BHU: पर्यटन-आतिथ्य अध्ययन केंद्र को मिली मंजूरी, संचालित होंगे यूजी-पीजी, पीएचडी, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स
बीएचयू में पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र की स्थापना को मंजूरी मिल गई है। केंद्र में यूजी, पीजी, पीएचडी, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स संचालित होंगे। इसके माध्यम से काशी को तीर्थ और पर्यटन अध्ययन की प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया जाएगा तथा पर्यटन क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किए जाएंगे।
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काशी अब विश्व स्तर पर तीर्थ-पर्यटन विद्या की प्रयोगशाला बनने जा रही है। बीएचयू में पर्यटन और आतिथ्य अध्ययन केंद्र की स्थापना को मंजूरी दे दी गई है। इस केंद्र में स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स चलाए जाएंगे, जिसमें विश्व भर के विद्यार्थी पढ़ाई और रिसर्च करने के लिए आएंगे। इस केंद्र में पढ़ाई करने वालों के लिए काशी अपने आप में एक प्रयोगशाला और कार्यशाला दोनों होगी। बीएचयू में कक्षाएं होंगी। मंदिर-घाट और सारनाथ उनकी प्रैक्टिकल लैब होंगे।
विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद और कार्यकारिणी परिषद की स्वीकृति के बाद केंद्र अब काम करेगा। यह केंद्र पर्यटन और ऑफिस मैनेजमेंट के सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों को एक साथ जोड़ेगा।
केंद्र शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, परामर्श और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इसका समन्वयक कला संकाय के डॉ. राणा प्रवीन को बनाया गया है। बता दें कि पर्यटन जीडीपी में लगभग 10 फीसदी का योगदान देता है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बाद हर वर्ष लगभग 10 करोड़ पर्यटक आ रहे हैं।
कई विषयों वाले कोर्स और सिलेबस होंगे तैयार
यह केंद्र पर्यटन शिक्षा और अनुसंधान के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित होगा। इसके तहत कई विषयों वाले कोर्स और सिलेबस तैयार किए जाएंगे। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से सहयोग मिलेगा। उद्योगों और सरकारी संस्थाओं के साथ साझेदारी बढ़ेगी। कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने बताया कि पर्यटन प्रबंध के सभी कोर्स अब इस केंद्र से संचालित होंगे। केंद्र में पांच स्थायी प्रोफेसर हैं और दो खाली पदों पर नियुक्तियां भी होंगी।
मंदिर अर्थव्यवस्था और तीर्थयात्रा पर रिसर्च होगा
बीएचयू का यह केंद्र तीर्थयात्रा, धार्मिक विरासत और मंदिर अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर अनुसंधान करेगा। राज्य सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से नीति-आधारित अनुसंधान करेगा। केंद्र के शिक्षकों ने स्वयं पोर्टल पर ऑनलाइन कोर्स विकसित किए हैं। यह यूरोपीय संघ की ओर से वित्तपोषित प्रतिष्ठित इरास्मस+ प्रोजेक्ट सेक्रेड ट्रैवल एंड रिलीजियस टूरिज्म का संचालन कर रहा है। इस परियोजना से यूरोप और एशिया के विश्वविद्यालयों के साथ संयुक्त अनुसंधान और छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिल रहा है।