UP: 'BHU अस्पताल का अनुदान 150 गुना बढ़ा, सुविधाएं जीरो', अजय राय ने किया तंज; बोले- संघ का अड्डा न बनाएं
बीएचयू के कार्यकारिणी परिषद को लेकर कांग्रेस नेता ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महामना की बगिया को आरएसएस का अड्डा नहीं बनने देंगे। सवाल किया कि भाजपा के जिन तीन नेताओं को कार्य परिषद में शामिल किया गया है क्या वह शिक्षाविद् हैं?
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Varanasi News: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कार्यकारिणी परिषद में शैक्षणिक लोगों की जगह पूर्व केंद्रीय मंत्री, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष, मेयर को शामिल करना विश्वविद्यालय को आरएसएस का कार्यालय बनाने जैसा है। बीएचयू परिसर में गैंगरेप करने के आरोपी सक्षम पटेल के रिश्तेदार दिलीप पटेल को सदस्य बनाकर भाजपा ने महिलाओं के प्रति अपनी मंशा जगजाहिर कर दी है।
उक्त बातें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने शुक्रवार को लहुराबीर स्थित आवास पर प्रेसवार्ता में कहीं। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बीएचयू में एक्जीक्यूटिव काउंसिल (कार्यकारी परिषद) का आरएसएस करण करना निंदनीय है। हमने पिछले वर्ष इस मुद्दे को उठाया था कि कार्यकारी परिषद का गठन हो और उसमें शिक्षाविद, कुलपति, वैज्ञानिक, शिक्षा जगत के महत्वपूर्ण लोगों को शामिल किया जाए।
बीएचयू का आरएसएस करण कर चुकी केंद्र सरकार ने अपने पुराने रवैए को दोहराते हुए फिर से निम्न स्तर का कार्य किया। जब बीएचयू में कुलपति थे तो कार्यपरिषद नहीं था। अब कार्यपरिषद है तो कुलपति नहीं हैं। यह गंभीर विषय है। बीएचयू शोध और अध्ययन का विश्व स्तरीय केंद्र है। ऐसे में भाजपा के जिन तीन नेताओं को कार्य परिषद में शामिल किया गया है क्या वह शिक्षाविद् हैं?
कांग्रेस के समय जब कार्य परिषद की कमेटियां बनती थी तो उसमें शिक्षाविद, वैज्ञानिक, भारतीय सम्मान से अलंकृत शिक्षाविद हस्तियां शामिल रहती थीं। कार्यपरिषद का राजनीतीकरण करना दुर्भाग्यपूर्ण है। हम मांग करते हैं कि तत्काल इस परिषद का राजनीतीकरण बंद हो और योग्य व्यक्तियों को परिषद् का सदस्य बनाया जाए।
अस्पताल का अनुदान बढ़ा 150 गुना, सुविधाएं जीरो
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बीएचयू अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज बीएचयू शिक्षा का नहीं बल्कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। भ्रष्टाचार इस कदर है कि टेंडरों की तरह एमआरआई टेंडर में फर्जीवाड़ा हो रहा है। टेंडर समिति के विरोध के बाद एमआरआई सेवा का टेंडर फर्जी जीएसटी नंबर वाली कंपनी को आवंटित कर दिया गया।
कोविड काल में भी घोटाले नहीं रुके और जेम पोर्टल की बजाय सीधे बाजार से महंगे दामों पर दवाएं और उपकरणों की खरीद गैर कानूनी तरीके से की गई। इसका खुलासा कैग की रिपोर्ट में हुआ। कोविड राहत फंड का उपयोग मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने की बजाय खुद की जेबें भरने में हुआ।
2011 में अस्पताल को दो करोड़ रुपये सालाना मिलता था और आज 250 से 300 करोड़ रुपए सालाना मिल रहा है। जब दो करोड़ सालाना मिलता था अस्पताल को तब मरीजों को खाना के साथ दवाएं भी फ्री में मिलती थीं। आज मरीजों को न तो दवाएं मिलती हैं और न ही खाना। अस्पताल का सरकारी अनुदान 150 गुना बढ़ा, लेकिन मरीजों को आज भी अपने जांच और इलाज के लिए पहले से ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं।
आईसीयू मिलने से पहले ही मर रहे मरीज
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि ब्लैकलिस्टेड और अनुभवहीन कंपनी को सीसीआई लैब थमाकर गरीब मरीजों की जेबें काटकर खुद की जेबें भरी जा रही हैं।आईसीयू बेड की स्थिति इतनी दयनीय है की मरीज आईसीयू मिलने से पहले ही अपने प्राणों को त्याग दे रहा है। प्रशासनिक गुंडागर्दी और जानलेवा लापरवाही अपने चरम पर है।