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अपनी शरण में आने वाले का उद्धार करते हैं भगवान
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वाराणसी। बाल व्यास श्रीकांत शर्मा ने कहा कि जब तक हमारे अंदर प्रेम है, अटूट विश्वास है तब तक हमें कोई व्यसन घेर नहीं सकता है। आपके अंदर का पुण्य ही आपको भगवान के दर तक पहुंचाता है। भगवान सिर्फ प्रेम के भूखे हैं जो उन्हें निस्वार्थ भाव से प्रेम करता है भगवान उस पर सर्वस्व लुटा देते हैं। यदि मन में प्रतिदिन सौ बुरे विचार आएं तो कौरव जैसी गति प्राप्त होती है और यदि सिर्फ पांच सद्विचार ही मन में आएं तो समझो पांडवों की भांति भगवान कृष्ण आपकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।
श्री काशी सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में नाटी इमली स्थित भरत मिलाप मैदान में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन गुरुवार को बाल व्यास ने कहा कि भगवान अपनी शरण में आने वाले का न पाप देखते हैं न पुण्य, वे तो बस अपने शरण में आने वाले का आंख बंद करके उद्धार कर देते हैं। पूरे ब्रह्मांड में मारने वाली को भी मां का स्नेह दिया तो वह थे भगवान श्रीकृष्ण। पूतना उनको मारना चाहती थी फिर भी उन्होंने पूतना को मां की भांति स्नेह प्रदान किया। पूतना मनुष्य के बुरे कर्म और व्यसन का प्रतीक है। जो दूसरों को अकारण कष्ट दे उसे संस्कृत में कंस कहा गया है। भजन का प्रताप इतना है कि उसका फल मनुष्य को सौ जन्मों तक प्राप्त होता है। व्यास पीठ का पूजन महावीर प्रसाद रूंगटा, उर्मिला रूंगटा, रामस्वरूप रूंगटा, श्याम सुंदर रूंगटा, नवीन रूंगटा ने किया।
कथा प्रसंग के दौरान छप्पन भोग की अत्यंत मनोरम झांकी सजाई गई। इस अवसर पर श्रीनाथ द्वारा राजस्थान से आए भव्य चित्र को छप्पन भोग चढ़ाया गया। मारवाड़ी युवा मंच अन्नपूर्णा की सदस्यों ने समूह नृत्य कर प्रभु को भोग लगाया। अध्यक्ष यशा मोदी, साक्षी सराफ, चैताली झुनझुनवाला के नेतृत्व में महिलाओं ने बालव्यास का स्वागत किया। झांकी का दर्शन कर भक्त निहाल हो उठे। अन्नपूर्णा शाखा की प्रीति जालान, बरखा जालान, पायल मित्तल, प्रीति कनोडिया, मीनू शर्मा, कृतिका गोयल आदि मौजूद रहीं। संचालन महेश चौधरी व संयोजन कृष्ण कुमार काबरा का रहा।
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श्री काशी सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में नाटी इमली स्थित भरत मिलाप मैदान में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन गुरुवार को बाल व्यास ने कहा कि भगवान अपनी शरण में आने वाले का न पाप देखते हैं न पुण्य, वे तो बस अपने शरण में आने वाले का आंख बंद करके उद्धार कर देते हैं। पूरे ब्रह्मांड में मारने वाली को भी मां का स्नेह दिया तो वह थे भगवान श्रीकृष्ण। पूतना उनको मारना चाहती थी फिर भी उन्होंने पूतना को मां की भांति स्नेह प्रदान किया। पूतना मनुष्य के बुरे कर्म और व्यसन का प्रतीक है। जो दूसरों को अकारण कष्ट दे उसे संस्कृत में कंस कहा गया है। भजन का प्रताप इतना है कि उसका फल मनुष्य को सौ जन्मों तक प्राप्त होता है। व्यास पीठ का पूजन महावीर प्रसाद रूंगटा, उर्मिला रूंगटा, रामस्वरूप रूंगटा, श्याम सुंदर रूंगटा, नवीन रूंगटा ने किया।
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कथा प्रसंग के दौरान छप्पन भोग की अत्यंत मनोरम झांकी सजाई गई। इस अवसर पर श्रीनाथ द्वारा राजस्थान से आए भव्य चित्र को छप्पन भोग चढ़ाया गया। मारवाड़ी युवा मंच अन्नपूर्णा की सदस्यों ने समूह नृत्य कर प्रभु को भोग लगाया। अध्यक्ष यशा मोदी, साक्षी सराफ, चैताली झुनझुनवाला के नेतृत्व में महिलाओं ने बालव्यास का स्वागत किया। झांकी का दर्शन कर भक्त निहाल हो उठे। अन्नपूर्णा शाखा की प्रीति जालान, बरखा जालान, पायल मित्तल, प्रीति कनोडिया, मीनू शर्मा, कृतिका गोयल आदि मौजूद रहीं। संचालन महेश चौधरी व संयोजन कृष्ण कुमार काबरा का रहा।
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