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Sawan 2024: सावन भर ससुराल में अपने साले के साथ रहते हैं बाबा विश्वनाथ, गर्भगृह में एक ही अरघे में दो शिवलिंग
Tue, 23 Jul 2024 10:21 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Tue, 23 Jul 2024 10:21 PM IST
सार
काशी परंपराओं और मान्यताओं का एक विशाल संग्रह है। ऐसी ही एक मान्यता है कि भगवान शिव पूरे सावन भर अपनी ससुराल सारंगनाथ महादेव मंदिर में रहते हैं। सारंगनाथ महादेव 80 फीट की ऊंचाई पर विराजमान हैं।
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शिवलिंग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कण-कण शंकर की नगरी काशी में कदम-कदम पर शिवालय हैं। मान्यता है कि भगवान शिव पूरे सावन भर अपनी ससुराल सारंगनाथ महादेव मंदिर में विराजमान रहते हैं। सावन के महीने में अपने साले के साथ भगवान शिव भक्तों को दर्शन देकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन का फल देते हैं।
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शहर से लगभग 10 किलोमीटर पूर्वोत्तर में तथागत की उपदेश स्थली सारनाथ में जमीन से लगभग 80 फीट से अधिक ऊपर सारंगनाथ महादेव विराजमान हैं। गर्भगृह में दो शिवलिंग के दर्शन होते हैं। एक शिवलिंग आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया है। मान्यता है कि एक भगवान भोलेनाथ हैं और एक उनके साले सारंगदेव महाराज हैं।
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सारंगनाथ मंदिर के महंत परिवार के घनश्याम दुबे ने बताया कि मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ सावन में काशी छोड़कर यहीं निवास करते हैं। सावन में सारंगनाथ के दर्शन पूजन और जलाभिषेक से उतना ही पुण्य मिलता है, जितना काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन का है।
कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन नहीं कर पाता, वह एक दिन भी यदि सारंगनाथ के दर्शन कर ले तो उसे काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक के बराबर पुण्य मिलेगा। भगवान मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ ही चर्मरोगों से भी मुक्त करते हैं। मान्यता है कि जो कोई चर्मरोग से ग्रसित है वह यहां गोंद चढ़ाता है तो उसे इससे मुक्ति मिल जाती है।
तपस्या के कारण सारंग ऋषि के शरीर पर पड़ गए थे छाले
सारंग ऋषि दक्ष प्रजापति के पुत्र थे। भगवान शिव से सती के विवाह के बाद वह उनसे मिलने काशी आए। उन्होंने घोर तपस्या की और तपस्या के कारण उनके शरीर पर छाले पड़ गए। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने सारंग ऋषि को दर्शन दिया। सारंग ऋषि ने उनसे अपने साथ रहने का वरदान मांगा तो भगवान शिव ने कहा, पूरे सावन मैं तुम्हारे साथ यहीं पर रहूंगा।
तपस्या के कारण सारंग ऋषि के शरीर पर पड़ गए थे छाले
सारंग ऋषि दक्ष प्रजापति के पुत्र थे। भगवान शिव से सती के विवाह के बाद वह उनसे मिलने काशी आए। उन्होंने घोर तपस्या की और तपस्या के कारण उनके शरीर पर छाले पड़ गए। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने सारंग ऋषि को दर्शन दिया। सारंग ऋषि ने उनसे अपने साथ रहने का वरदान मांगा तो भगवान शिव ने कहा, पूरे सावन मैं तुम्हारे साथ यहीं पर रहूंगा।