{"_id":"596fb1104f1c1b1b118b474f","slug":"bhu-hospital-chest-operation-successful","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बीएचयू में 60 मिनट तक दिल की धड़कन को किया बंद, चार घंटे चला ऑपरेशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएचयू में 60 मिनट तक दिल की धड़कन को किया बंद, चार घंटे चला ऑपरेशन
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 20 Jul 2017 04:56 PM IST
विज्ञापन
ऑपरेशन करते डाक्टर
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में 18 साल का युवक लंबे समय से सांस फूलने और हृदय गति तेजी से कम होने से पीड़ित था। कार्डियक संर्जन डॉ. सिद्धार्थ लाखोटिया ने टीम के साथ ही चार घंटे की ओपेन हार्ट सर्जरी की। अस्पताल में इस तरह का आपरेशन पहली बार हुआ है।
डॉ. लाखोटिया ने बताया कि युवक में बचपन से ही बीमारी थी लेकिन परिवार वालों ने नजरअंदाज किया। चार दिन पहले उसे अधिक सांस फूलने, छाती में दर्द व बुखार की हालत में अस्पताल लाया गया।
यहां जांच में पाया गया कि उसका साइनस वालसालवा एन्यूरिजम फट गया है। हृदय काम करना बंद कर रहा था। चार घंटे की सर्जरी के बाद हृदय के दोनों छिद्रों, मुख्य धमनी के छिद्र, वेंट्रिकल के बीच के छिद्र को डाकरान पैच की मदद से बंद किया गया।
विज्ञापन
युवक के अंगों को बचाने के लिए पूरे शरीर को 28 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठंडा किया गया। इसके अलावा हृदय को 60 मिनट तक बंद रखा गया। टीम में एनिस्थिसिया से प्रो. एसके माथुर के साथ ही कार्डियोथोरैसिक सर्जरी, कार्डियक एनिस्थिसिया, नर्सिंग, परफ्यूशनिष्ठ और पैरामेडिकल के लगभग 20 सदस्य शामिल थे।
विज्ञापन
डॉ. लाखोटिया ने बताया कि युवक में बचपन से ही बीमारी थी लेकिन परिवार वालों ने नजरअंदाज किया। चार दिन पहले उसे अधिक सांस फूलने, छाती में दर्द व बुखार की हालत में अस्पताल लाया गया।
विज्ञापन
यहां जांच में पाया गया कि उसका साइनस वालसालवा एन्यूरिजम फट गया है। हृदय काम करना बंद कर रहा था। चार घंटे की सर्जरी के बाद हृदय के दोनों छिद्रों, मुख्य धमनी के छिद्र, वेंट्रिकल के बीच के छिद्र को डाकरान पैच की मदद से बंद किया गया।
विज्ञापन
युवक के अंगों को बचाने के लिए पूरे शरीर को 28 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठंडा किया गया। इसके अलावा हृदय को 60 मिनट तक बंद रखा गया। टीम में एनिस्थिसिया से प्रो. एसके माथुर के साथ ही कार्डियोथोरैसिक सर्जरी, कार्डियक एनिस्थिसिया, नर्सिंग, परफ्यूशनिष्ठ और पैरामेडिकल के लगभग 20 सदस्य शामिल थे।
Trending Videos
इमरजेंसी का कायाकल्प करने की कवायद
ऑपरेशन के बाद मरीज
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल की इमरजेंसी का कायाकल्प किया जा रहा है। नई बिल्डिंग के चारों वार्ड के एसी बदलने के साथ ही स्ट्रेचर आदि दुरुस्त कराए जा रहे हैं।
इसके लिए फिलहाल भूतल के सभी मरीजों को तीसरे तल पर शिफ्ट किया गया है। इसके अलावा पुराने भवन की इमरजेंसी भी शुरू करा दी गई है।
अस्पताल में 100 बेड की इमरजेंसी है।
इसमें 60 बेड नई बिल्डिंग, जबकि पुरानी इमरजेंसी में 40 बेड है। पिछले साल एसी ब्लास्ट होने से 40 बेड वाली इमरजेंसी बंद थी, अब उसे भी शुरू करा दिया गया है। यहां भी एसी लगवाई जा रही है।
इसके अलावा नई बिल्डिंग में बने सभी चारों वार्डों में केंद्रीयकृत एसी लगवाने, जमीन पर मार्बल लगवाए जा रहे हैं। इमरजेंसी प्रभारी डॉ. कुंदन कुमार ने बताया कि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जा रही हैं।
इसके लिए फिलहाल भूतल के सभी मरीजों को तीसरे तल पर शिफ्ट किया गया है। इसके अलावा पुराने भवन की इमरजेंसी भी शुरू करा दी गई है।
अस्पताल में 100 बेड की इमरजेंसी है।
इसमें 60 बेड नई बिल्डिंग, जबकि पुरानी इमरजेंसी में 40 बेड है। पिछले साल एसी ब्लास्ट होने से 40 बेड वाली इमरजेंसी बंद थी, अब उसे भी शुरू करा दिया गया है। यहां भी एसी लगवाई जा रही है।
इसके अलावा नई बिल्डिंग में बने सभी चारों वार्डों में केंद्रीयकृत एसी लगवाने, जमीन पर मार्बल लगवाए जा रहे हैं। इमरजेंसी प्रभारी डॉ. कुंदन कुमार ने बताया कि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जा रही हैं।