वाराणसी: भैरव अष्टमी पर भक्त बोले हैप्पी बर्थ डे, 651 किलो का केक काटकर लिया आशीर्वाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव का भक्तों ने धूनधाम से वार्षिक जन्मोत्सव मनाया। भैरव अष्टमी पर पंचमेवा और फलों से निर्मित 651 किलो का केक काटा गया। मंदिर को गुब्बारे, फूलों और रुद्राक्ष से सजाया गया। दोपहर की आरती के बाद केक का प्रसाद मंदिर चौराहे पर बांटा गया। इसके बाद भंडारे का आयोजन हुआ।
कालभैरव चौराहे पर स्थानीय कलाकारों की ओर से बाबा के चरणों में भक्ति गीत की प्रस्तुति की गई। आयोजन समिति के प्रिंस गुप्ता के अनुसार पिछले तेरह साल की तरह इस बार भी बाबा के जन्मोत्सव पर केक काटकर, पॉपकार्न व टाफियां बांटी गई।
बटुक भैरव मंदिर कमच्छा में बाबा की महाआरती उतारी गई। अखंड कीर्तन तांत्रिक विधि से हुआ। सुबह मंगला आरती और 11 बटुकों की ओर से रुद्राभिषेक के बाद बाबा का विशेष स्नान व श्रृंगार किया गया। 108 बटुकों के भोजन के बाद अखंड भंडारे का आयोजन किया गया। शाम को हवन पूजन हुआ। 1008 बत्ती से महाआरती उतारी गई। रात में पंचमकार मीट, मछली, पूरी, बड़ा व मदिरा से पूर्णाहुति की गई।
महंत राकेश पुरी के अनुसार मान्यता है कि भैरव को प्रसन्न किए बिना भगवान शिव की भक्ति नहीं होती है। काशी में रहने के लिए कोतवाल कालभैरव से इजाजत लेना है। भगवान श्रीकृष्ण ने पांडु पुत्र भीम को इंद्रप्रस्थ की रक्षा के लिए यहां तपस्या के लिए भेजा था। बाबा बटुकनाथ के प्रताप से इंद्रप्रस्थ की रक्षा हुई।
भैरव अष्टमी पर हुई अष्ट भैरव यात्रा
श्रीलाट भैरव काशी यात्रा मंडल ने कज्जाकपुरा स्थित श्री कपाल भैरव श्री लाटभैरव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद अष्ट भैरव प्रदक्षिणा यात्रा शुरू की। धार्मिक वेश धारक किए भैरव भक्त नंग पांव, डमरू शंखनाद करते चल रहे थे।
कज्जाकपुरा से महामृत्युंजय महादेव में असितांग भैरव, त्रिलोचन घाट स्थित संहार भैरव, नखास स्थित भीषण भैरव, बटुक भैरव मंदिर में उन्मत भैरव, कमच्छा मंदिर में क्रोधन भैरव, दुर्गाकुंड के दुर्गा मंदिर में चंड भैरव, हनुमान घाट पर रुरु भैरव के साथ अष्ट भैरव प्रदक्षिणा यात्रा पूरी हुई। इसमें केवल कुशवाहा, गोविंद बाबा, नरेंद्र, जय प्रकाश राय आदि मौजूद रहे।