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भारत बंदः हिंसक प्रदर्शन के आरोपियों को छुड़ाने के लिए घेरा थाना, पुलिस ने दौड़ाया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Wed, 04 Apr 2018 12:52 AM IST
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पुलिस ने लाठी भांजकर उपद्रवियों को थाने से भगाया
- फोटो : अमर उजाला
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आजमगढ़ में सोमवार को भात बंद के दौरान हिंसक प्रदर्शन करने वाले एक महिला सहित 20 उपद्रवियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मंगलवार को उन्हें छुड़ाने के लिए ग्रामीणों ने थाने का घेराव कर दिया। थाने पर लोगों की बढ़ती भीड़ देखकर पुलिस ने लाठियां भांजकर इन्हें थाने से खदेड़ा।
साथ ही गिरफ्तार आरोपियों का चालान कर दिया। बता दें कि ये सभी आजमगढ़ के सगड़ी तहसील मुख्यालय और आस पास के क्षेत्रों से पकड़े गए थे। मंगलवार को गिरफ्तार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर पुलिस पूछताछ कर ही रही थी कि सुबह साढ़े सात बजे के करीब भारी संख्या में महिलाएं और पुरुषों ने थाने पहुंचकर घेराव कर लिया और आरोपियों को छोड़ने की जिद करने लगे।
पुलिस ने लाठी भांजकर लोगों दूर खदेड़ दिया। इस दौरान चोट लगने से कई लोग मामूली रूप से घायल हो गए। भीड़ खदेड़ने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों का चालान कर कर दिया।
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पढ़ेंः SC/ST एक्टः विरोध-प्रदर्शन की आग में तपा पूर्वांचल, आजमगढ़ में बसें फूंकी, देखें तस्वीरें
एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कुछ महिला और पुरुष थाने पहुंचकर आरोपियों को छोड़ने की जिद कर रहे थे। इन्हें थाने से हटा दिया गया। गिरफ्तार सभी आरोपियों का चालान कर दिया गया।
कोर्ट के फैसले से नाराज दलित संगठनों की ओर से सोमवार को सगड़ी तहसील मुख्यालय सहित क्षेत्र के अन्य बाजारों में किए गए हिंसक प्रदर्शन के दूसरे दिन मंगलवार को क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति रही।
पुलिस ने शांति बहाली के लिए क्षेत्र में रूट मार्च किया। साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। ज्यादातर आरोपी घर छोड़कर फरार हैं। मुख्य आरोपियों को पकड़ने के लिए उसका लोकेशन ली जा रही है।
सच्चाई सबको पता, पर साधी चुप्पी
सगड़ी बवाल के बाद कमिश्नर एसवीएस रंगाराव मंगलवार को जीयनपुर कोतवाली में जानकारी के लिए पहुंचे थे। उन्होंने बवाल की वीडियो देखने के साथ एसडीएम रविवंजन और सीओ सुधाकर सिह से मामले की जानकारी ली। एसडीएम और सीओ ने आपस में इस कमी पर चर्चा तो की, लेकिन कमिश्नर से खुल कर किसी ने कुछ नहीं कहा।
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साथ ही गिरफ्तार आरोपियों का चालान कर दिया। बता दें कि ये सभी आजमगढ़ के सगड़ी तहसील मुख्यालय और आस पास के क्षेत्रों से पकड़े गए थे। मंगलवार को गिरफ्तार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर पुलिस पूछताछ कर ही रही थी कि सुबह साढ़े सात बजे के करीब भारी संख्या में महिलाएं और पुरुषों ने थाने पहुंचकर घेराव कर लिया और आरोपियों को छोड़ने की जिद करने लगे।
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पुलिस ने लाठी भांजकर लोगों दूर खदेड़ दिया। इस दौरान चोट लगने से कई लोग मामूली रूप से घायल हो गए। भीड़ खदेड़ने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों का चालान कर कर दिया।
