BHU: बीएचयू ने बनाया महामारी कवच का सूत्र, ज्यादा सीटी वैल्यू ही बचाएगी जान; 53,485 लोगों पर रिसर्च
Varanasi News: बीएचयू ने महामारी कवच का सूत्र बनाया। बीएचयू ने मणिपाल विवि के साथ मिलकर 53,485 लोगों पर संयुक्त शोध किया।
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बीएचयू ने महामारी कवच का सूत्र सीटी वैल्यू बनाया है जो कि लोगों की जान बचाएगा। महामारी कब फैलेगी और इससे प्रभावित होने वाले लोग किस उम्र के होंगे, इसका गणित पहले ही लगाया जा सकता है। बीएचयू ने मणिपाल विवि के साथ मिलकर संयुक्त शोध किया। टीम ने कोविड पॉजिटिव 53,485 लोगों में वायरल लोड का पता लगाया।
कोविड जांच की प्रक्रिया आरटी-पीसीआर तकनीक में साइकिल थ्रेशोल्ड (सीटी) वैल्यू निकाला। फिर किसी संक्रमित व्यक्ति में वैरिएंट और वायरस की मात्रा का पता लगाया। सीटी वैल्यू की नियमित मॉनिटरिंग से संक्रमण की शुरुआत में ही बचाव के बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
अध्ययन कहता है कि कोविड की दूसरी लहर में कम सीटी वाले 59 फीसदी मामले थे। इसी में सबसे ज्यादा मौतें हुईं। जबकि पहले में 57.4 फीसदी और दूसरे में 56.5 फीसदी लोगों की सीटी वैल्यू कम थी।
अध्ययन के प्रमुख लेखक रुद्र कुमार पांडे और प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे का कहना है कि सीटी वैल्यू सिर्फ जांच का माध्यम नहीं, बल्कि महामारी की निगरानी का मजबूत हथियार है। मणिपाल विवि के प्रो. प्रशांत सुरावझला ने कहा कि यह अध्ययन महामारियों के लिए अहम सबक देता है। बीएचयू से इस शोध में प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, वंदना और शैलेश देसाई शामिल थे।
पहली लहर में वायरल लोड सबसे कम
इस शोध में बताया गया है कि कोविड की पहली लहर में वायरल लोड सबसे कम रहा। महिलाओं और बुजुर्गों में वायरल लोड पुरुषों और बच्चों की तुलना में ज्यादा पाया गया, जो उन्हें ज्यादा जोखिम में डाल रहा था। वायरल लोड जितना ज्यादा होगा, उसकी सीटी वैल्यू उतनी ही कम होगी, लेकिन बीमारी घातक होगी।
40 से कम सीटी वैल्यू वाला रहा कोविड पॉजिटिव
40 से कम सीटी वैल्यू को पॉजिटिव माना जाता है। शोधकर्ताओं ने डेटा से उम्र, लिंग, जांच की तारीख और सीटी वैल्यू जैसी जानकारियां लीं। अध्ययन का उद्देश्य था सीटी वैल्यू के माध्यम से वायरल लोड, बीमारी की गंभीरता और फैलाव के बीच संबंध समझना। शोध में सीटी वैल्यू को तीन भागों में बांटा गया- कम (25 से ज्यादा वायरल लोड), मध्यम (25-30) और ज्यादा (30 से ज्यादा वायरल लोड)।
कम सीटी वैल्यू ज्यादा गंभीर प्रकोप का संकेत
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अध्ययन के प्रमुख लेखक रुद्र कुमार पांडे और प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे का कहना है कि सीटी वैल्यू सिर्फ जांच का माध्यम नहीं, बल्कि महामारी की निगरानी का मजबूत हथियार है। यह वायरल लोड, फैलाव और गंभीरता का अनुमान लगाने में मदद करता है। मणिपाल विश्वविद्यालय के प्रो. प्रशांत सुरावझला ने कहा कि यह अध्ययन भविष्य की महामारियों के लिए अहम सबक देता है।