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इच्छाओं की पूर्ति के लिए ईश्वर का हिस्सा बनो, दीन-हीन नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 29 Jun 2016 01:38 AM IST
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कल्पतरु शिविर में दीक्षा देते स्वामी नित्यानंद।
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स्वर्णजड़ित रुद्राक्ष की माला पहन स्वर्णिम सिंहासन पर विराजित स्वामी नित्यानंद ने मंगलवार को देश-दुनिया से आए अनुयायियों को मुग्ध भाव में दर्शन दिया। बाबा के सानिध्य में ध्यान लगाने और योगासन करने के लिए युवा ब्रहमचारी और ब्रह्मचारिणियां आतुर नजर आईं। संगीतमय नित्यानंदम गान के साथ कतारबद्ध लोगों ने बाबा का आशीर्वाद लिया।
सत्संग में स्वामी नित्यानंद ने कहा कि इच्छाओं की पूर्ति के लिए जब तुम भगवान से कुछ मांग रहे हो तब तुम खुद को दीन-दुखी या छोटा महसूस मत करो। परमात्मा के आगे कुछ पाने के लिए तुम याचक की मुद्रा में छोटे नहीं हो, बल्कि उसी ईश्वर का हिस्सा बन जाते हो। पांच सितारा होटल में स्वामी नित्यानंद के कल्पतरु दर्शन एवं मंत्र दीक्षा शिविर में अनुयायियों के आकर्षक वेश और मुद्राएं हर किसी का ध्यान खींच रही हैं। विदेशी शिष्याएं सफेद बूटी-किनारीदार साड़ी में तो शिष्य कुर्ता-पायजामा में रुद्राक्ष की लड़ियों वाली आकर्षक माला पहने ध्यान लगा रहे हैं। दक्षिण भारतीय ब्रह्मचारी बटुक और ब्रह्मचारिणियों की वेशभूषा और उनके आध्यात्मिक भाव देखते बन रहे हैं।
मंगलवार को स्वामी नित्यानंद ने सत्संग में केनोपनिषद पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि उपनिषद काल में भी हमारे पास शक्तिशाली हथियार, उपकरण और संसाधन थे लेकिन उनका उद्देश्य अशांति फैलाना या समाज को असहज बनाना नहीं था। उन्होंने कहा कि समस्या से मुंह फेरने से शांति की स्थापना नहीं हो सकती।
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जब हम ईश्वर की प्रार्थना करते हैं तो समझते हैं कि हम दीन-दुखी हैं और शक्तिमान ईश्वर के आगे नतमस्तक हो रहे हैं। पर ऐसा नहीं है। जब तुम भगवान से कुछ मांग रहे हो तब भी तुम उसी का हिस्सा बनने की अनुभूति करो। इससे पहले गुरु पूजा, कीर्तन की गूंज के बीच अनुयायी झूमते रहे।
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सत्संग में स्वामी नित्यानंद ने कहा कि इच्छाओं की पूर्ति के लिए जब तुम भगवान से कुछ मांग रहे हो तब तुम खुद को दीन-दुखी या छोटा महसूस मत करो। परमात्मा के आगे कुछ पाने के लिए तुम याचक की मुद्रा में छोटे नहीं हो, बल्कि उसी ईश्वर का हिस्सा बन जाते हो। पांच सितारा होटल में स्वामी नित्यानंद के कल्पतरु दर्शन एवं मंत्र दीक्षा शिविर में अनुयायियों के आकर्षक वेश और मुद्राएं हर किसी का ध्यान खींच रही हैं। विदेशी शिष्याएं सफेद बूटी-किनारीदार साड़ी में तो शिष्य कुर्ता-पायजामा में रुद्राक्ष की लड़ियों वाली आकर्षक माला पहने ध्यान लगा रहे हैं। दक्षिण भारतीय ब्रह्मचारी बटुक और ब्रह्मचारिणियों की वेशभूषा और उनके आध्यात्मिक भाव देखते बन रहे हैं।
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मंगलवार को स्वामी नित्यानंद ने सत्संग में केनोपनिषद पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि उपनिषद काल में भी हमारे पास शक्तिशाली हथियार, उपकरण और संसाधन थे लेकिन उनका उद्देश्य अशांति फैलाना या समाज को असहज बनाना नहीं था। उन्होंने कहा कि समस्या से मुंह फेरने से शांति की स्थापना नहीं हो सकती।
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जब हम ईश्वर की प्रार्थना करते हैं तो समझते हैं कि हम दीन-दुखी हैं और शक्तिमान ईश्वर के आगे नतमस्तक हो रहे हैं। पर ऐसा नहीं है। जब तुम भगवान से कुछ मांग रहे हो तब भी तुम उसी का हिस्सा बनने की अनुभूति करो। इससे पहले गुरु पूजा, कीर्तन की गूंज के बीच अनुयायी झूमते रहे।