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Varanasi News: बीएचयू ने चंदौली में अमलतास की पत्तियों पर खोजा फंगस का नया वंश
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बीएचयू के वनस्पति विभाग के वैज्ञानिकों ने पौधों में बीमारी फैलाने वाले फंगस के एक नए वंश (जीनस) हायलोकमलोमाइसीज की खोज की है। यह शोध शुक्रवार को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल माइकोलॉजिकल प्रोग्रेस में प्रकाशित हुआ है।
नए फंगस की पहचान चंदौली स्थित चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य में अमलतास (कैसिया फिस्टुला) की पत्तियों पर दिखने वाले लीफ स्पॉट रोग के अध्ययन के दौरान हुई। वैज्ञानिकों ने सूक्ष्म संरचना, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और आधुनिक डीएनए एनालिसिस जैसी तकनीकों से इसकी जांच की। जांच में पता चला कि यह पहले से ज्ञात किसी भी फंगस से अलग है। इस शोध का नेतृत्व बीएचयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि इस वंश का नाम हायलोकमलोमाइसीज इसलिए रखा गया क्योंकि इसमें हायलो फंगस की पारदर्शी संरचना नजर आती है। दर्शाता है, जबकि कमलोमाइसीज नाम प्रख्यात माइकोलॉजिस्ट प्रो. कमल के सम्मान में रखा गया है।
औषधीय है ये पौधा
डॉ. राघवेंद्र ने बताया कि जिस पौधे पर ये पहचाना गया वह अमलतास एक अहम औषधीय पौधा है। इसकी बीमारियों का अध्ययन भविष्य में पौध संरक्षण के लिए उपयोगी होगा। भारत फंगस जैव-विविधता को लिहाज से दुनिया के प्रमुख देशों में है। ऐसे नए फंगस की खोज से कृषि, जैव प्रौद्योगिकी और नई दवाओं के विकास के क्षेत्र में भविष्य में महत्वपूर्ण संभावनाएं खुल सकती हैं।
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शोध टीम में केरल और चीन के भी वैज्ञानिक
शोध टीम में सौम्यदीप राजवार, संजय यादव, संजीत कुमार वर्मा और अर्चना सिंह शामिल रहे। इसके अलावा पुणे, गोरखपुर, केरल और चीन के वैज्ञानिकों ने भी अध्ययन में सहयोग किया।
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नए फंगस की पहचान चंदौली स्थित चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य में अमलतास (कैसिया फिस्टुला) की पत्तियों पर दिखने वाले लीफ स्पॉट रोग के अध्ययन के दौरान हुई। वैज्ञानिकों ने सूक्ष्म संरचना, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और आधुनिक डीएनए एनालिसिस जैसी तकनीकों से इसकी जांच की। जांच में पता चला कि यह पहले से ज्ञात किसी भी फंगस से अलग है। इस शोध का नेतृत्व बीएचयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि इस वंश का नाम हायलोकमलोमाइसीज इसलिए रखा गया क्योंकि इसमें हायलो फंगस की पारदर्शी संरचना नजर आती है। दर्शाता है, जबकि कमलोमाइसीज नाम प्रख्यात माइकोलॉजिस्ट प्रो. कमल के सम्मान में रखा गया है।
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औषधीय है ये पौधा
डॉ. राघवेंद्र ने बताया कि जिस पौधे पर ये पहचाना गया वह अमलतास एक अहम औषधीय पौधा है। इसकी बीमारियों का अध्ययन भविष्य में पौध संरक्षण के लिए उपयोगी होगा। भारत फंगस जैव-विविधता को लिहाज से दुनिया के प्रमुख देशों में है। ऐसे नए फंगस की खोज से कृषि, जैव प्रौद्योगिकी और नई दवाओं के विकास के क्षेत्र में भविष्य में महत्वपूर्ण संभावनाएं खुल सकती हैं।
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शोध टीम में केरल और चीन के भी वैज्ञानिक
शोध टीम में सौम्यदीप राजवार, संजय यादव, संजीत कुमार वर्मा और अर्चना सिंह शामिल रहे। इसके अलावा पुणे, गोरखपुर, केरल और चीन के वैज्ञानिकों ने भी अध्ययन में सहयोग किया।