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बाबा विश्वनाथ के ‘एकता द्वार’ पर रार
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 10 Jan 2016 01:30 AM IST
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अधिग्रहण के 32 साल बाद बाबा विश्वनाथ के प्रवेश द्वार का निर्माण कराने की योजना जमीन पर आने से पहले ही सवालों के घेरे में आ गई है। जिस छत्ताद्वार पर प्रशासन ने ‘एकता द्वार’ का निर्माण कराने के लिए नापी कराई है, उस पर ज्ञानवापी मसजिद की इंतजामिया कमेटी ने एतराज जताया है।
इंतजामिया कमेटी का कहना है कि छत्ताद्वार यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। वहां वक्फ बोर्ड की अनुमति के बिना द्वार बनाना तो दूर, किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। एकता द्वार के निर्माण के लिए प्रशासन की ओर से फोटोग्राफी कराने के बाद इंतजामिया कमेटी के तेवर तल्ख हो गए हैं।
जिलाधिकारी राजमणि यादव ने बताया कि आपसी सद्भाव बना रहे, इसके लिए ‘एकता द्वार’ की योजना बनाई गई है। किसी का दिल दुखाने के लिए नहीं।
‘एकता द्वार’ को विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण योजना का हिस्सा माना जा रहा है। पहले जहां ढुंढिराज प्वाइंट से होकर बाबा के मुख्य प्रवेश द्वार से भक्त मंदिर में प्रवेश करते थे, वहीं कुछ वर्षों में भक्तों की बढ़ती भीड़ और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखकर छत्ताद्वार को ही प्रवेश द्वार के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है।
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इसी छत्ताद्वार से होकर नमाजी जुमे की नमाज अदा करने के लिए ज्ञानवापी मसजिद जाते हैं। दो महीने पहले छत्ताद्वार पर बने पुराने प्रसाधन को तो प्रशासन ने तोड़वा दिया था। इसके बाद वहां हिंदु-मुसलिम दोनों कौमों की आस्था का ध्यान रखते हुए ‘एकता द्वार’बनवाने की योजना बनाई गई।
दो दिन पहले एडीएम वित्त महेंद्र कुमार राय ने एसीएम के साथ छत्ताद्वार की फोटोग्राफी कराई थी। प्रशासन की सक्रियता को देखते हुए शहर-ए-मुफ्ती ज्ञानवापी मसजिद के मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने भी ‘एकता द्वार’ की योजना पर एतराज जताया है। मौलाना ने अमर उजाला को बताया कि छत्ताद्वार वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और वहां किसी भी तरह का निर्माण बिना उसकी अनुमति के नहीं कराया जा सकता।
यह नाइंसाफी है और इस योजना का खुलकर विरोध किया जाएगा। इस मामले में ज्ञानवापी मसजिद की अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुखी को भी पत्र भेजकर इस मामले की जानकारी दी है, ताकि उसे रोका जा सके।
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इंतजामिया कमेटी का कहना है कि छत्ताद्वार यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। वहां वक्फ बोर्ड की अनुमति के बिना द्वार बनाना तो दूर, किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। एकता द्वार के निर्माण के लिए प्रशासन की ओर से फोटोग्राफी कराने के बाद इंतजामिया कमेटी के तेवर तल्ख हो गए हैं।
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जिलाधिकारी राजमणि यादव ने बताया कि आपसी सद्भाव बना रहे, इसके लिए ‘एकता द्वार’ की योजना बनाई गई है। किसी का दिल दुखाने के लिए नहीं।
‘एकता द्वार’ को विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण योजना का हिस्सा माना जा रहा है। पहले जहां ढुंढिराज प्वाइंट से होकर बाबा के मुख्य प्रवेश द्वार से भक्त मंदिर में प्रवेश करते थे, वहीं कुछ वर्षों में भक्तों की बढ़ती भीड़ और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखकर छत्ताद्वार को ही प्रवेश द्वार के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है।
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इसी छत्ताद्वार से होकर नमाजी जुमे की नमाज अदा करने के लिए ज्ञानवापी मसजिद जाते हैं। दो महीने पहले छत्ताद्वार पर बने पुराने प्रसाधन को तो प्रशासन ने तोड़वा दिया था। इसके बाद वहां हिंदु-मुसलिम दोनों कौमों की आस्था का ध्यान रखते हुए ‘एकता द्वार’बनवाने की योजना बनाई गई।
दो दिन पहले एडीएम वित्त महेंद्र कुमार राय ने एसीएम के साथ छत्ताद्वार की फोटोग्राफी कराई थी। प्रशासन की सक्रियता को देखते हुए शहर-ए-मुफ्ती ज्ञानवापी मसजिद के मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने भी ‘एकता द्वार’ की योजना पर एतराज जताया है। मौलाना ने अमर उजाला को बताया कि छत्ताद्वार वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और वहां किसी भी तरह का निर्माण बिना उसकी अनुमति के नहीं कराया जा सकता।
यह नाइंसाफी है और इस योजना का खुलकर विरोध किया जाएगा। इस मामले में ज्ञानवापी मसजिद की अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुखी को भी पत्र भेजकर इस मामले की जानकारी दी है, ताकि उसे रोका जा सके।