फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   BHU Hospital Doctors straightened heart vein without surgery angioplasty of 35 years old female patient done

बीएचयू अस्पताल: चिकित्सकों ने बिना चीर-फाड़ दिल की नस कर दी सीधी, महिला मरीज की एंजियोप्लास्टी बनी थी बड़ी चुनौती

Sat, 29 Jan 2022 06:53 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 29 Jan 2022 06:53 PM IST
सार

आईएमएस बीएचयू के ह्रदय रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ओमशंकर और उनकी टीम ने दिल की गंभीर बीमारी से पीड़ित महिला की जान बचाई है। बिना सर्जरी दिल की नस को एंजियोप्लास्टी कर सीधी की गई। एंजियोप्लास्टी होने के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। 

विज्ञापन
BHU Hospital Doctors straightened heart vein without surgery angioplasty of 35 years old female patient done
गंभीर बीमारी से पीड़ित महिला की एंजिलयोप्लॉस्टी बनी थी बड़ी चुनौती - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

आईएमएस बीएचूय के हृदय रोग विभाग में चिकित्सकों की टीम ने गंभीर बीमारी से पीड़ित महिला की एंजियोप्लास्टी कर उसकी जान बचा ली। विभागाध्यक्ष प्रो. ओमशंकर के मुताबिक, जांच में पता चला कि महिला के हृदय की बाईं तरफ की प्रमुख नस चिपककर धागे जैसी दिख रही थी। जिसे बिना चीरफाड़ कर सीधी कर दी गई।

विज्ञापन


महिला की एंजियोग्राफी होने के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। बता दें कि यह हृदय की सबसे गंभीर बीमारी होती है। इसका सामना करने वाले लोगों को चलते-फिरते अचानक ही हृदय आघात हो जाता है। जिससे उनकी मौत हो जाती है। 
विज्ञापन


टीम का नेतृत्व करने वाले प्रो. ओमशंकर ने बताया कि 35 वर्षीय आजमगढ़ निवासी महिला को 28 जनवरी को अस्पताल लाया गया था। सीने और दोनों हाथों में असहाय दर्द की वजह से वह चल भी नहीं पा रही थी। ये सभी लक्षण महिला में गंभीर हृदय रोग की तरफ इशारा कर रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

पढ़ेंः वाराणसी में रेलवे और जिला प्रशासन ने तीन मंजिला भवन ढहाया, पुलिस चौकी के सामने थी बिल्डिंग

'काफी आश्चर्यजनक केस था'

महिला कि किसी निजी अस्पताल में इसी वजह से एंजियोग्राफी जांच की गई थी, जिसमें अति गंभीर बीमारी पाई गई थी, जिनका इलाज उनके लिए वहां कर पाना मुश्किल था। इसके बाद परिजन बीएचयू अस्पताल ले आए।

प्रो. ओमशंकर ने बताया कि खास बात यह है कि 35 वर्षीय यह महिला न तो तंबाकू का सेवन करती है, न ही मधुमेह से पीड़ित है, न ही उनके परिवार के किसी सदस्य को हृदय के इस तरह की गंभीर बीमारी की कोई दिक्कत है और न ही उनके खून की नलियों में सूजन होने की कोई वजह दिख रही थी। ऐसे में हम सभी के लिए यह काफी आश्चर्यजनक केस था।

महिला की एंजिलयोप्लॉस्टी बनी थी बड़ी चुनौती

प्रो.ओमशंकर ने बताया कि  इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए इसके दो ही इलाज संभव थे। इसमें से एक तो मरीज़ की ओपन हार्ट (बाईपास) सर्जरी की जाए, जो उम्र के हिसाब, अस्पताल में भर्ती रहने के दिनों, खर्च के हिसाब और खतरे के हिसाब से काफी महंगी पड़ती है।

जबकि दूसरी मरीज के बाएं तरफ की सबसे प्रमुख नस जो 95 प्रतिशत के आसपास सिकुड़ी हुई थी उसे हाथ/पैरों के नसों में सुई डालकर फुला दिया जाए और उसमें छल्ले/स्टेंट डाल दिये जाए, जिसे एंजियोप्लास्टी कहा जाता है, जिसके 1-2 दिन बाद ही मरीज बिल्कुल स्वस्थ हो जाते हैं, वो भी बिना किसी चीर-फाड़ के।

इस पूरी प्रक्रिया में ख़र्च भी तकरीबन 50 हजार रुपये का ही आता है। इसके बाद ही मरीज की एंजियोप्लास्टी करने का निर्णय लिया गया, जो वाकई चुनौतीपूर्ण कार्य था। सर्जरी के बाद धागे जैसी दिखने वाली नसें, अब सामान्य नसों सी हैं और काम कर रहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed