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Banrasi Saree Business Crises: 45 दिनों में भुगतान बाध्यता से बनारसी साड़ी कारोबार पर संकट

Tue, 09 Jul 2024 06:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jul 2024 06:36 AM IST
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Banrasi Saree Business Crises: Banarasi Saree business in crisis due to payment obligation in 45 days
एमएसएमई में 45 दिनों के अंदर भुगतान की बाध्यता ने बनारसी साड़ी कारोबार को संकट में डाल दिया है। बनारसी वस्त्र कारोबारियों को आर्डर मिलने कम हो गए। डंप माल में पूंजी भी फंस रही है। बुनकर बाहुल्य इलाकों में जहां पहले 24 घंटे खटर-पटर सुनाई देती थी, अब 10 से 12 घंटे ही काम हो रहा है। साड़ी कारोबारियों के अनुसार कारोबार मंदा पड़ चुका है। बनारसी वस्त्र उद्योग पर बड़ा संकट छाया हुआ है।
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साड़ी कारोबारियों के अनुसार आयकर विभाग ने एमएसएमई की सूक्ष्म व लघु इकाइयों के भुगतान न करने पर उसकी जानकारी अपने रिटर्न में देने का निर्देश दिया है, इससे बनारसी वस्त्र कारोबार में एमएसएमई इकाइयों की बिक्री आधी हो गई है। अर्थ चक्र गड़बड़ाने से बहुत से साड़ी कारोबारी ने एमएसएमई इकाइयों से माल खरीदने से इंकार कर दिया है। बहुत सी एमएसएमई इकाइयों ने अपनी ही अलग व्यापारिक शाखा खोल ली है ताकि उनकी बिक्री प्रभावित न हो।
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चौक, गोदौलिया, दशाश्वमेध और लक्सा बनारसी साड़ी और वस्त्रों का एक बड़ा बाजार है। पूर्वांचल समेत देश के अन्य राज्यों के व्यापारी यहां से माल खरीदते हैं। बनारसी साड़ी व वस्त्र तैयार करने वाली ज्यादातर कंपनी लघु या सूक्ष्म उद्योग के तहत एमएसएमई में पंजीकृत हैं। कंपनियों से थोक कारोबारी के यहां माल आने पर वे फुटकर विक्रेता को बेचते हैं। हर जगह एक से लेकर तीन महीने तक उधारी चलती है लेकिन आयकर विभाग के नए नियम के अनुसार किसी तरह के भुगतान अनुबंध के बावजूद 45 दिनों के अंदर भुगतान करना होगा। यदि लिखित अनुबंध नहीं है तो 15 दिनों के अंदर भुगतान करना होगा।
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बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजन बहल ने बताया कि फरवरी से नियम के लागू होने के बाद से बहुत से कारोबारियों ने माल खरीद कम कर दिया है। वहीं, 31 मार्च तक मिले माल का भुगतान न करने में उसे कारोबारी की आय मानकर उस पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाने की बात कही गई है, इससे लोगों ने जल्दी-जल्दी भुगतान निपटाए। इससे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी कम हो गई है। बहुत से कारोबारियों ने लोन लेकर भुगतान चुकता किया।
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