BHU Admission 2025: पीजी में चार राउंड की काउंसिलिंग के बाद भी 400 सीटें खाली, जानें- क्या है बड़ी वजह
Varanasi News: बीएचयू में पीजी में दाखिले के लिए चार राउंड की काउंसिलिंग हुई, इसके बाद भी 400 सीटें खाली रह गई हैं। 90 फीसदी से ज्यादा सीटें पारंपरिक कोर्स में भरी हैं।
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बीएचयू में प्रोफेशनल और वोकेशनल के मुकाबले पारंपरिक कोर्स का क्रेज ज्यादा दिख रहा है। सत्र 2025-26 सत्र में चार राउंड में सीट आवंटन के बावजूद स्नातकोत्तर पीजी के प्रोफेशनल कोर्स में 400 से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं, जबकि पारंपरिक कोर्स में 90 फीसदी से ज्यादा भर चुकी हैं। इनके हर कोर्स में 5 से 15 सीटें बची हैं, वहीं 25 से ज्यादा ऐसे कोर्स हैं, जिनमें प्रवेश के लिए एक भी सीट नहीं खाली है।
प्रोफेशनल कोर्स में फैशन टेक्नोलॉजी, हेरिटेज मैनेजमेंट, टूरिज्म एंड ट्रेवल मैनेजमेंट जैसे विषयों में 40 से लेकर 50 तक सीटें खाली रह गई हैं। वहीं, भाषाओं में सबसे ज्यादा नेपाली में 58 सीटें बचीं हैं। प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई साउथ कैंपस में होती है। मेन कैंपस से करीब 70 किमी दूर मिर्जापुर के बरकछा परिसर में पढ़ाई के लिए ज्यादातर छात्र और उनसे ज्यादा छात्राएं जाना नहीं चाहतीं है।
खाली सीटों वाले कोर्स
- फैशन प्रौद्योगिकी और परिधान डिजाइन में मास्टर ऑफ वोकेशन - 50
- मास्टर इन वोकेशन इन हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म मैनेजमेंट - 47
- मास्टर इन हेरिटेज मैनेजमेंट - 45
- मास्टर ऑफ साइंस इन एनवार्यमेंट साइंस - 42
- मास्टर इन वोकेशन इन रिटेल एंड लॉजिस्टिक मैनेजमेंट 42
- टूरिज्म एंड ट्रवेल मैनेजमेंट में पीजी- 42
- फूड प्रोसेसिंग एंड मैनेजमेंट में पीजी- 40
- मेडिकल लैबोरेट्री एंड टेक्नोलॉजी में मास्टर 40
- आर्काइवल स्टडीज एंड मैनेजमेंट - 39
- एमसीए - 30
मेन कैंपस से दूरी या सीयूईटी के बाद कम हुई सीट
प्रोफेशनल कोर्स की फीस ट्रेडिशनल से 5 से 10 गुना ज्यादा हैं। कई कोर्स की फीस 65 हजार रुपये सालाना या इससे भी ज्यादा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्र प्रवेश नहीं ले पाते हैं। हालांकि कई प्राइवेट कॉलेजों में इससे ज्यादा फीस होने पर भी सीटें खाली नहीं रहती हैं। बीएचयू में बीवोक कोर्स संस्थापक समन्वयक प्रो. आरएस मिश्रा ने बताया कि बीवोक के छह कोर्स में पहले 1200 छात्र थे, अब उसके आधे छात्र भी नहीं आ रहे हैं। वोकेशनल कोर्स मिर्जापुर के बरकछा स्थित साउथ कैंपस में चलते हैं जो कि मेन कैंपस से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर है। दूसरी वजह इन कोर्स में अवेयरनेस की कमी है।