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बीएचयू का 100वां दीक्षांत समारोह, मेडल मिलते ही मेधावियों के चेहरे पर चमकी सोने सी आभा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 22 Nov 2018 09:17 PM IST
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100वां दीक्षा समारोह
- फोटो : अमर उजाला
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के 100वें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को स्वर्ण पदक हासिल करने वाले हर मेधावी का चेहरा सोने की चमक और खुशियों से दमक उठा। शिक्षा सत्र 2017 और 2018 का दीक्षांत समारोह एक साथ आयोजित किया गया। बीएचयू जैसे शैक्षणिक संस्थान से न सिर्फ उपाधि हासिल करना बल्कि अपनी मेहनत और लगन की बदौलत गोल्ड मेडल हासिल करना, उनके लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा था।
मन में खुशियों का समंदर इस बात पर भी उमड़ा क्योंकि उनकी इस मेहनत से उनके मां-पिता गौरवान्वित थे। अपने बच्चों की सफलता से उनका सिर भी गौरव से ऊंचा और सीना चौड़ा हुआ जा रहा था। बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित 100वें दीक्षांत समारोह में 57 मेधावियों को मुख्य अतिथि मुख्य अतिथि वैज्ञानिक प्रो. रघुनाथ अनंत मशेलकर के हाथों गोल्ड मेडल से नवाजा गया।
2017 में दीक्षांत समारोह न होने की वजह से इस साल 2017 और 2018 दोनों साल का एक साथ समारोह आयोजित किया गया। कुलगीत के बाद शुरू समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. मेशलकर ने मेधावियों को बधाई देते हुए कहा कि किसी भी छात्र के जीवन में दीक्षांत समारोह विशिष्ट मायने रखता है।
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पदक को जीवन का सर्वश्रेष्ठ उपहार बताते हुए मशेलकर ने सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कहा कि दुनिया में न केवल परिवर्तन बल्कि परिवर्तन की तेज गति भी अद्भुत है। ऐसे में आजीवन सीखते रहने की जरूरत है। जब तक गलतियों से सीखेंगे नहीं तब तक सफलता पाना मुश्किल होगा। 2017 में 31 और 2018 में 26 मेधावियों को पदक मिला।
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मन में खुशियों का समंदर इस बात पर भी उमड़ा क्योंकि उनकी इस मेहनत से उनके मां-पिता गौरवान्वित थे। अपने बच्चों की सफलता से उनका सिर भी गौरव से ऊंचा और सीना चौड़ा हुआ जा रहा था। बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित 100वें दीक्षांत समारोह में 57 मेधावियों को मुख्य अतिथि मुख्य अतिथि वैज्ञानिक प्रो. रघुनाथ अनंत मशेलकर के हाथों गोल्ड मेडल से नवाजा गया।
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2017 में दीक्षांत समारोह न होने की वजह से इस साल 2017 और 2018 दोनों साल का एक साथ समारोह आयोजित किया गया। कुलगीत के बाद शुरू समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. मेशलकर ने मेधावियों को बधाई देते हुए कहा कि किसी भी छात्र के जीवन में दीक्षांत समारोह विशिष्ट मायने रखता है।
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पदक को जीवन का सर्वश्रेष्ठ उपहार बताते हुए मशेलकर ने सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कहा कि दुनिया में न केवल परिवर्तन बल्कि परिवर्तन की तेज गति भी अद्भुत है। ऐसे में आजीवन सीखते रहने की जरूरत है। जब तक गलतियों से सीखेंगे नहीं तब तक सफलता पाना मुश्किल होगा। 2017 में 31 और 2018 में 26 मेधावियों को पदक मिला।
