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वाराणसी: प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय को बेचने का विज्ञापन देने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज

Sun, 03 Jan 2021 11:45 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 03 Jan 2021 11:45 AM IST
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bail application of the accused for advertising the sale of the Prime Minister Parliamentary office rejected
गिरफ्तार आरोपी। - फोटो : अमर उजाला।

ओएलएक्स वेबसाइट पर प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय बेचने का विज्ञापन देने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) अशोक कुमार सिंह यादव की अदालत ने आरोपी लक्ष्मीकांत ओझा की जमानत अर्जी खारिज कर दी। एडीजीसी आलोक चंद्र शुक्ला और विनय कुमार सिंह के अनुसार उप निरीक्षक प्रकाश सिंह ने 18 दिसंबर 2020 को भेलूपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

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आरोप है कि 17 दिसंबर 2020 को विभिन्न व्हाट्स एप ग्रुप में प्रकाशित समाचार से पता चला कि भेलूपुर थाना के जवाहर नगर, एक्सटेंशन स्थित प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय को लक्ष्मीकांत ओझा नामक व्यक्ति द्वारा कूटरचित दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी की नीयत से साढ़े सात करोड़ रुपये में बेचने के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन दिया गया। जिससे प्रधानमंत्री की छवि धूमिल हो रही है। इस मामले में पुलिस ने आरोपी लक्ष्मीकांत ओझा को गिरफ्तार कर लिया। 
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पूछताछ में उसने बताया कि उसने ही अपने साथियों नवाबगंज (दुर्गाकुंड) निवासी जितेंद्र कुमार वर्मा, सरायनंदन खोजवां निवासी बाबूलाल पटेल और मनोज कुमार यादव के साथ मिलकर प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय को बेचने के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन दिया था। जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों को 18 दिसंबर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मामले में अन्य आरोपियों को बीते दिनों जमानत मिल चुकी है।

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ऐसे बनाया प्लान
डॉ. लक्ष्मीकांत ओझा चंदौली में अलीनगर स्थित एक दिव्यांग विद्यालय में शिक्षक है और पुस्तकें भी लिख चुका है, उसकी कुछ पुस्तकें अभी प्रकाशित भी होने वाली हैं। लक्ष्मीकांत ने बताया कि वह अपने परिचित दूध-दही दुकानदार मनोज, बिजली मिस्त्री बाबूलाल और चाय दुकानदार जितेंद्र के बहकावे में आ गया था। तीनों ने उससे कहा था कि इस नामीगिरामी भवन की कीमत साढ़े सात करोड़ में तय हो गई तो उसे घर बैठे कमीशन का एक प्रतिशत साढ़े सात लाख रुपये आसानी से मिल जाएगा।

तीनों उसे यह भी कहते थे कि प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय के भवन की बिक्री की चर्चा शहर में जोरशोर से है और हम ही लोग क्यों न अगुआ बनकर इसे बेच दें। लक्ष्मीकांत ने बताया कि वह स्मार्ट फोन को बहुत अच्छे तरीके से इस्तेमाल करना भी नहीं जानता है। उसकी मति कैसे भ्रष्ट हो गई थी और यह सब कैसे हो गया, वह समझ ही नहीं पा रहा है।

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