व्यवस्था बेपटरी: बीएचयू अस्पताल के ओपीडी में टोकन सिस्टम धड़ाम, मरीज और परिजन परेशान
बीएचयू अस्पताल की ओपीडी में व्यवस्था बेपटरी हो गई है। दूरदराज से आए मरीजों का मर्ज यहां पर पहुंचने पर कम होने की बजाय और बढ़ जा रहा है
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बीएचयू अस्पताल की ओपीडी में व्यवस्था बेपटरी हो गई है। दूरदराज से आए मरीजों का मर्ज यहां पर पहुंचने पर कम होने की बजाय और बढ़ जा रहा है। पर्चा कटाकर ओपीडी में डॉक्टर के कमरे के गेट पर नंबर लगाने के बाद मरीजों को सुबह से शाम हो जा रही है।
अव्यवस्था का आलम ये है कि उनको पता ही नहीं चल पा रहा है कि आखिर उनका नंबर कब आएगा। इसको लेकर कई बार परिजन हंगामा भी करते हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
बीएचयू अस्पताल की ओपीडी में करोड़ों रुपये खर्च कर मरीजों की सुविधाओं के लिए टीवी स्क्रीन, माइक सिस्टम, डिस्प्ले बोर्ड और मरीजों को जानकारी देने के लिए काउंटर बनाए गए हैं।
लेकिन स्थिति ये है कि अधिकतर ओपीडी में ये सारे सिस्टम फेल हैं और देखने वाला कोई नहीं है। यहां पर इलाज के लिए पूर्वी यूपी के जिलों के साथ ही बिहार, झारखंड आदि जगहों के मरीज रोजाना अच्छे इलाज की उम्मीद में आते हैं। मंगलवार को न्यूरोलॉजी विभाग, आंकोलॉजी, हृदय रोग आदि विभागों की ओपीडी के गेट पर भीड़ लगी रही। मरीजों को अपने नंबर की सही जानकारी नहीं होने से परेशान होना पड़ रहा था।
ओपीडी गेट पर मरीजों को खड़ा होना मजबूरी
बीएचयू अस्पताल की ओपीडी गेट पर मरीजों की जिस तरह से भीड़ हो रही है, उसकी तुलना में यहां व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। हालत यह है कि पंजीकरण के बाद ओपीडी के गेट पर मरीज केवल इसीलिए खड़े रहते हैं कि उन्हें कोई सही जानकारी नहीं मिल पाती है। यहां तक कि गेट पर खड़े कर्मचारी भी मरीजों के नंबर कब आएंगे, इसकी जानकारी देने में असहज से लगते हैं।
सर्जिकल ऑकोलॉजी विभाग में डॉक्टर को दिखाने आई एक महिला मरीज ने बताया कि यहां गेट पर टीवी स्क्रीन लगा तो हैं लेकिन बंद होने के कारण कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। गंगापुर निवासी मरीज के परिजन ने बताया कि यहां तक कि काउंटर पर तैनात कर्मचारी भी पूछने पर भड़क जाते हैं।
अस्पताल परिसर में जाम में फंसी रही एंबुलेंस
बीएचयू अस्पताल परिसर में मंगलवार को दोपहर में भीषण जाम लगा रहा। हालत यह रही कि बाल रोग विभाग के सामने से लेकर साइकिल स्टैंड तक लगे जाम में कई एंबुलेंस भी फंसी रही। एंबुलेंस चालक बार-बार उतरकर जाम से गाड़ी निकालने का प्रयास भी करते रहे, लेकिन जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो जाकर बैठ गए। सुरक्षा के लिहाज से जिन सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी यहां लगाई गई थी, वह भी नदारद दिखे। इस तरह की अव्यवस्था यहां पर आए दिन देखने को मिलती हैं।