दिव्यांग छात्रा पंखुड़ी जैन को दूसरी बार पदक
दिव्यांग छात्रा पंखुड़ी जैन के लिए यह समारोह खास रहा। दूसरी बार दीक्षांत समारोह के मंच से पंखूड़ी को स्वर्ण पदक मिला। 2016 में शताब्दी वर्ष के समारोह में बीएससी मैथमेटिक्स में सर्वोच्च अंक पाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों भी पंखुड़ी को पदक मिल चुका है। इस साल एमएससी में भी पंखूड़ी ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया। सिगरा निवासी राकेश जैन की सुपुत्री पंखुड़ी इस समय आईआईटी बीएचयू में शोध कर रही हैं। वह आगे चलकर शिक्षक बनना चाहती है।
चार मेधावियों को मिले तीन-तीन पदक
दीक्षांत समारोह में चार मेधावियों को सर्वाधिक तीन-तीन पदक मिले। इसमें 2017 में स्नातक में शास्त्री आनर्स में सर्वाधिक अंक अर्जित करने वाले हरि नारायण पाठक, स्नातकोत्तर आचार्य वेद में ज्ञानेश उपाध्याय और 2018 में स्नातक में मंच कला संकाय से प्रशांत मिश्रा और स्नातकोत्तर में आचार्य वेद की छात्रा प्रांजलि मिश्रा को सर्वाधिक अंक अर्जित करने पर तीन-तीन पदक दिया गया। सभी को मुख्य अतिथि ने चांसलर मेडल, स्व. महाराजा विभूति नारायण सिंह स्वर्ण पदक और बीएचयू स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया।
हरिनारायण पाठक संस्कृत में आचार्य कर रहे हैं और आगे चलकर शिक्षक बनना चाहते हैं जबकि वर्तमान समय में शोध करने वाले ज्ञानेश का कहना है कि वह आगे चलकर मंत्र विज्ञान पर काम करना चाहते हैं। उधर प्रांजल मिश्रा शिक्षक बनकर सेवा करने का संकल्प लेकर शोध कर रहे हैं और प्रशांत मिश्र संगीत के क्षेत्र में आगे जाना चाहते हैं।
चार मेधावियों को मिले तीन-तीन पदक
दीक्षांत समारोह में चार मेधावियों को सर्वाधिक तीन-तीन पदक मिले। इसमें 2017 में स्नातक में शास्त्री आनर्स में सर्वाधिक अंक अर्जित करने वाले हरि नारायण पाठक, स्नातकोत्तर आचार्य वेद में ज्ञानेश उपाध्याय और 2018 में स्नातक में मंच कला संकाय से प्रशांत मिश्रा और स्नातकोत्तर में आचार्य वेद की छात्रा प्रांजलि मिश्रा को सर्वाधिक अंक अर्जित करने पर तीन-तीन पदक दिया गया। सभी को मुख्य अतिथि ने चांसलर मेडल, स्व. महाराजा विभूति नारायण सिंह स्वर्ण पदक और बीएचयू स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया।
हरिनारायण पाठक संस्कृत में आचार्य कर रहे हैं और आगे चलकर शिक्षक बनना चाहते हैं जबकि वर्तमान समय में शोध करने वाले ज्ञानेश का कहना है कि वह आगे चलकर मंत्र विज्ञान पर काम करना चाहते हैं। उधर प्रांजल मिश्रा शिक्षक बनकर सेवा करने का संकल्प लेकर शोध कर रहे हैं और प्रशांत मिश्र संगीत के क्षेत्र में आगे जाना चाहते हैं।
स्वतंत्रता भवन में नहीं दिखी महामना की प्रतिमा
स्वतंत्रता भवन में दीक्षांत समारोह के आयोजन के दौरान मंच के दोनों तरफ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की वो प्रतिमा नहीं दिखी जो यहां लगी रहती थी। पूर्वाभ्यास के दौरान ही कुलपति ने प्रतिमा पर गुलाब के मुरझाए फूलों की माला बना देख नाराजगी जताते हुए इसे बदले जाने को कहा था। इसके लिए उन्होंने अभियंता को फटकार भी लगाई थी। इसको लेकर समारोह में चर्चाएं होती रही।
