BHU: छोटे शहरों के बड़े धर्मस्थलों पर पर्यटन बढ़ाने के लिए कोर्स, यूरोपीय संघ ने बनाया प्रोजेक्ट; जानें खास
Varanasi News: बीएचयू के शोधकर्ता यूरोपीय शिक्षण के अध्ययन मानकों और रिसर्च पद्धतियों के साथ मिलजुलकर काम करेंगे। छात्र–शिक्षक अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण, टीचर एक्सचेंज और संयुक्त शोध के साथ ही भागीदार संस्थानों की डिजिटल शिक्षा अवसंरचना को मजबूत किया जाएगा।
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छोटे शहरों के बड़े धर्मस्थलों पर पर्यटन बढ़ाने के लिए बीएचयू की ओर से पढ़ाई कराई जाएगी। अब स्थानीय विकास में धार्मिक यात्राओं के योगदान पर कोर्स चलाएगा। साथ ही कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एकेडमिक कार्यक्रम भी किए जाएंगे। दुनिया भर के 16 देशों के संस्थान एक साथ मिलकर धर्म आधारित पर्यटन पर रिसर्च करेंगे।
इसके फोकस में भारत और खासकर यूपी में काशी, मथुरा, अयोध्या और प्रयाग के बाद मीरजापुर, चित्रकूट और सीतामढ़ी जैसे दैवीय स्थान होंगे। यहां पर भी शोधार्थी, सैलानी और पर्यटक जाएंगे।
यूरोपीय यूनियन ने बीएचयू को आठ करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट दिया है। धर्म स्थलों पर बढ़े पर्यटकों का प्रबंधन किया जाएगा।
धार्मिक पर्यटन के लिए युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी। धार्मिक पर्यटन विषय पर समकालीन और समावेशी कोर्स चलाए खुलेंगे। चार अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशालाएं और चार स्टडी विजिट आयोजित की जाएंगी। बीएचयू के अलावा अल्बानिया, मोल्दोवा, दक्षिण अफ्रीका में प्रशिक्षण कार्यशाला होगी। वहीं स्लोवेनिया, स्पेन, माल्टा, ग्रीस में स्टडी विजिट होगी।
बीएचयू के डॉ. प्रवीन राणा इस प्रोजेक्ट के प्रमुख
नए कोर्स और सतत विकास के लिए एक स्थाई दृष्टिकोण बढ़ाने के लिए बीएचयू के कला संकाय में पर्यटन प्रबंधन डॉ. प्रवीन राणा इस प्रोजेक्ट के प्रमुख हैं। उनके साथ डॉ. शायजू , प्रो. ज्योति रोहिल्ला और डॉ. प्रियंका सिंह भी काम करेंगी। परियोजना की प्रशासनिक और वित्तीय देखरेख स्पॉसर्ड रिसर्च एंड इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी सेल की ओर से की जाएगी।
कर्नाटक विश्वविद्यालय भी सहयोगी
इस प्रोजेक्ट का नाम है- सेक्रेड ट्रवेल्स फॉर ग्रोथ : हायर एजुकेशन एंड सस्टनेबल ग्रोथ थ्रू रिलीजियस टूरिज्म यानी कि विकास के लिए धार्मिक यात्राएं: धार्मिक पर्यटन के माध्यम से उच्च शिक्षा और सतत विकास। बीएचयू के साथ ही कर्नाटक विश्वविद्यालय भी इस प्रोजेक्ट में सहयोगी के तौर पर रहेगा।
90% पर्यटक बड़े शहरों के धर्मस्थलों पर जा रहे
डॉ. राणा ने बताया कि प्रोजेक्ट से पहले एक शोध से पता चला कि 90 फीसदी पर्यटक बड़े महानगरों में ही सीमित होते जा रहें है और आसपास के छोटे शहरों के दैवीय स्थानों पर पर्यटकों की आवाजाही काफी कम है। इस साल सितंबर तक यूपी में 120 करोड़ पर्यटक आ चुके हैं। इसमें से 67 फीसदी लोग सिर्फ आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा और अयोध्या में आए।
वहीं मीरजापुर और चित्रकूट जैसे शहरों में 10 फीसदी से भी कम पर्यटक आए। बड़े शहरों में पर्यटकों बहुत दबाव बढ़ रहा है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से उन स्थानों के स्थलों का विकास ऐसे किया जाएगा कि वहां पर भी पर्यटक पहुंचे और स्थानीय लोगों का आर्थिक लाभ हो।