बीएचयू: 100 साल में पहली बार दीक्षांत से पहले ही 332 टॉपर्स को अवॉर्ड, 173 यूजी और 159 पीजी को सम्मान
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह से पहले ही तीन साै से ज्यादा छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में पहला एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड भी बांटा गया। कुलपति ने विद्यार्थियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की अपील की।
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बीएचयू के 100 साल के इतिहास में पहली बार दीक्षांत से पहले ही 332 टॉपर्स को सम्मानित किया गया। शुक्रवार को 173 स्नातक और 159 स्नातकोत्तर को पहला एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड दिया गया। अगले साल से 500 से ज्यादा छात्र और छात्राओं को मिलेगा।
सेमेस्टर परीक्षा में साढ़े आठ या उससे ज्यादा सीजीपीए पाने वाले को स्वतंत्रता भवन में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और अन्य अधिकारियों ने सम्मानित किया। इस बीच दोपहर दो बजे के बाद बीएचयू की कक्षाएं बंद कर दी गई थीं। पहला पुरस्कार पाने पर 25 हजार, दूसरे पर 20 हजार और तीसरे पुरस्कार में 15 हजार रुपये दिए गए। पुरस्कार पाने वालों में सबसे अधिक ज्यादा कला संकाय के 92, विज्ञान संस्थान के 78 और कृषि संकाय एवं संस्कृत विद्या धर्मं विज्ञान के 29-29 विद्यार्थी शामिल रहे।
हर एक कोर्स में पुरस्कारों की गिनती विद्यार्थियों की संख्या पर आधारित थी। जहां 100 से ज्यादा विद्यार्थी हैं, वहां तीन पुरस्कार दिए गए। 50 से 100 विद्यार्थी वाले कोर्स में दो और 50 से कम विद्यार्थी वाले कोर्स में एक पुरस्कार दिया गया। दर्शक दीर्घा में बैठे विद्यार्थियों से कुलपति ने कहा कि इनसे प्रतिस्पर्धा कीजिये, इन्हें चुनौती दीजिये और कौन जानता है, अगले वर्ष तीनों पुरस्कार विजेताओं का पूरा समूह ही बदल जाए।
अपर परीक्षा नियंता प्रो. जीपी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के 100 वर्षो से ज्यादा की परंपरा में पहली बार ऐसा रहा कि अध्ययनरत छात्रों को उनके स्कोर के आधार पर सम्मानित किया गया। इस दाैरान कुलसचिव राजन श्रीवास्तव, छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह सहित सभी संस्थानों के निदेशक, डीन और विभागाध्यक्ष रहे। हालांकि, इस बीच बीएचयू के परीक्षा नियंत्रक दर्शक दीर्घा में बैठे नजर आए, जिसको लेकर कई छात्रों ने सवाल भी खड़े किए
कैंपस जाने से पहले ही सम्मानित हुए तो मिलेगी प्रेरणा
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि शैक्षणिक उपलब्धियों को विश्वविद्यालय के कैलेंडर के केंद्र में रखने के लिए इन पुरस्कारों की शुरुआत की गई है। कहा कि हमारे विश्वविद्यालय के कैलेंडर में एक ऐसा दिन शामिल करने की जरूरत थी, जो उस मुख्य उद्देश्य का उत्सव मनाए जिसके लिए कोई विश्वविद्यालय अस्तित्व में होता है। आगे कहा कि इन विद्यार्थियों को हम तब सम्मानित कर रहे हैं जब वे हमारे परिसर में हैं, न कि उनके यहां से चले जाने के बाद। मेधा का सम्मान तब होना चाहिए जब वह दूसरों को सबसे अधिक प्रेरणा दे सके।