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इस होली को खास बनाएगी तरह-तरह की बनारसी मिठाई- ठंडई
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Fri, 10 Mar 2017 11:12 PM IST
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sweets
- फोटो : अमर उजाला
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होली पर बनारसी व्यंजनों में मिठाइयों का अलग ही क्रेज है। आमतौर पर होली के दिन गुझिया के अलावा मेवे की मिठाईयां लोग अधिक पसंद करते हैं।
यू तो आम दिनों में भी कुछ चुनिंदा इलाकों की दूकानों पर यह बराबर बिकती है लेकिन होली के दिन घर-घर बनाई जाती है।
इस बार बाजार में सब्जियों की बनाई गई तरह-तरह की मिठाई उपलब्ध है। इनमें कोहड़ा पाक, रसवंती अंगूरी पेठा, पपीते की बर्फी, परवल की मिठाई है। इसके अलावा कलाकंद, काजू गजक, ऑरेंज रसगुल्ला, छेने के रसगुल्ले का दहीबड़ा की खूब मांग है।
महमूरगंज स्थित बाबा बेंगाली स्वीट्स के राजन यादव ने बताया कि होली पर खोवे का कलाकंद लोग पसंद कर रहे हैं। सब्जियों की मिठाइयां बनारस में अधिक खपत होती है। श्रीराम स्वीट्स चौक के विपिन कुमार ने बताया कि काजू, पिस्ता, बादाम के अलावा लोग मलाई गिलौरी अधिक पसंद करते हैं।
गिलौरी पान के आकार का बनाया जाता है। ऊपर से मलाई को पान के पत्ते की तरह बनाया जाता है। इसके भीतर खोवा, कई तरह के मेवे डाले जाते हैं। यह टिकाऊ नहीं होता है। 24 घंटे बाद इसमें खटास आ जाता है। ताजा मलाई गिलौरी खाने का आनंद ही कुछ और है।
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विश्वेश्वरगंज स्थित होरी स्वीट्स के होरी यादव ने बताया कि पहले लोग घरों में गुझिया बनाते थे। अब रेडीमेड गुझिया का चलन बढ़ा है। मिठाईयों को अब इस प्रकार से बनाया जा रहा है कि उसके भीतर क्या क्या भरा है, वह दिखाई पड़े। तभी लोगों का खाने के प्रति आकर्षक बढ़ता है।
मेवा कलश में खोवे का कलश बनाया जाता है। उसके भीतर हर प्रकार के मेवा को चाशनी से बांधकर कलश में भर दिया जाता है। कलश आधा खुला होने से आकर्षक बढ़ जाता है।
प्रमुख मिठाईयां दाम
मलाई गिलौरी 700 से 1200
कलाकंद 300 से 500
मेवा कलश 600 से 900
काजू कतरी 500 से 800
पिस्ता कचौड़ी 700 से 1200
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यू तो आम दिनों में भी कुछ चुनिंदा इलाकों की दूकानों पर यह बराबर बिकती है लेकिन होली के दिन घर-घर बनाई जाती है।
इस बार बाजार में सब्जियों की बनाई गई तरह-तरह की मिठाई उपलब्ध है। इनमें कोहड़ा पाक, रसवंती अंगूरी पेठा, पपीते की बर्फी, परवल की मिठाई है। इसके अलावा कलाकंद, काजू गजक, ऑरेंज रसगुल्ला, छेने के रसगुल्ले का दहीबड़ा की खूब मांग है।
महमूरगंज स्थित बाबा बेंगाली स्वीट्स के राजन यादव ने बताया कि होली पर खोवे का कलाकंद लोग पसंद कर रहे हैं। सब्जियों की मिठाइयां बनारस में अधिक खपत होती है। श्रीराम स्वीट्स चौक के विपिन कुमार ने बताया कि काजू, पिस्ता, बादाम के अलावा लोग मलाई गिलौरी अधिक पसंद करते हैं।
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गिलौरी पान के आकार का बनाया जाता है। ऊपर से मलाई को पान के पत्ते की तरह बनाया जाता है। इसके भीतर खोवा, कई तरह के मेवे डाले जाते हैं। यह टिकाऊ नहीं होता है। 24 घंटे बाद इसमें खटास आ जाता है। ताजा मलाई गिलौरी खाने का आनंद ही कुछ और है।
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विश्वेश्वरगंज स्थित होरी स्वीट्स के होरी यादव ने बताया कि पहले लोग घरों में गुझिया बनाते थे। अब रेडीमेड गुझिया का चलन बढ़ा है। मिठाईयों को अब इस प्रकार से बनाया जा रहा है कि उसके भीतर क्या क्या भरा है, वह दिखाई पड़े। तभी लोगों का खाने के प्रति आकर्षक बढ़ता है।
