अनुसूचित जनजातियों पर रिपोर्ट तैयार करेगा जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, केंद्र सरकार ने किया चयन
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भारत सरकार ने राज्यों के सभी विश्वविद्यालयों से एक शोध प्रस्ताव मांगा गया था। अनुसूचित जाति-जनजाति पर शोध रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए भारत सकरा ने सभी राज्यों में एक-एक विश्वविद्यालय को चयनित किया जाना था। बलिया के जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के विधि विभाग के डीन व दीनदयाल शोध पीठ के समन्वयक डॉ राजीव कुमार ने भी भारत सरकार को शोध प्रस्ताव भेजा था।
अनुसूचित जातियों पर उनके द्वारा तैयार प्रोजेक्ट को भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस एंड रिसर्च विभाग की ओर से काफी पसंद किया गया और इसे चयनित कर लिया गया। डॉ राजीव कुमार भौतिक अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट दो वर्षों में भारत सरकार को देंगे। इससे इन जातियों के हित में नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो योगेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार का मानव संसाधन विकास मंत्रालय अनुसूचित जातियों को लेकर अब तक चलाई गई तमाम योजनाओं की जमीनी हकीकत व इनकी दशा-दिशा जानना चाहता है। इसके लिए उसके अधीन काम करने वाली संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस एंड रिसर्च ने देश के सभी विश्वविद्यालयों से प्रेजेंटेशन आमंत्रित किए थे।
विश्वविद्यालय में स्थापित दीनदयाल शोध पीठ के कोऑर्डिनेटर व टीडी कालेज में राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ राजीव कुमार ने अपना प्रोजेक्ट तैयार कर मानव संसाधन मंत्रालय को भेजा था। देश भर और प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों से आए प्रोजेक्टों में डॉ राजीव कुमार के प्रोजेक्ट इनोवेशन, नॉलेज एंड गवर्नेंस इन पॉलिसी : ए स्टडी ऑफ शेड्यूल्ड ट्राइब्स इन उत्तर प्रदेश को चुन लिया गया, जबकि इसके लिए प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालय प्रतियोगी थे।
जननायक चंद्रशेकर विश्वविद्यालय का प्रोजेक्ट के चयनित होने के संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का एक पत्र 25 जुलाई को विश्वविद्यालय को प्राप्त हुआ। इसके अनुसार डॉ राजीव कुमार अपनी टीम के साथ प्रदेश के सोनभद्र व कुछ अन्य आदिवासी क्षेत्रों में जाकर अनुसूचित जनजातियों से संबंधित जानकारी जुटाएंगे।