बोले राजन-साजन मिश्र, अपने घर में सम्मान पाना गौरव
बीएचयू के दीक्षांत समारोह में डी लिट की मानद उपाधि पाने के बाद संगीतज्ञ पंडित राजन-साजन मिश्र ने कहा कि इस दिन को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। बाहर भले ही कई बार सम्मान हुआ हो लेकिन अपने घर (बनारस) में सम्मान पाना गौरव की बात है। बीएचयू द्वारा यह पहला अवसर है जब संगीत घराने को महत्व दिया गया है। बताया कि इसी संस्थान से शिक्षा ग्रहण की और आज सम्मान पाकर जो खुशी है, उसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। पंडित राजन मिश्र ने 1972 में एमए समाजशास्त्र और साजन मिश्र ने 1973 में बीए की शिक्षा ग्रहण की है।
बोले राजन-साजन मिश्र, अपने घर में सम्मान पाना गौरव
बीएचयू के दीक्षांत समारोह में डी लिट की मानद उपाधि पाने के बाद संगीतज्ञ पंडित राजन-साजन मिश्र ने कहा कि इस दिन को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। बाहर भले ही कई बार सम्मान हुआ हो लेकिन अपने घर (बनारस) में सम्मान पाना गौरव की बात है। बीएचयू द्वारा यह पहला अवसर है जब संगीत घराने को महत्व दिया गया है। बताया कि इसी संस्थान से शिक्षा ग्रहण की और आज सम्मान पाकर जो खुशी है, उसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। पंडित राजन मिश्र ने 1972 में एमए समाजशास्त्र और साजन मिश्र ने 1973 में बीए की शिक्षा ग्रहण की है।
मंच कला संकाय में पहली बार डीलिट की उपाधि
विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय से पहली बार डीलिट की उपाधि दी गई है। डॉ.मधुमिता भट्टाचार्य को यह उपाधि संकाय के पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में आयोजित समारोह में जाने माने शास्त्रीय गायक पंडित राजन-साजन मिश्र ने प्रदान किया। गायन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मधुमिता ने प्रो. ऋत्विक सान्याल के निर्देशन में डीलिट किया है। सम्मान पाकर जो खुशी है, उसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। पंडित राजन मिश्र ने 1972 में एमए समाजशास्त्र और साजन मिश्र ने 1973 में बीए की शिक्षा ग्रहण की है।
बीएचयू में दीक्षांत समारोह के मुख्य आयोजन के बाद विज्ञान संकाय, सामाजिक विज्ञान संकाय, कृषि विज्ञान संकाय सहित अन्य संकायों में आयोजित समारोह में भी मेधावियों को पदक, उपाधि वितरित किया गया। यहां विभाग स्तर और विषय में सर्वोच्च अंक पाने वाले छात्र-छात्रा पदक, उपाधि पाने के बाद खुश दिखे। पहले शिक्षकों का आशीर्वाद लिया फिर एक दूसरे से गले मिलकर बधाई दी। संकाय स्तर पर पदक, उपाधि वितरण का यह कार्यक्रम अभी 25 नवंबर तक चलता रहेगा। इसके लिए पहले ही छात्र-छात्राओं को उत्तरीय और साफा दिया जा चुका है।
बीएचयू में दीक्षांत समारोह के मुख्य आयोजन के बाद विज्ञान संकाय, सामाजिक विज्ञान संकाय, कृषि विज्ञान संकाय सहित अन्य संकायों में आयोजित समारोह में भी मेधावियों को पदक, उपाधि वितरित किया गया। यहां विभाग स्तर और विषय में सर्वोच्च अंक पाने वाले छात्र-छात्रा पदक, उपाधि पाने के बाद खुश दिखे। पहले शिक्षकों का आशीर्वाद लिया फिर एक दूसरे से गले मिलकर बधाई दी। संकाय स्तर पर पदक, उपाधि वितरण का यह कार्यक्रम अभी 25 नवंबर तक चलता रहेगा। इसके लिए पहले ही छात्र-छात्राओं को उत्तरीय और साफा दिया जा चुका है।