Phd in BHU : 10 फरवरी को कॉल लेटर, इस तारीख से हो सकते हैं इंटरव्यू; दो महीने में पूरी होगी प्रवेश प्रक्रिया
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में पीएचडी को लेकर अभ्यर्थी कई दिनों से इंतजार कर रहे थे। इसकी तैयारियां भी कर रही हैं। इस बार प्रवेश प्रक्रिया पूरे दो महीने तक चलेगी।
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बीएचयू में 17 से 20 फरवरी के बीच पीएचडी प्रवेश के लिए इंटरव्यू शुरू हो जाएगा। पूरे मार्च तक इंटरव्यू चलेंगे। 10 फरवरी को इंटरव्यू का कॉल लेटर जारी हो जाएगा।
पोर्टल पर कॉल लेटर डाउनलोड करने का लिंक उसी दिन मिलेगा। प्रवेश प्रक्रिया पूरे दो महीने तक चलेगी। परीक्षा नियंता कार्यालय में चली लंबी बैठक के बाद फैसला लिया गया है। बीएचयू के सभी 140 विभागों में एक साथ इंटरव्यू शुरू हो जाएंगे।
एप्लीकेशन फॉर्म भरे सभी अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए कॉल लेटर मिलेगा। कुल 9 हजार से ज्यादा आवेदन आए हैं तो ऐसे में इंटरव्यू की प्रक्रिया अप्रैल तक पूरी हो सकेगी। किसी कोर्स में एक हजार आवेदन किसी में 10-20। ऐसे में किसी विभाग में 30 दिन में ही एक हजार आवेदकों का इंटरव्यू करना पड़े तो रोज 30 छात्रों को साक्षात्कार देना होगा।
10 फरवरी से भेजी जाएगी चिट्ठी
10 फरवरी से बीएचयू के सभी विभागों द्वारा आवेदकों को चिट्ठी भेजी जाएगी। एक सप्ताह टिकट कराकर बीएचयू आने का समय दिया जाएगा। फिर 30-40 दिनों तक इंटरव्यू होगा। रिजल्ट बनने में 15 दिन लगेगा। इतना सब होने में अप्रैल महीना हो जाएगा। 15 अप्रैल के बाद ही रिजल्ट जारी होगा और 30 तक विभागों में रिपोर्टिंग टाइम तय की जाएगी।
बीएचयू ने बीच में बदला नियम
1540 सीटों पर पीएचडी में प्रवेश होने हैं। पहले नियम था कि एक सीट पर 10 आवेदकों को इंटरव्यू के लिए कॉल लेटर जारी होगा। लेकिन पीएचडी बुलेटिन जारी होने के बाद बीएचयू ने नियम बदलकर हर एक आवेदक को इंटरव्यू के लिए योग्य माना। कई विभागों में सीट से 100 गुना ज्यादा आवेदन आ गए हैं, ऐसे में इंटरव्यू कराने में समय लगेगा।
बायोचार से खारे पानी में हो सकती है अच्छी खेती
बीएचयू में पर्यावरण पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन वैज्ञानिकों ने खारे वाली जगहों पर अच्छी खेती और फसल वृद्धि की तरकीब सुझाई। जायेद विश्वविद्यालय, यूएई के वैज्ञानिक डॉ. मुनव्वर अली खान ने कहा कि बायोचार और पौधों की उम्र तेजी से बढ़ाने वाले बैक्टीरिया का इस्तेमाल करना चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी ऑफ सनशाइन कोस्ट में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजीव कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बदलती जलवायु स्थितियां लंबे समय तक सूखे की अवधि और बारिश का अनियमित पैटर्न को बढ़ा रहे हैं। माता वैष्णो देवी विवि के प्रो. विनीत वीर त्यागी ने कहा कि सोलर एनर्जी को रिजर्व कर वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट और खारे पानी से नमक बनाने का काम न रुके।