मेवा कलश में खोवे का कलश बनाया जाता है। उसके भीतर हर प्रकार के मेवा को चाशनी से बांधकर कलश में भर दिया जाता है। कलश आधा खुला होने से आकर्षक बढ़ जाता है।
प्रमुख मिठाईयां दाम
मलाई गिलौरी 700 से 1200
कलाकंद 300 से 500
मेवा कलश 600 से 900
काजू कतरी 500 से 800
पिस्ता कचौड़ी 700 से 1200
होली में थकान मिटाएगी बनारसी ठंडई
बदलते दौर में अब बोतल बंद ठंडई खरीदने की चाहत
- फोटो : अमर उजाला
होली पर बनारसी ठंडई मिल जाए तो क्या बात है। यू तो आम दिनों में भी कुछ चुनिंदा इलाकों की दूकानों पर यह बराबर बिकती है लेकिन होली के दिन घर-घर बनाई जाती है। इसकी खासियत है कि पीने के बाद दिन भर की थकान मिट जाती है।
कुछ लोग इसमें नशे के लिए थोड़ी सी भांग मिलाकर भी पीते हैं। बदलते दौर में अब यह बोतल बंद बाजार में आने लगी है।
गोदौलिया स्थित एक दूकान पर ठंडई बनाने और बेचने वाले छोटू ने बताया कि बाजार में बिकने वाली ठंडई में सौंफ, मुनक्का, काजू, पिस्ता, बादाम के अलावा कई तरह की ठंडी तासीर वाली चीजें मिलाई जाती हैं। इसे पीने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं।
चौक में ठंडई बनाने वाले अमित कुमार ने बताया कि कई तरह की ठंडई बनती है। गुलाब, खस, कशेरू, फालसा आदि की ठंडई मौसम के हिसाब से बनाई जाती है। इस समय सौंफ और काजू वाली ठंडई बनती है। हालांकि पहले यह घरों में बनाई जाती थी।
ठंडई को रात भर भिगोया जाता था। सुबह सील पर बारीक पिसा जाता था। इसके बाद महीन सूती कपड़े से छाना जाता था। फिर दूध, चीनी, मलाई आदि मिलाकर पीया जाता है। जो लोग दूकानों से नहीं खरीदते, अब भी घरों में ऐसे ही बनाते हैं।
वहीं बाजार में विभिन्न कंपनियों की बोतलबंद ठंडई 150 से 350 रुपये तक में उपलब्ध है। जो लोग घर पर बनाना नहीं चाहते, वे रेडिमेड ठंडई खराद सकते हैं।
बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार की ठंडई
ठंडई दाम
सामान्य 30 से 50
मलाईदार 50 से 70
स्पेशल पौष्टिक 60 से 80
गुलाब 50 से 70
खस 50 से 70
संतरा फ्लेवर 40 से 50
नोट- सभी आंकड़े रुपये में प्रति गिलास
कुछ लोग इसमें नशे के लिए थोड़ी सी भांग मिलाकर भी पीते हैं। बदलते दौर में अब यह बोतल बंद बाजार में आने लगी है।
गोदौलिया स्थित एक दूकान पर ठंडई बनाने और बेचने वाले छोटू ने बताया कि बाजार में बिकने वाली ठंडई में सौंफ, मुनक्का, काजू, पिस्ता, बादाम के अलावा कई तरह की ठंडी तासीर वाली चीजें मिलाई जाती हैं। इसे पीने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं।
चौक में ठंडई बनाने वाले अमित कुमार ने बताया कि कई तरह की ठंडई बनती है। गुलाब, खस, कशेरू, फालसा आदि की ठंडई मौसम के हिसाब से बनाई जाती है। इस समय सौंफ और काजू वाली ठंडई बनती है। हालांकि पहले यह घरों में बनाई जाती थी।
ठंडई को रात भर भिगोया जाता था। सुबह सील पर बारीक पिसा जाता था। इसके बाद महीन सूती कपड़े से छाना जाता था। फिर दूध, चीनी, मलाई आदि मिलाकर पीया जाता है। जो लोग दूकानों से नहीं खरीदते, अब भी घरों में ऐसे ही बनाते हैं।
वहीं बाजार में विभिन्न कंपनियों की बोतलबंद ठंडई 150 से 350 रुपये तक में उपलब्ध है। जो लोग घर पर बनाना नहीं चाहते, वे रेडिमेड ठंडई खराद सकते हैं।
बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार की ठंडई
ठंडई दाम
सामान्य 30 से 50
मलाईदार 50 से 70
स्पेशल पौष्टिक 60 से 80
गुलाब 50 से 70
खस 50 से 70
संतरा फ्लेवर 40 से 50
नोट- सभी आंकड़े रुपये में प्रति गिलास