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BHU में बवाल: खुफिया इकाइयों ने सौंपी रिपोर्ट, पढ़िए पूरी कहानी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 01 Oct 2017 10:11 AM IST
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23 सितंबर को शहर और 24 सितंबर को बाहर से आए लोग प्रदर्शन में हुए शामिल
- फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू बवाल को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि बाहरी लोगों ने माहौल बिगाड़ा और परिसर में अराजकता फैली। मगर, खुफिया इकाइयों की रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन से इत्तेफाक नहीं रखती है।
खुफिया इकाइयों के अनुसार 21 सितंबर की शाम छात्रा से हुई छेड़खानी के बाद प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों और वार्डन के बरताव से गुस्साई छात्राओं ने रात में ही सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे को संदेश भेजकर 22 सितंबर की सुबह बीएचयू गेट पर इकट्ठा होने का आह्वान किया और वहां जुटीं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 सितंबर को प्रदर्शन में सभी राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों से जुड़ी और आम छात्राएं भी शामिल थीं। 23 सितंबर तक छात्राओं के बीच लेफ्ट विंग के छात्र संगठनों से जुड़े लोगों ने पैठ बना ली।
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इसी दौरान शहर के भी कुछ राजनीतिक और छात्र संगठनों के लोग भी प्रदर्शन में शामिल होने आए। लाठीचार्ज की घटना के बाद 24 सितंबर को दूसरे शहरों से आए लोग भी लंका में विरोध मार्च का हिस्सा बने।
खुफिया इकाइयों के अनुसार 22 सितंबर को बीएचयू गेट पर छात्राओं के प्रदर्शन के दौरान कोई राजनीतिक विचारधारा नहीं बल्कि छेड़खानी का मुद्दा अहम था। इसी वजह से एबीवीपी, एनएसयूआई और आइसा सहित अन्य संगठनों से जुड़ी छात्राएं और छात्र प्रदर्शन में एक साथ रहे।
22 सितंबर की शाम जब पीएम मोदी का दुर्गाकुंड जाने का रूट अचानक बदल दिया गया तो प्रदर्शन में शामिल लोगों ने इसे अपनी जीत मानी और उनका मनोबल बढ़ा।
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खुफिया इकाइयों के अनुसार 21 सितंबर की शाम छात्रा से हुई छेड़खानी के बाद प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों और वार्डन के बरताव से गुस्साई छात्राओं ने रात में ही सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे को संदेश भेजकर 22 सितंबर की सुबह बीएचयू गेट पर इकट्ठा होने का आह्वान किया और वहां जुटीं।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 सितंबर को प्रदर्शन में सभी राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों से जुड़ी और आम छात्राएं भी शामिल थीं। 23 सितंबर तक छात्राओं के बीच लेफ्ट विंग के छात्र संगठनों से जुड़े लोगों ने पैठ बना ली।
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इसी दौरान शहर के भी कुछ राजनीतिक और छात्र संगठनों के लोग भी प्रदर्शन में शामिल होने आए। लाठीचार्ज की घटना के बाद 24 सितंबर को दूसरे शहरों से आए लोग भी लंका में विरोध मार्च का हिस्सा बने।
खुफिया इकाइयों के अनुसार 22 सितंबर को बीएचयू गेट पर छात्राओं के प्रदर्शन के दौरान कोई राजनीतिक विचारधारा नहीं बल्कि छेड़खानी का मुद्दा अहम था। इसी वजह से एबीवीपी, एनएसयूआई और आइसा सहित अन्य संगठनों से जुड़ी छात्राएं और छात्र प्रदर्शन में एक साथ रहे।
22 सितंबर की शाम जब पीएम मोदी का दुर्गाकुंड जाने का रूट अचानक बदल दिया गया तो प्रदर्शन में शामिल लोगों ने इसे अपनी जीत मानी और उनका मनोबल बढ़ा।
इस डर से कुलपति के पास नहीं गईं छात्राएं
बीएचयू छात्राओं का प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
विरोध प्रदर्शन को सुर्खियों में देख 23 सितंबर को अन्य संगठनों से जुड़े शहर के लोग छात्राओं को समर्थन देने पहुंचे। रात में वीसी लॉज और फिर एमएमवी के सामने छात्राओं और उनके समर्थन में एकत्र छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ तो 24 सितंबर को शहर के बाहर से भी छात्र आए।
खुफिया इकाइयों का मानना है कि यदि समय रहते छात्राओं और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद कायम हो जाता तो स्थिति अनियंत्रित न होती।
खुफिया इकाइयों के अनुसार प्रदर्शन कर रही छात्राओं को डर था कि यदि प्रतिनिधिमंडल में शामिल होकर कोई कुलपति से मिलने जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी या अन्य तरीके से परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
इसी वजह से छात्राएं खुले तौर पर खुद को चिह्नित न होने देते हुए कुलपति से मिलने पर अड़ी थीं। इसी वजह से वे पत्रकारों की मौजूदगी में कुलपति से मुलाकात की मांग कर रही थीं।
खुफिया इकाइयों का मानना है कि यदि समय रहते छात्राओं और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद कायम हो जाता तो स्थिति अनियंत्रित न होती।
खुफिया इकाइयों के अनुसार प्रदर्शन कर रही छात्राओं को डर था कि यदि प्रतिनिधिमंडल में शामिल होकर कोई कुलपति से मिलने जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी या अन्य तरीके से परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
इसी वजह से छात्राएं खुले तौर पर खुद को चिह्नित न होने देते हुए कुलपति से मिलने पर अड़ी थीं। इसी वजह से वे पत्रकारों की मौजूदगी में कुलपति से मुलाकात की मांग कर रही थीं।