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रक्षाबंधन पर भद्रा: दोपहर में इस समय राखी बांधने का मुहूर्त, सौभाग्य व सिद्धि योग के साथ सोमवार का रहेगा संयोग

Fri, 26 Jul 2024 04:13 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 26 Jul 2024 04:13 PM IST
सार

Varanasi News: रक्षा बंधन पर इस बार विशेष मुहूर्त बन रहा है। हालांकि, दोपहर 1ः24 बजे तक भद्रा का भी योग है। श्रावण मास की 19 अगस्त को भाई-बहन का त्योहार निश्चित है। ज्योतिषियों के अनुसार, भ्रदा कुछ खास अशुभ नहीं होगा।

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Bhadra on Raksha Bandhan Auspicious time tie Rakhi in afternoon good luck and Siddhi Yoga
रक्षाबंधन 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा की छाया रहेगी। हालांकि, भद्रा के पाताल लोक में होने के कारण इसका ज्यादा प्रभाव नहीं होगा। इसके बावजूद रक्षाबंधन के दिन कई घंटों तक बहनें अपने भाइयों को राखी नहीं बांध सकेंगी। श्रावण पूर्णिमा पर इस बार रवि, शोभन, सौभाग्य, सिद्धि योग के साथ ही सोमवार का संयोग बन रहा है। श्रावण मास की पूर्णिमा 19 अगस्त को मनाई जाएगी।

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काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि श्रावण पूर्णिमा 19 अगस्त की सुबह 2.05 बजे से शुरू होकर रात में 11.56 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए उदया तिथि के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व 19 अगस्त को मनाया जाएगा। 
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रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल सुबह 5.46 बजे से दोपहर 1.24 मिनट तक रहेगा। इस साल भद्रा का वास पाताल लोक में होने के कारण बहुत अशुभ नहीं माना जाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब भद्रा का वास पाताल या फिर स्वर्ग लोक में होता है तो यह धरतीवासियों को अधिक नुकसान नहीं पहुंचाती है। भद्रा काल बीत जाने के बाद ही रक्षाबंधन का पर्व मनाना उत्तम रहेगा। भद्रा काल में श्रावणी उपाकर्म के विधान किए जा सकते हैं।
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आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी रक्षाबंधन का पावन त्योहार श्रवण नक्षत्र में श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा। इस बार सौभाग्य योग, रवि योग, शोभन योग के संगम के साथ ही सिद्धि योग भी निर्मित हो रहा है। 

सोमवार का दिन पड़ने के कारण यह अत्यंत ही शुभ है। रक्षाबंधन में भद्रा की बाधा दिन में 1.24 बजे तक रहेगी। श्रवण मास में बहुत ही सुंदर संयोग है श्रावण मास का शुभारंभ श्रवण नक्षत्र से हुआ है और श्रावण मास का समापन भी श्रवण नक्षत्र से होगा।

बहनें जब भाई को बांधती हैं राखी तो मजबूत होता है मंगल ग्रह
ज्योतिषीय दृष्टि से, रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है जो श्रावण मास के अंत का प्रतीक है। धार्मिक दृष्टिकोण से, राखी के धागे केवल सजावटी नहीं हैं बल्कि वे रक्षा सूत्र हैं जो सभी बुराइयों को दूर करने और अपने धारक को सुरक्षा प्रदान करने के लिए हैं। 

ऐसा कहा जाता है कि मंगल, बृहस्पति, चंद्रमा और सूर्य के खगोलीय पिंड राखी के नौ पवित्र धागों से जुड़े हुए हैं। इनमें से प्रत्येक ग्रह क्रमशः छोटे भाई-बहन, बड़े भाई-बहन, माता और पिता का प्रतिनिधित्व करता है। जब बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं तो मंगल ग्रह मजबूत होता है। इसलिए, ज्योतिष के अनुसार इस त्योहार का महत्व बहुत ज्यादा है। 

ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो बड़े भाई को मंगल का कारक कहा जाता है और बहन को चंद्रमा का कारक कहा जाता है। सोमवार के दिन श्रवण नक्षत्र में श्रावण मास में यह कार्य होता है तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। जब परिवार के लोग एकत्र होते हैं और प्रेम बढ़ता है तो इससे सूर्य ग्रह प्रसन्न होते हैं। श्रावण मास और पूर्णिमा होने के कारण गुरु और शुक्र भगवान की कृपा भी प्राप्त होती है।

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