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एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कुछ महिला और पुरुष थाने पहुंचकर आरोपियों को छोड़ने की जिद कर रहे थे। इन्हें थाने से हटा दिया गया। गिरफ्तार सभी आरोपियों का चालान कर दिया गया।
कोर्ट के फैसले से नाराज दलित संगठनों की ओर से सोमवार को सगड़ी तहसील मुख्यालय सहित क्षेत्र के अन्य बाजारों में किए गए हिंसक प्रदर्शन के दूसरे दिन मंगलवार को क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति रही।
पुलिस ने शांति बहाली के लिए क्षेत्र में रूट मार्च किया। साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। ज्यादातर आरोपी घर छोड़कर फरार हैं। मुख्य आरोपियों को पकड़ने के लिए उसका लोकेशन ली जा रही है।
सच्चाई सबको पता, पर साधी चुप्पी
सगड़ी बवाल के बाद कमिश्नर एसवीएस रंगाराव मंगलवार को जीयनपुर कोतवाली में जानकारी के लिए पहुंचे थे। उन्होंने बवाल की वीडियो देखने के साथ एसडीएम रविवंजन और सीओ सुधाकर सिह से मामले की जानकारी ली। एसडीएम और सीओ ने आपस में इस कमी पर चर्चा तो की, लेकिन कमिश्नर से खुल कर किसी ने कुछ नहीं कहा।
शुरुआती बवाल की जानकारी दबाना पड़ा भारी
उपद्रवियों ने वाहन को बनाया निशाना
- फोटो : अमर उजाला
सगड़ी तहसील के सामने सोमवार को हुए बवाल से पहले सुबह साढ़े आठ बजे ही उपद्रवियों ने अजमतगढ़ में बवाल काटना शुरू कर दिया था। हाथ में लाठी-डंडे और पत्थर लेकर जबरदस्ती दुकानों को बंद कराना शुरू कर दिया गया था। इसके बाद उपद्रवी जीयनपुर के लिए रवाना हुए, लेकिन पुलिस ने मामला शांत जानकर इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं दी। पुलिस की यही चूक भारी पड़ गई।
इसका खामियाजा लाखों रुपये की राजस्व क्षति के रूप में उठाना पड़ा। सगड़ी तहसील के सामने भीषण बवाल के बाद उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। यदि पहले उपद्रव की जानकारी मिल गई होती तो उसे रोका जा सकता था।
भारत बंद को लेकर पुलिस-प्रशासन पहले से ही बेपरवाह था। वहीं, अंदरखाने राजनीतिक दलों के समर्थन से सरकार विरोधी प्रदर्शन की रणनीति पहले से ही तैयार हो चुकी थी। सोशल मीडिया का भी इसमें बड़ा रोल रहा। विभिन्न दलित संगठनों से जुड़े लोग सुबह साढ़े आठ बजे अजमतगढ़ बाजार में एकत्र हो गए थे।
बसपा के कुमार गौरव और पुराने सपाई रहे निर्दलीय नगर पंचायत चेयरमैन पारस सोनकर उनका नेतृत्व कर रहे थे। लाठी-डंडे के बल पर जबरदस्ती दुकानें बंद कराई जा रहीं थी। इसके बाद अंबेडकर चौक पहुंचकर तिराहा जाम किया गया और पत्थर चलाए गए। इतना होने के बाद भी ये जानकारी पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों को नहीं दी। उपद्रवियों के जीयनपुर रवाना होने पर ये मानकर बैठ गए कि सब शांत हो गया है।
वहीं उपद्रवियों का दूसरा गुट मालटारी पहुंचा था। बंद कराने का बजारवासियों ने विरोध किया तो झड़प के बाद ये भी जीयनपुर रवाना हो गए। जीयनपुर में भी दोनों गुटों ने बाजार बंद कराने की कोशिश की। दुकानदारों से झड़प भी हुई तो यहां से ज्ञापन देने के लिए सगड़ी तहसील पहुंचे। उपद्रवियों के जीयनपुर पहुंचने तक की उच्चाधिकारियों को जानकारी नहीं हुई थी।
