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बीएचयू: नर्सिंग ऑफिसरों-बीएचयू प्रशासन में बढ़ी रार, सात दिन बाद भी नतीजा कुछ नहीं, मरीज परेशान

Fri, 14 Jan 2022 05:32 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 14 Jan 2022 05:32 PM IST
सार

नर्सिंग ऑफिसरों ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। बीएचयू प्रशासन ने पुलिस को पत्र लिखकर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। दूसरी जांच कमेटी बनाने और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए पीएम, सीएम को पत्र भी भेजा गया है।

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BHU hospital Nursing officers vs BHU administration ruckus increased no solution even after seven days patient suffer
धरने पर बैठे बीएचयू अस्पताल के नर्सिंग अफसर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी में एमएस पर पिटाई का आरोप लगाकर पिछले शनिवार से धरने पर बैठे नर्सिंग अफसरों और बीएचयू प्रशासन के बीच रार दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सात दिन बाद भी कोई ठोस नतीजा न निकल पाने की वजह से मरीजों की परेशानी भी बनी हुई है। जहां एक ओर नर्सिंग अफसर बीएचयू द्वारा कराई गई जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। वहीं बीएचयू प्रशासन ने दो दिन पहले ही लंका पुलिस को भेजे पत्र में धरने को महामारी अधिनियम के विपरीत बताते हुए कार्रवाई करने को कहा है। अब धरना कब खत्म होगा और मरीजों को राहत होगी, इस बारे में अभी कुछ भी कहा नहीं जा सकता है।

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इमरजेंसी गेट पर धरने पर बैठे नर्सिंग ऑफिसरों ने एक दूसरी जांच  कमेटी गठित करने और उस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के लिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री बीएचयू कुलपति समेत अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर मांग की है। उनका कहना है कि जिस तरह से जांच की कार्यवाही की गई है और एमएस पर लगाए गए आरोपों को असत्य बताया गया, वह गलत है। उधर एक बार फिर आईएमएस बीएचयू हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष ने भी जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़ा किया है। अपने फेसबुक वॉल पर लिखे पोस्ट के माध्यम से एमएस पर कार्रवाई की मांग की है।

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एमएस ने लिखा है पुलिस को पत्र, निदेशक, रजिस्ट्रार के भी हैं हस्ताक्षर
नर्सिंग ऑफिसरों के इमरजेंसी गेट पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को लेकर अस्पताल के एमएस प्रो. केके गुप्ता की ओर से लंका पुलिस को पत्र भेजकर कोविड महामारी अधिनियम का हवाला देते हुए धरना देने वालों पर कार्रवाई की बात कही गई है। साथ ही यह भी कहा है कि धरने से कोरोना मरीजों के साथ ही इमरजेंसी आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पुलिस को जो पत्र भेजा गया है, उसमें आईएमएस डायरेक्टर प्रो. बीआर मित्तल के साथ ही रजिस्ट्रार नीरज त्रिपाठी के भी हस्ताक्षर हैं। हालांकि पुलिस की ओर से इस मामले में अब तक कोई कार्यवाही न किए जाने से भी कई तरह के सवाल भी खड़े होने लगे हैं।

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नर्सिंग ऑफिसर का आरोप- जांच में दी गई जानकारी का जिक्र नहीं
एमएस पर पिटाई का आरोप लगाने वाले नर्सिंग आफिसर अरविंद कुमार ने रजिस्ट्रार को लिखे गए पत्र में बताया कि उन्होंने जांच कमेटी के सामने जो जानकारी दी थी, उसे लिखा नहीं गया है। यही नहीं तीन साथियों के बयान भी लेने को कहा गया था लेकिन उनके नाम नहीं लिखे गए। अरविंद ने दूसरी निष्पक्ष जांच कमेटी गठित करने की मांग की है। इसकी कॉपी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, शिक्षा मंत्री, कुलपति समेत अन्य लोगों को भी दी गई है।

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