{"_id":"60de19f88ebc3ec3093dc9c6","slug":"banarasi-lame-and-chausa-mango-sent-to-dubai-varanasi-news-vns598110067","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुबई भेजा गया बनारसी लंगड़ा और चौसा आम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुबई भेजा गया बनारसी लंगड़ा और चौसा आम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बनारसी लंगड़ा और चौसा आम बृहस्पतिवार को खाड़ी देश दुबई के लिए भेजा गया। आम को वातानुकूलित ट्रक से पहले लखनऊ भेजा गया। वहां से शुक्रवार को रात आठ बजे हवाई मार्ग से दुबई पहुंचेगा। यह साल की पहली खेप है। इससे पहले पिछले साल 20 मई 2020 को तीन मीट्रिक टन आम दुबई भेजा गया था।
इस वर्ष खराब मौसम और कोरोना के कारण आम का निर्यात देरी होने के कारण सिर्फ चौसा और लंगड़ा भेजा गया। इसमें आराजी लाइन ब्लाक के भिखारीपुर और बंगालीपुर गांव के 10 किसानों का 200 किलो लंगड़ा और एक टन (1000 किलो) चौसा आम शामिल है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के महाप्रबंधक डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि पिछले दो दिनों से मौसम साफ होने के बाद साल की पहली आम की भेजी गई।
अच्छी पैदावार के बावजूद मुनाफा नहीं
इस वर्ष मौसम अनुकूल होने से पैदावार तो अच्छी थी, लेकिन कोरोना के कारण स्थानीय बाजार में रौनक न होने से अच्छे भाव नहीं मिले। किसानों ने बताया कि इस बार मंडी में बहुत कम आम बिके। हालांकि अब मंडियों में प्रदेश भर से आम की आवक है। जिससे स्थानीय क्षेत्र के 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिकने वाले आम 35 से 40 रुपये में बिक रहे हैं।
विज्ञापन
ये हैं उत्पादन क्षेत्र
चिरईगांव, काशी विद्यापीठ, बड़ागांव, सेवापुरी, चोलापुर आदि ब्लॉकों में 900 हेक्टेयर में आम की बागवानी है। सबसे ज्यादा चिरईगांव और चोलापुर में आम की बागवानी है। चिरईगांव, चोलापुर, बड़ागांव में ही लंगड़ा आदि का 10 हजार मीट्रिक टन तक उत्पादन है।
बनारसी लंगड़ा आम की विदेशों में अधिक मांग है। जिले 900 हेक्टेयर में आम की बागवानी में इस बार 10 हजार मीट्रिक टन तक उत्पादन था। आम की पैदावार और रकबा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
संदीप कुमार गुप्त, जिला उद्यान अधिकारी
विज्ञापन
इस वर्ष खराब मौसम और कोरोना के कारण आम का निर्यात देरी होने के कारण सिर्फ चौसा और लंगड़ा भेजा गया। इसमें आराजी लाइन ब्लाक के भिखारीपुर और बंगालीपुर गांव के 10 किसानों का 200 किलो लंगड़ा और एक टन (1000 किलो) चौसा आम शामिल है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के महाप्रबंधक डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि पिछले दो दिनों से मौसम साफ होने के बाद साल की पहली आम की भेजी गई।
विज्ञापन
अच्छी पैदावार के बावजूद मुनाफा नहीं
इस वर्ष मौसम अनुकूल होने से पैदावार तो अच्छी थी, लेकिन कोरोना के कारण स्थानीय बाजार में रौनक न होने से अच्छे भाव नहीं मिले। किसानों ने बताया कि इस बार मंडी में बहुत कम आम बिके। हालांकि अब मंडियों में प्रदेश भर से आम की आवक है। जिससे स्थानीय क्षेत्र के 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिकने वाले आम 35 से 40 रुपये में बिक रहे हैं।
विज्ञापन
ये हैं उत्पादन क्षेत्र
चिरईगांव, काशी विद्यापीठ, बड़ागांव, सेवापुरी, चोलापुर आदि ब्लॉकों में 900 हेक्टेयर में आम की बागवानी है। सबसे ज्यादा चिरईगांव और चोलापुर में आम की बागवानी है। चिरईगांव, चोलापुर, बड़ागांव में ही लंगड़ा आदि का 10 हजार मीट्रिक टन तक उत्पादन है।
बनारसी लंगड़ा आम की विदेशों में अधिक मांग है। जिले 900 हेक्टेयर में आम की बागवानी में इस बार 10 हजार मीट्रिक टन तक उत्पादन था। आम की पैदावार और रकबा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
संदीप कुमार गुप्त, जिला उद्यान अधिकारी