सगड़ी में जाम लगाने से पुलिस के रोकने पर बवाल शुरू हो गया। दो सरकारी बसें फूंक दी गई और सात बसों में तोड़फोड़ की गई। सरकारी वाहनों के साथ ही प्राइवेट वाहनों को निशाना बनाया जाने लगा तो मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा।
इसके बाद तमाम थानों की फोर्स और पीएसी के साथ जीएम एवं कप्तान मौके पर पहुंचे। तबतक बवाली खदेड़े जा चुके थे। हालांकि उपद्रवियों पर एनएसए और गैंगेस्टर की कार्रवाई की बात कही गई, लेकिन लाखों की राजस्व क्षति हो चुकी थी। खुफिया तंत्र के नाकामी और पुलिस के जानकारी छिपाने से सही समय पर उपद्रव की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचती तो इन बवालियों को जीयनपुर और सगड़ी में पहुंचने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकता था।
इसका खामियाजा लाखों रुपये की राजस्व क्षति के रूप में उठाना पड़ा। सगड़ी तहसील के सामने भीषण बवाल के बाद उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। यदि पहले उपद्रव की जानकारी मिल गई होती तो उसे रोका जा सकता था।
भारत बंद को लेकर पुलिस-प्रशासन पहले से ही बेपरवाह था। वहीं, अंदरखाने राजनीतिक दलों के समर्थन से सरकार विरोधी प्रदर्शन की रणनीति पहले से ही तैयार हो चुकी थी। सोशल मीडिया का भी इसमें बड़ा रोल रहा। विभिन्न दलित संगठनों से जुड़े लोग सुबह साढ़े आठ बजे अजमतगढ़ बाजार में एकत्र हो गए थे।
बसपा के कुमार गौरव और पुराने सपाई रहे निर्दलीय नगर पंचायत चेयरमैन पारस सोनकर उनका नेतृत्व कर रहे थे। लाठी-डंडे के बल पर जबरदस्ती दुकानें बंद कराई जा रहीं थी। इसके बाद अंबेडकर चौक पहुंचकर तिराहा जाम किया गया और पत्थर चलाए गए। इतना होने के बाद भी ये जानकारी पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों को नहीं दी। उपद्रवियों के जीयनपुर रवाना होने पर ये मानकर बैठ गए कि सब शांत हो गया है।
वहीं उपद्रवियों का दूसरा गुट मालटारी पहुंचा था। बंद कराने का बजारवासियों ने विरोध किया तो झड़प के बाद ये भी जीयनपुर रवाना हो गए। जीयनपुर में भी दोनों गुटों ने बाजार बंद कराने की कोशिश की। दुकानदारों से झड़प भी हुई तो यहां से ज्ञापन देने के लिए सगड़ी तहसील पहुंचे। उपद्रवियों के जीयनपुर पहुंचने तक की उच्चाधिकारियों को जानकारी नहीं हुई थी।
सगड़ी में जाम लगाने से पुलिस के रोकने पर बवाल शुरू हो गया। दो सरकारी बसें फूंक दी गई और सात बसों में तोड़फोड़ की गई। सरकारी वाहनों के साथ ही प्राइवेट वाहनों को निशाना बनाया जाने लगा तो मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा।
इसके बाद तमाम थानों की फोर्स और पीएसी के साथ जीएम एवं कप्तान मौके पर पहुंचे। तबतक बवाली खदेड़े जा चुके थे। हालांकि उपद्रवियों पर एनएसए और गैंगेस्टर की कार्रवाई की बात कही गई, लेकिन लाखों की राजस्व क्षति हो चुकी थी। खुफिया तंत्र के नाकामी और पुलिस के जानकारी छिपाने से सही समय पर उपद्रव की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचती तो इन बवालियों को जीयनपुर और सगड़ी में पहुंचने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकता था।
एक हाथ में पंचशील का झंडा, दूसरे में डंडा, हैरान रहे लोग
विरोध प्रदर्शन करने वालों को देखकर हतप्रभ रहे लोग
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए तमाम दलित संगठनों में वे लोग भी शामिल थे, जो अपने आप को भगवान बुद्ध का अनुयायी मानते हैं। उनके बताए हुए मार्ग पर चलने की प्रतिदिन कसमें खाते हैं।
