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BHU Hospital: एक ही डॉक्टर के भरोसे OPD, वार्ड और डायलिसिस यूनिट, दर्द में भी नहीं हो रहा झटपट इलाज

Sun, 26 Mar 2023 07:53 AM IST
किरन रौतेला रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Sun, 26 Mar 2023 07:53 AM IST
सार

बीएचयू आईएमएस के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में दिखा चुके करीब 150 किडनी मरीजों की डायलिसिस समय से नहीं हो रही है। एक 55 वर्षीय व्यक्ति शनिवार को अपने बेटे के साथ सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक पहुंचा। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए पर्चा जमा किया। करीब घंटे भर बाद नंबर आया तो डॉक्टर ने डायलिसिस कराने की सलाह दी। 

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BHU Hospital OPD, Ward and Dialysis Unit depend on the one doctor Lack of machines
अपनी बारी का इंतजार करते मरीज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) में इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (आईएमएस) के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में दिखा चुके करीब 150 किडनी मरीजों की डायलिसिस समय से नहीं हो रही है। मरीज दर्द से कराहते रहते हैं, फिर भी नाम प्रतीक्षा सूची में डाल दिया जाता है। यह समस्या मैन पावर और मशीनों की कमी से गहराई है। विभाग में तैनात एक ही डॉक्टर मरीजों को देखते हैं। वही वार्ड में भर्ती मरीजों की देखरेख और डायलिसिस भी कराते हैं। नियमानुसार, तीन डॉक्टरों की नियुक्ति होनी चाहिए।

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एक 55 वर्षीय व्यक्ति शनिवार को अपने बेटे के साथ सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक पहुंचा। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए पर्चा जमा किया। करीब घंटे भर बाद नंबर आया तो डॉक्टर ने डायलिसिस कराने की सलाह दी। व्यक्ति डायलिसिस सेंटर गया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। दो टूक कहा गया कि डायलिसिस के लिए तारीख लेनी पड़ेगी। जब नंबर आएगा, तभी डायलिसिस होगी। अभी लंबी वेटिंग है। कमोबेश यही स्थिति ज्यादातर मरीजों की रही। जिन मरीजों को पहले से तिथि मिली थी, उन्हीं की डायलिसिस की गई। नए मरीजों को नई तिथि पर आने की जानकारी दी गई। कुछ मरीज ऐसे थे, जो दर्द से कराह रहे थे। इसलिए दूसरे अस्पताल या केंद्र से डायलिसिस कराने की सलाह दी गई।
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BHU Hospital OPD, Ward and Dialysis Unit depend on the one doctor Lack of machines
बीएचयू - फोटो : अमर उजाला
10 और मशीनों की जरूरत

डायलिसिस के लिए 17 मशीनें लगी हैं। एक मरीज की डायलिसिस में तीन से चार घंटे लगते हैं। जिस तेजी से मरीजों की संख्या बढ़ी है, ऐसे में 10 और मशीनों की जरूरत बताई जा रही है।

ओपीडी में डॉक्टर से परामर्श लेना भी चुनौतीपूर्ण
सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के भूतल पर चलने वाली नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट की ओपीडी में हर दिन वाराणसी सहित पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों, बिहार से 200-250 मरीज आते हैं। दूरदराज से आने वाले मरीज सुबह ही ओपीडी के बाहर लाइन लगा लेते हैं। किसी का नंबर घंटे भर बाद तो किसी का दो से चार घंटे बाद आता है।

डॉ. शिवेंद्र करते हैं चार दिन ओपीडी

जानकारी के मुताबिक, विभाग में डॉक्टरों के तीन पद स्वीकृत हैं। लेकिन, लंबे समय से दो पद खाली हैं। इस वक्त डॉ. शिवेंद्र सिंह ही मरीजों को देखते हैं। डॉ शिवेंद्र के पास ही परामर्श, जांच व डायलिसिस की जिम्मेदारी है। डॉ. सिंह सप्ताह में चार दिन सोमवार, मंगलवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार को मरीजों को देखते हैं। वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज भी करते हैं।

 

BHU Hospital OPD, Ward and Dialysis Unit depend on the one doctor Lack of machines
बीएचयू अस्पताल में लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
सीएमओ कर सकते हैं निगरानी

मरीजों की दिक्कतों का संज्ञान शासन ने भी लिया है। उच्च स्तर से मामले की निगरानी की सलाह दी गई है। यह काम मंडलायुक्त की देखरेख में होगा। सीएमओ को निगरानी की जिम्मेदारी मिल सकती है। मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न हो, यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

बाहर डायलिसिस कराना महंगा

किडनी मरीजों को महीने में दो बार डायलिसिस करानी पड़ती है। बीएचयू में एक बार डायलिसिस कराने पर करीब 1200 रुपये देने पड़ते हैं। यही बाहर 2500 से 3000 रुपये में होती है।

खाली पदों पर नियुक्ति की तैयारी चल रही है। ओपीडी में एक ही डॉक्टर देख रहे हैं, यह सही है। जल्द ही समस्या का समाधान होगा। मरीजों को पहले से बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। -प्रो.एसके सिंह, निदेशक, आईएमएस बीएचयू

मंडलीय अस्पताल में भी दिक्कत
मंडलीय अस्पताल में भी डायलिसिस यूनिट है, लेकिन 10 मरीजों की प्रतीक्षा सूची है। रोजाना चार से पांच मरीजों की ही डायलिसिस हो पाती है।
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