। 
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