UP: बैंक कर्मी, POS एजेंट साइबर ठगों को देते थे म्यूल बैंक अकाउंट और फर्जी सिम, तीन अरेस्ट; जानें मामला
साइबर सेल और लालपुर पांडेयपुर थाने की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ बीएनएस-2023 के तहत संगठित अपराध की धारा और आईटी एक्ट के तहत तथ्य की गलती से संबंधित धारा बढ़ाई गई है।
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Cyber Crime: म्यूल बैंक अकाउंट और फर्जी सिम बनवाकर साइबर ठगों को बेचने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को कमिश्नरेट की साइबर सेल और लालपुर पांडेयपुर थाने की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है।
आरोपियों की पहचान नई बस्ती पांडेयपुर के सूर्यकांत विश्वकर्मा, विश्वेश्वरगंज के विकास मौर्या और कज्जाकपुरा के मोहम्मद अरमान के रूप में हुई है। मोहम्मद अरमान उत्कर्ष बैंक की महमूरगंज शाखा का कर्मचारी है। सूर्यकांत सिम बेचने का काम करता था।
विकास म्यूल बैंक खाते और फर्जी सिम लेकर साइबर ठगों को भेजता था। तीनों आरोपियों के पास से एयरटेल व वीआई के 28 सिम, बायोमेट्रिक मशीन, 8 मोबाइल फोन, 7 डेबिट कार्ड, 5 बैंक पासबुक, 5 चेकबुक, 2 आधार कार्ड और 820 रुपये बरामद हुए हैं। तीनों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया।
नई बस्ती, पांडेयपुर के मेहताब खान ने लालपुर पांडेयपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस को बताया कि https://tafcop.sancharsaathi.gov.in/telecomUser/ पर अपना आधार नंबर डालकर मोबाइल नंबरों के बारे में पता किया। पता लगा कि उनके इस्तेमाल किए जा रहे दो सिम के अतिरिक्त एक अन्य सिम भी चल रहा है। जिसकी जानकारी उन्हें नहीं थी।
डीसीपी वरुणा जोन प्रमोद कुमार ने बताया कि मामले के खुलासे के लिए साइबर सेल प्रभारी मनोज कुमार तिवारी के नेतृत्व में दरोगा अजय कुमार पांडेय व कांस्टेबल विराट सिंह और लालपुर पांडेयपुर थानाध्यक्ष राजीव कुमार सिंह की संयुक्त टीम गठित की गई।
पुलिस टीम ने त्रि-स्तरीय कार्रवाई की। फर्जी सिम व म्यूल बैंक खाते खुलवाने वाले एजेंट, एक बैंक कर्मी और एक सिम बेचने वाले पीओएस एजेंट को चिह्नित कर गिरफ्तार किया गया। पीओएस एजेंट का लाइसेंस रद्द करने के लिए और बैंक को कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई के लिए सूचना भेजी गई है।
कम पढ़े-लिखे लोगों को बनाते थे निशाना
डीसीपी क्राइम सरवणन टी ने बताया कि तीनों आरोपी कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाते थे। ऐसे लोग सिम लेने या पोर्ट कराने जाते थे तो नेटवर्क की समस्या बताकर डबल केवाईसी करा ली जाती है। साथ ही उनके नाम से एक फर्जी सिम बना लिया जाता था।
झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के आधार कार्ड व पैन कार्ड बनवाए जाते हैं। उसके बाद उन्हीं लोगों की आईडी पर सिम व बैंक खाते खुलवाए जाते थे। म्यूल बैंक खातों और सिम को दिल्ली, नोएडा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के साइबर अपराधियों को कूरियर या बस के माध्यम से भेज दिया जाता था।