BHU: जलवायु परिवर्तन साझा चुनौती, सामूहिक प्रयास से ही समाधान; अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
Varanasi News: कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि अनुसंधान, नीति के बजाय प्रमाण-आधारित आंकड़ों पर आधारित होने चाहिए। अंतःविषय सहयोग व अकादमिक सीमाओं से अलग स्थायी साझेदारियों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
विस्तार
बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जलवायु अनुकूल कृषि विषय पर विमर्श हुआ। अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान हैदराबाद के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक साझा चुनौती है। इसके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है।
कृषि विज्ञान संस्थान के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग की ओर से सतत विकास के लिए जलवायु अनुकूल कृषि: नवाचार और समाधान विषयक सम्मेलन में डॉ. हिमांशु ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव उन गरीब समुदायों पर पड़ रहा है, जिनका इसमें सबसे कम योगदान है। यह खाद्य सुरक्षा, आजीविका और संसाधनों के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने पांच ‘आर’ को महत्वपूर्ण बताया। इसमें रेजिस्टेंस, रिकवरी, रिबाउंडिंग, रीजेनेरेशन और रॉबस्टनेस की अवधारणा भी बताई।
हुई विस्तृत चर्चा
विशिष्ट अतिथि रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के कुलाधिपति प्रो. पंजाब सिंह ने कृषि क्षेत्र के समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियों में उत्पादन वृद्धि एवं स्थायित्व, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, संसाधन उपयोग दक्षता, कृषि लाभ प्रदता आदि की चर्चा की और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की बात कही।
डॉ. राम बदन सिंह ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीकों के समन्वय की बात कही। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह, प्रो.उदय प्रताप सिंह, प्रो. श्रवण कुमार सिंह ने जलवायु-अनुकूल किस्मों के विकास, जैव विविधता संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन अपने विचार रखे।