विरोध प्रदर्शन में शामिल ऐसे लोगों के एक हाथ में पंचशील का झंडा और दूसरे हाथ में तोड़फोड़ करने के लिए डंडा देखकर लोग हतप्रभ रह गए। इस प्रकार का दृश्य देखने वालों ने कहा कि भगवान बुद्ध को मानने वाले कभी भी हिंसा नहीं कर सकते।
प्रदर्शनकारी उनके झंडे का प्रयोग कर उनकी भी मर्यादा को ठेस पहुंचाया है। भगवान बुद्ध को मानते हुए तमाम दलित समुदाय के लोग न केवल उनके धर्म को अपना लिया है।
सोमवार को एससी-एसटी एक्ट पर आए कोर्ट के फैसले के विरोध में तमाम दलित संगठनों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़क पर उतरे और जबरन बाजारों को बंद कराने लगे। इस दौरान भीड़ आक्रोशित होकर सरकारी और गैरसरकारी वाहनों पर पथराव करते हुए उन्हें आग के हवाले कर दिया।
विरोध प्रदर्शन में शामिल ऐसे लोगों के एक हाथ में पंचशील का झंडा और दूसरे हाथ में तोड़फोड़ करने के लिए डंडा देखकर लोग हतप्रभ रह गए। इस प्रकार का दृश्य देखने वालों ने कहा कि भगवान बुद्ध को मानने वाले कभी भी हिंसा नहीं कर सकते।
प्रदर्शनकारी उनके झंडे का प्रयोग कर उनकी भी मर्यादा को ठेस पहुंचाया है। भगवान बुद्ध को मानते हुए तमाम दलित समुदाय के लोग न केवल उनके धर्म को अपना लिया है।
सोमवार को एससी-एसटी एक्ट पर आए कोर्ट के फैसले के विरोध में तमाम दलित संगठनों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़क पर उतरे और जबरन बाजारों को बंद कराने लगे। इस दौरान भीड़ आक्रोशित होकर सरकारी और गैरसरकारी वाहनों पर पथराव करते हुए उन्हें आग के हवाले कर दिया।
थाने पहुंच कमिश्नर ने जाना घटनाक्रम
कमिश्नर एसबीएस रंगाराव ने घटना का वीडियो फुटेज देखा
- फोटो : अमर उजाला
सगड़ी तहसील मुख्यालय पर हुई हिंसक घटना के दूसरे दिन मंगलवार को मंडलायुक्त एसबीएस रंगाराव जीयनपुर कोतवाली पहुंचकर अधिकारियों से घटनाक्रम की जानकारी ली। साथ ही उचित कार्रवाई और एहतियात बरतने का निर्देश दिया।
जीयनपुर कोतवाली पहुंचने के बाद मंडलायुक्त सबसे पहले घायल दरोगा और सिपाही से मिले। उनका हाल लेने के साथ ही जाना साथ ही घटनाक्रम से अवगत हुए। इसके बाद कमिश्नर ने निर्देश दिया कि क्षेत्र में कस्बे के पास मौजूद सभी पेट्रोल पंप सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरा लगवाया जाए, ताकि पूरी गतिविधियां कैद हो।
सके अलावा प्रत्येक माह क्षेत्र के संभ्रांत लोगों की थाने में बैठक कर क्षेत्र के विषय में चर्चा करते हुए गतिविधियों की जानकारी ली जाए। थाने पर मौजूद अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि किसी भी दशा में दोषियों को बक्शा न जाए। इनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
जीयनपुर कोतवाली पहुंचने के बाद मंडलायुक्त सबसे पहले घायल दरोगा और सिपाही से मिले। उनका हाल लेने के साथ ही जाना साथ ही घटनाक्रम से अवगत हुए। इसके बाद कमिश्नर ने निर्देश दिया कि क्षेत्र में कस्बे के पास मौजूद सभी पेट्रोल पंप सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरा लगवाया जाए, ताकि पूरी गतिविधियां कैद हो।
सके अलावा प्रत्येक माह क्षेत्र के संभ्रांत लोगों की थाने में बैठक कर क्षेत्र के विषय में चर्चा करते हुए गतिविधियों की जानकारी ली जाए। थाने पर मौजूद अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि किसी भी दशा में दोषियों को बक्शा न जाए। इनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।