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खाते में रुपया पहुंचा नहीं, सिलेंडर हुए खाली
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Sat, 03 Jan 2015 02:00 AM IST
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रसोई गैस की सब्सिडी का एक रुपया भी किसी उपभोक्ता के खाते में तो नहीं ही पहुंचा। साथ ही उनके घरों में बुकिंग के हफ्ते भर बाद भी सिलेेंडर नहीं पहुंचा। रसोईघर में ईंधन समाप्त हो जाने के कारण शुक्रवार को पूरे दिन हजारों उपभोक्ता चूल्हा जलाने की जुगत में भटकते रहे।
गैस एजेंसियों पर जाकर महज एक सिलेंडर के लिए गुहार लगाई लेकिन वहां उनकी पीड़ा सुनने की बजाय दोबारा बुकिंग कराने का फरमान जारी कर दिया गया। शहर भर में गैस की इस कृत्रिम किल्लत के चलते ट्राली चालकों ने हर सिलेंडर के बदले गर्जमंद लोगों से नौ सौ से हजार रुपये तक की वसूली की।
गैस एजेंसियों ने बगैर किसी सूचना के 24 दिसंबर के बाद की गई 20 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं की रसोईगैस की बुकिंग रद्द कर दी। उपभोक्ताओं को न तो फोन करके इसकी जानकारी दी गई और न ही मैसेज भेजा गया। जानकारी के अभाव में उपभोक्ता निश्चिंत होकर ट्रालीमैन का इंतजार करते रहे। शुक्रवार को जब गैस खत्म हो गई तो हजारों उपभोक्ता गैस एजेंसियों पर बुकिंग की स्थिति जानने पहुंचे।
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वहां उनको टका सा जवाब सुनने को मिला कि दोबारा बुकिंग कराने के बाद ही गैस भेजी जाएगी। एलपीजी वितरक संघ के प्रवक्ता मनीष चौबे ने बताया कि डीबीटीएल के तहत अलग फार्मेट पर बुकिंग की जा रही है।
इसकी जानकारी नहीं होने के कारण पुराने तरीके से ही बुकिंग की गई, जिससे कंपनी के सर्वर ने स्वीकार नहीं किया और बुकिंग रद्द हो गई। जो बुकिंग दर्ज ही नहीं हुई, उसकी पर्ची और पासबुक के बगैर फिर से बुकिंग नहीं की गई। इन दस्तावेजों के लिए लोगों को एजेंसी से घर तक का चक्कर काटना पड़ा।
एलपीजी वितरक संघ के कुमार अग्रवाल का कहना है कि भले ही बुकिंग दर्ज न हुई हो लेकिन पुरानी पर्ची लेकर कोई व्यक्ति गैस के लिए क्लेम करेगा तो वे क्या कर सकते हैं। उधर, नई बुकिंग में सब्सिडी वाले सिलेंडर भेजे जाएंगे या बिना सब्सिडी के इस बारे में स्थिति स्पष्ट करने वाला कोई नहीं था।
लहरतारा और वरुणापुल की कुछ गैस एजेंसियों पर तो उपभोक्ताओं को स्पष्ट तौर पर कहा गया कि उन्हें बिना सब्सिडी के रेट से ही सिलेंडर भेजे जाएंगे। एडीएम आपूर्ति केएन उपाध्याय ने कहा कि डीबीटीएल के संबंध में शासन से आदेश का इंतजार किया जा रहा है।
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गैस एजेंसियों पर जाकर महज एक सिलेंडर के लिए गुहार लगाई लेकिन वहां उनकी पीड़ा सुनने की बजाय दोबारा बुकिंग कराने का फरमान जारी कर दिया गया। शहर भर में गैस की इस कृत्रिम किल्लत के चलते ट्राली चालकों ने हर सिलेंडर के बदले गर्जमंद लोगों से नौ सौ से हजार रुपये तक की वसूली की।
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गैस एजेंसियों ने बगैर किसी सूचना के 24 दिसंबर के बाद की गई 20 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं की रसोईगैस की बुकिंग रद्द कर दी। उपभोक्ताओं को न तो फोन करके इसकी जानकारी दी गई और न ही मैसेज भेजा गया। जानकारी के अभाव में उपभोक्ता निश्चिंत होकर ट्रालीमैन का इंतजार करते रहे। शुक्रवार को जब गैस खत्म हो गई तो हजारों उपभोक्ता गैस एजेंसियों पर बुकिंग की स्थिति जानने पहुंचे।
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वहां उनको टका सा जवाब सुनने को मिला कि दोबारा बुकिंग कराने के बाद ही गैस भेजी जाएगी। एलपीजी वितरक संघ के प्रवक्ता मनीष चौबे ने बताया कि डीबीटीएल के तहत अलग फार्मेट पर बुकिंग की जा रही है।
इसकी जानकारी नहीं होने के कारण पुराने तरीके से ही बुकिंग की गई, जिससे कंपनी के सर्वर ने स्वीकार नहीं किया और बुकिंग रद्द हो गई। जो बुकिंग दर्ज ही नहीं हुई, उसकी पर्ची और पासबुक के बगैर फिर से बुकिंग नहीं की गई। इन दस्तावेजों के लिए लोगों को एजेंसी से घर तक का चक्कर काटना पड़ा।
एलपीजी वितरक संघ के कुमार अग्रवाल का कहना है कि भले ही बुकिंग दर्ज न हुई हो लेकिन पुरानी पर्ची लेकर कोई व्यक्ति गैस के लिए क्लेम करेगा तो वे क्या कर सकते हैं। उधर, नई बुकिंग में सब्सिडी वाले सिलेंडर भेजे जाएंगे या बिना सब्सिडी के इस बारे में स्थिति स्पष्ट करने वाला कोई नहीं था।
लहरतारा और वरुणापुल की कुछ गैस एजेंसियों पर तो उपभोक्ताओं को स्पष्ट तौर पर कहा गया कि उन्हें बिना सब्सिडी के रेट से ही सिलेंडर भेजे जाएंगे। एडीएम आपूर्ति केएन उपाध्याय ने कहा कि डीबीटीएल के संबंध में शासन से आदेश का इंतजार किया जा रहा है।